Closing Bell: सेंसेक्स-निफ्टी बंपर तेजी के साथ बंद, निवेशकों ने कमाए 6 लाख करोड़; चमके ये शेयर
Closing Bell: भारतीय बाजार ने सोमवार, 25 मई को मजबूत बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया. तेल की कीमतों में भारी गिरावट के बाद दोनों बेंचमार्क इंडेक्स 1 फीसदी से अधिक चढ़ गए. US-ईरान डील की उम्मीदों और पॉजिटिव ग्लोबल संकेतों के चलते Nifty 24,000 के ऊपर रहा.

Closing Bell: सोमवार को भारतीय शेयर बाजारों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली. सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में ही लगभग 1 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई. ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते की बढ़ती उम्मीदों, तेल की गिरती कीमतों और अन्य फैक्टर्स ने बाजार के माहौल को मजबूती दी.
25 मई को भारतीय इक्विटी इंडेक्स मजबूत बढ़त के साथ बंद हुए, जिसमें US-ईरान डील की उम्मीदों और पॉजिटिव ग्लोबल संकेतों के चलते Nifty 24,000 के ऊपर रहा.
सेंसेक्स 1073.61 अंक या 1.42 फीसदी बढ़कर 76,488.96 पर और निफ्टी 312.40 अंक या 1.32 फीसदी बढ़कर 24,031.70 पर बंद हुआ.
टॉप गेनर्स और लूजर्स
Nifty पर सबसे अधिक बढ़त हासिल करने वालों में आयशर मोटर्स, L&T, बजाज फाइनेंस, अडानी एंटरप्राइजेज और HDFC Bank शामिल थे, जबकि नुकसान उठाने वालों में Max Healthcare, ONGC, Hindalco, TCS और Bajaj Auto शामिल थे.
सेक्टोरल इंडेक्स
ज्यादातर सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए, जिसमें ऑयल एंड गैस, मीडिया, ऑटो, बैंक, एनर्जी और रियल्टी इंडेक्स में 1 फीसदी की बढ़त देखने को मिली.
सेक्टोरल इंडेक्स में, निफ्टी बैंक, फाइनेंशियल सर्विसेज और प्राइवेट बैंक में 2% से ज्यादा की तेजी आई. निफ्टी PSU बैंक 3% ऊपर चढ़ा. निफ्टी ऑटो, रियल्टी, ऑयल एंड गैस और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 1% से अधिक की बढ़त हुई.
निफ्टी FMCG (0.18% की गिरावट) एकमात्र ऐसा सेक्टोरल इंडेक्स था जो लाल निशान में बंद हुआ.
6 लाख करोड़ की कमाई
निवेशकों ने एक ही सत्र में लगभग 6 लाख करोड़ रुपये कमाए, क्योंकि BSE-लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन पिछले सत्र के 463 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 469 लाख करोड़ रुपये हो गया.
पश्चिम एशिया में तनाव
अमेरिका और ईरान, दोनों द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने की दिशा में प्रगति के संकेत दिए जाने के बाद, जोखिम लेने का माहौल बेहतर हुआ है. यह जलडमरूमध्य फरवरी के अंत से ही प्रभावी रूप से बंद पड़ा था. पश्चिम एशिया में लगभग तीन महीने से जारी तनाव में संभावित कमी से यह उम्मीद जगी है कि कच्चे तेल की आपूर्ति में आ रही बाधाएं धीरे-धीरे कम हो सकती हैं.