Tata Sons: टाटा ग्रुप के इतिहास में पहली बार नहीं हुई AGM की बैठक, लेकिन चंद्रशेखरन और नोएल टाटा रहे मौजूद

टाटा संस की 108वीं सालाना आम बैठक 18 अगस्त को स्थगित कर दी गई. चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन और बोर्ड के कुछ डायरेक्टर बैठक में खुद शामिल हुए, जबकि नोएल टाटा और मेहली मिस्त्री ऑनलाइन शामिल हुए. अधिकारियों ने बताया कि चेयरमैन बोर्ड से सलाह लेने के बाद AGM के लिए नई तारीख तय करेंगे.

टाटा समूह में आखिर क्यों चल रहा विवाद? Image Credit: Perplexity

Highlights

  • टाटा संस की 108वीं AGM 18 अगस्त को स्थगित कर दी गई.
  • टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है.
  • AGM तय समय के मुताबिक दोपहर 2:30 बजे शुरू हुई.

मंगलवार को होने वाली टाटा संस की AGM (सालाना आम बैठक) को कोरम (जरूरी सदस्यों की संख्या) पूरा न होने के कारण स्थगित कर दिया गया है. टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है. चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन और बोर्ड के कुछ डायरेक्टर बैठक में खुद शामिल हुए, जबकि नोएल टाटा और मेहली मिस्त्री ऑनलाइन शामिल हुए. अधिकारियों ने बताया कि चेयरमैन बोर्ड से सलाह लेने के बाद AGM के लिए नई तारीख तय करेंगे.

क्यों पूरा नहीं हो पाया जरूरी कोरम?

AGM बॉम्बे हाउस में बुलाई गई थी, जिसमें कुछ स्टेकहोल्डर्स ऑनलाइन शामिल हुए. टाटा संस को कंट्रोल करने वाले दो मुख्य ट्रस्टों में से एक, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) ने कंपनी को बताया था कि महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर से सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) के लिए मंजूरी न मिलने की वजह से कोई जॉइंट रिप्रेजेंटेटिव AGM में शामिल नहीं हो सकता. इस वजह से मीटिंग के लिए जरूरी कोरम (न्यूनतम सदस्यों की संख्या) पूरा नहीं हो पाया.

टाटा संस के दूसरे मुख्य कंट्रोलिंग ट्रस्ट, SDTT ने पहले ही टाटा संस को बता दिया था कि ट्रस्ट के पास AGM के लिए जरूरी कोरम (न्यूनतम सदस्य संख्या) नहीं है.

मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के अनुसार, AGM तय समय के मुताबिक दोपहर 2:30 बजे शुरू हुई और दोपहर 3 बजे स्थगित कर दी गई. टाटा संस के निवर्तमान चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन बॉम्बे हाउस में मौजूद थे, साथ ही बोर्ड के सदस्य सौरभ अग्रवाल और अनीता मारंगोली जॉर्ज भी वहां थे. नोएल टाटा (टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन), हरीश मनवानी और वेणु श्रीनिवासन जैसे अन्य लोग वर्चुअल तरीके से शामिल हुए.

पहले से ही मिल रहे थे संकेत

चैरिटी कमिश्नर ने SRTT पर लगी रोक नहीं हटाई है. SRTT उन दो मुख्य ट्रस्टों में से एक है, जिनकी टाटा संस में बहुमत हिस्सेदारी है. इस वजह से भारत के सबसे बड़े कॉरपोरेट ग्रुप की होल्डिंग कंपनी की 18 अगस्त को होने वाली सालाना आम बैठक (AGM) पर संकट के बादल मंडरा रहे थे.

टाटा ट्रस्ट्स के करीबी अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने टाटा संस को कोरम (बैठक के लिए जरूरी सदस्यों की न्यूनतम संख्या) की कमी के बारे में बता दिया था, लेकिन वे कंपनी को AGM (सालाना आम बैठक) न करने के लिए मजबूर नहीं कर सकते थे.

चैरिटी कमिश्नर से राहत की मांग

अधिकारियों ने बताया कि टाटा ट्रस्ट्स के कुछ ट्रस्टियों ने व्यक्तिगत तौर पर चैरिटी कमिश्नर से राहत की मांग की है. माना जा रहा है कि यह कदम इस सोच के कारण उठाया गया है कि SDTT, SRTT की ओर से ऐसी राहत नहीं मांग सकती. SRTT और SDTT के पास मिलकर टाटा संस की 51.54% हिस्सेदारी है, जिसमें SRTT के पास लगभग 23.5% और SDTT के पास लगभग 28% हिस्सेदारी है.

चैरिटी कमिश्नर ने क्यों लगाई है रोक?

चैरिटी कमिश्नर ने SRTT बोर्ड के गठन और एक्ट की धारा 30A(2) का पालन न करने की शिकायतों के बाद महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट की धारा 36A(1) के तहत रोक लगाने का आदेश जारी किया था.

धारा 30A(2) बोर्ड में हमेशा रहने वाले या आजीवन ट्रस्टियों की स्वीकार्य संख्या से संबंधित है. कानून में हाल ही में किए गए एक संशोधन के तहत, पब्लिक ट्रस्ट बोर्ड में काम करने वाले हमेशा रहने वाले ट्रस्टियों की संख्या पर एक कानूनी सीमा तय की गई है.

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