रडार पर रखें EV बैटरी सप्लाई चेन की ये 4 कंपनियां, दमदार है ग्रोथ प्लान, 5 साल में 1037% तक उछले शेयर
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बढ़ती मांग के साथ बैटरी मटेरियल का बाजार भी तेजी से विस्तार कर रहा है. ऐसे में कुछ भारतीय कंपनियां इलेक्ट्रोलाइट, एनोड, कैथोड और बैटरी केमिकल्स के घरेलू उत्पादन पर बड़ा निवेश कर रही हैं. इन कंपनियों के मजबूत ग्रोथ प्लान और पिछले पांच वर्षों में शानदार शेयर रिटर्न ने इन्हें निवेशकों के रडार पर ला दिया है.

EV Battery Stocks : भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की मांग तेजी से बढ़ रही है. FY26 में देश में 24 लाख से ज्यादा EV की बिक्री हुई, जबकि FY30 तक बैटरी की मांग 160 GWh तक पहुंचने का अनुमान है. अब तक बैटरी बनाने में इस्तेमाल होने वाले ज्यादातर जरूरी केमिकल्स और मटेरियल चीन से आयात किए जाते थे, लेकिन अब भारतीय कंपनियां इस सेक्टर में तेजी से निवेश कर रही हैं. गुजरात फ्लोरोकेमिकल्स, हिमाद्री स्पेशलिटी केमिकल, निओजेन केमिकल्स और अक्यूटास केमिकल्स जैसी कंपनियां बैटरी मटेरियल का घरेलू उत्पादन बढ़ाकर भारत की EV सप्लाई चेन को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रही हैं.
Gujarat Fluorochemicals
गुजरात फ्लोरोकेमिकल्स अपनी सहायक कंपनी GFCL EV के जरिए लिथियम-आयन बैटरी के लिए LiPF6 इलेक्ट्रोलाइट सॉल्ट, इलेक्ट्रोलाइट फॉर्मुलेशन, LFP कैथोड मटेरियल, PVDF बाइंडर और एनोड मटेरियल तैयार कर रही है. कंपनी ने पहले चरण की उत्पादन क्षमता शुरू कर दी है और कई बड़े ग्राहकों से ऑर्डर भी हासिल किए हैं. LiPF6 को दुनिया की प्रमुख इलेक्ट्रोलाइट कंपनियों से मंजूरी मिल चुकी है और FY27 के लिए ऑर्डर भी बुक हो चुके हैं. कंपनी FY27 में करीब 2,300 करोड़ रुपये और FY28 तक कुल 6,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना पर काम कर रही है.
स्टॉक के चार्ट
बीते पांच साल में स्टॉक ने 258 फीसदी (26 जून तक) तक रिटर्न दिया है.
Himadri Speciality Chemical
हिमाद्री स्पेशलिटी केमिकल ने अप्रैल 2026 में पश्चिम बंगाल के महिष्टिकरी में अपना पहला एनोड मटेरियल प्लांट शुरू किया. शुरुआती क्षमता 200 MTPA है. कंपनी की खासियत इसकी बैकवर्ड इंटीग्रेशन है, क्योंकि एनोड निर्माण में इस्तेमाल होने वाला हाई-प्योरिटी कोल टार पिच कंपनी खुद तैयार करती है. इससे गुणवत्ता और लागत दोनों पर बेहतर नियंत्रण मिलता है. कंपनी LFP कैथोड मटेरियल प्रोजेक्ट पर भी काम कर रही है, जिसका पहला चरण FY27 की तीसरी तिमाही में शुरू होने का टारगेट है. FY26 में कंपनी का EBITDA 1,006 करोड़ रुपये और नेट प्रॉफिट 755 करोड़ रुपये रहा, जिससे आगे के निवेश को मजबूती मिलेगी.
स्टॉक के चार्ट
बीते पांच साल में स्टॉक ने 1037 फीसदी (26 जून तक) तक रिटर्न दिया है.
Neogen Chemicals इलेक्ट्रोलाइट केमिकल्स पर कर रही बड़ा दांव
निओजेन केमिकल्स अपनी सहयोगी कंपनी Neogen Ionics के जरिए लिथियम-आयन बैटरियों में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रोलाइट सॉल्ट और स्पेशियलिटी इलेक्ट्रोलाइट केमिकल्स डेवलप कर रही है. कंपनी ने जापान के मोरिता ग्रुप के साथ ज्वाइंट वेंचर (JV) किया है, जिससे उसे आधुनिक तकनीक का फायदा मिलेगा और चीन के विकल्प के रूप में वैश्विक ग्राहकों को सप्लाई करने का अवसर मिलेगा. FY26 में बैटरी केमिकल्स से कंपनी का रेवेन्यू 36 करोड़ रुपये रही, जबकि कुल कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 862 करोड़ रुपये दर्ज किया गया.
स्टॉक के चार्ट
बीते पांच साल में स्टॉक ने 125 फीसदी (26 जून तक) तक रिटर्न दिया है.
Acutaas Chemicals ने इलेक्ट्रोलाइट एडिटिव्स में बनाई पहचान
पहले AMI Organics के नाम से जानी जाने वाली अक्यूटास केमिकल्स भारत की पहली कंपनी है, जिसने लिथियम-आयन बैटरियों के लिए इलेक्ट्रोलाइट एडिटिव्स का निर्माण शुरू किया है. कंपनी Vinylene Carbonate (VC) और Fluoroethylene Carbonate (FEC) जैसे उत्पाद विकसित कर रही है, जो बैटरी की लाइफ, सेफ्टी और प्रदर्शन को बेहतर बनाते हैं. फिलहाल इस कारोबार से आय सीमित है, लेकिन कंपनी ने इसके लिए अलग मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर लिया है.
स्टॉक चार्ट
बीते पांच साल में स्टॉक ने 625 फीसदी (26 जून तक) तक रिटर्न दिया है.
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