Commodity Market में आया तूफान! MCX ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, ₹62.93 लाख करोड़ पहुंचा 1 दिन का टर्नओवर
MCX ने 28 अगस्त को 62.93 लाख करोड़ रुपए का अब तक का सबसे ज्यादा डेली टर्नओवर रिकॉर्ड किया और ये 3.13 करोड़ से ज्यादा कॉन्ट्रैक्ट में ऑप्शन एक्टिविटी की वजह से हुआ है. यह रिकॉर्ड तब बना जब एक्सचेंज स्टैंडर्ड डिलीवरी नॉर्म्स के जरिए अपने फिजिकल-डेरिवेटिव्स मार्केट लिंकेज को मजबूत कर रहा है.

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MCX) ने 28 अगस्त 2026 को 62.93 लाख करोड़ का अब तक का सबसे ज्यादा डेली टर्नओवर रिकॉर्ड किया, जो कमोडिटी डेरिवेटिव्स मार्केट में मजबूत एक्टिविटी का संकेत है. एक्सचेंज की वेबसाइट पर पब्लिश ट्रेड स्टैटिस्टिक्स के मुताबिक, MCX ने 3.13 करोड़ से ज्यादा कॉन्ट्रैक्ट्स में कुल 62,93,465.46 करोड़ का फ्यूचर्स और ऑप्शंस टर्नओवर रिकॉर्ड किया. कुल टर्नओवर में ऑप्शंस का हिस्सा 61,84,516.04 करोड़ था जबकि फ्यूचर्स का हिस्सा 1,08,949.42 करोड़ रहा.
कमोडिटी मार्केट और डेरिवेटिव्स प्लेटफॉर्म के बीच लिंक
यह रिकॉर्ड टर्नओवर ऐसे समय में हुआ है जब MCX फिजिकल कमोडिटी मार्केट और अपने डेरिवेटिव्स प्लेटफॉर्म के बीच लिंक को मजबूत करने के लिए कदम उठा रहा है. इस साल के शुरुआत में, एक्सचेंज ने प्राइमरी एल्युमीनियम, रिफाइंड कॉपर और रिफाइंड जिंक के लिए गुड डिलीवरी नॉर्म्स पेश किए थे. यह फ्रेमवर्क प्रोड्यूसिंग प्लांट्स के एम्पैनलमेंट और एक्सचेंज कॉन्ट्रैक्ट्स के बदले डिलीवरी के लिए मेटल की एक्सेप्टेंस के लिए नॉर्म्स तय करता है.
इन नियमों में प्रोडक्शन प्लांट्स में ऑडिटिंग, एसेइंग (assaying) और टेस्टिंग शामिल हैं और इनका मकसद डिलीवर होने वाली मेटल की क्वालिटी और एक्सेप्टेबिलिटी में ज्यादा एक जैसापन लाना है. स्टैंडर्डाइज़्ड, एक्सचेंज-अप्रूव्ड सप्लाई का एक बड़ा पूल भी अंडरलाइंग कॉन्ट्रैक्ट्स में पार्टिसिपेशन और हेजिंग एक्टिविटी को सपोर्ट कर सकता है.
क्या है कमोडिटी मार्केट एक्सपर्ट का कहना?
इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स में कमोडिटीज़, करेंसीज और GIFT सिटी, IFSC के डायरेक्टर और कमोडिटीज मार्केट एक्सपर्ट नवीन माथुर ने कहा कि पार्टिसिपेशन में बढ़ोतरी हेजर्स, ट्रेडर्स और इन्वेस्टर्स के बीच ऑर्गनाइज़्ड कमोडिटी मार्केट्स की बढ़ती भूमिका को दिखाती है.
ननीन माथुर ने कहा, MCX पर पार्टिसिपेशन में बढ़ोतरी यह दिखाती है कि हेजर्स, ट्रेडर्स और इन्वेस्टर्स के लिए ऑर्गनाइज़्ड कमोडिटी मार्केट्स की बढ़ती जरूरत है. स्टैंडर्डाइज़्ड डिलीवरी और क्वालिटी फ्रेमवर्क सहित फिजिकल और डेरिवेटिव्स मार्केट्स के बीच लिंकेज को मजबूत करने वाली पहल इकोसिस्टम में क्रेडिबिलिटी बढ़ाती है. लगातार प्रोडक्ट इनोवेशन और ज्यादा पार्टिसिपेशन से भारत के कमोडिटी मार्केट्स को और गहरा करने में मदद मिलेगी.
ये भी पढ़ें- 30 फीसदी से ज्यादा टूटे ये 3 फंडामेंटली मजबूत शेयर, वॉचलिस्ट में करें शामिल, दे सकते हैं अच्छा रिटर्न