F&O ट्रेडिंग में 10 में से करीब 9 ट्रेडर्स को हुआ नुकसान, FY26 में डूबे 91685 करोड़ रुपये; SEBI स्टडी में खुलासा

SEBI की FY26 स्टडी में F&O ट्रेडिंग को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. FY26 में 87.7 फीसदी इंडिविजुअल F&O ट्रेडर्स को नुकसान हुआ और कुल नुकसान 91,685 करोड़ रुपये रहा. एक्टिव ट्रेडर्स की संख्या 18 फीसदी घटकर 87.5 लाख रह गई, लेकिन प्रति ट्रेडर औसत नुकसान 1.17 लाख रुपये पहुंच गया. स्टडी के मुताबिक, कुल नुकसान में ऑप्शंस की हिस्सेदारी 92 फीसदी रही.

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F&O Trading: भारत के रिटेल डेरिवेटिव्स मार्केट में FY26 के दौरान ट्रेडर्स की संख्या में गिरावट आई, लेकिन नुकसान का सिलसिला जारी रहा. SEBI की नई स्टडी के मुताबिक, FY26 में इंडिविजुअल F&O ट्रेडर्स को कुल 91,685 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. इस दौरान 87.7 फीसदी इंडिविजुअल ट्रेडर्स को नुकसान हुआ. खास बात यह है कि एक्टिव ट्रेडर्स की संख्या में 18 फीसदी की गिरावट के बावजूद औसत नुकसान बढ़ गया.

87.5 लाख रह गई एक्टिव ट्रेडर्स की संख्या

SEBI के मुताबिक, FY26 में एक्टिव इंडिविजुअल ट्रेडर्स की संख्या घटकर 87.5 लाख रह गई, जो FY25 में 106.2 लाख थी. यह FY16 के बाद पहली बड़ी गिरावट है. वहीं, नए ट्रेडर्स की संख्या भी 34.3 लाख से घटकर 20.8 लाख रह गई. करीब 46 लाख ट्रेडर्स ऐसे रहे, जिन्होंने FY26 के दौरान मार्केट से बाहर निकलने के बाद दोबारा ट्रेडिंग शुरू नहीं की.

इसके बावजूद नुकसान में उतनी बड़ी गिरावट नहीं आई. FY25 में संशोधित तौर पर कुल नुकसान 1.12 लाख करोड़ रुपये था, जो FY26 में 18 फीसदी घटकर 91,685 करोड़ रुपये रह गया. हालांकि, प्रति ट्रेडर औसत नुकसान 2 फीसदी बढ़कर 1.17 लाख रुपये हो गया, जो FY25 में 1.13 लाख रुपये था.

ऑप्शंस ट्रेडिंग में सबसे ज्यादा नुकसान

SEBI की स्टडी के मुताबिक, FY26 में इंडिविजुअल ट्रेडर्स के कुल नुकसान में ऑप्शंस की हिस्सेदारी 92 फीसदी रही. करीब 23 फीसदी ट्रेडर्स ने ऑप्शंस में हुए कुल नुकसान का लगभग 90 फीसदी हिस्सा उठाया. FY26 में 99.3 फीसदी इंडिविजुअल ट्रेडर्स ने कम से कम एक बार ऑप्शंस में ट्रेडिंग की, जबकि 93 फीसदी ट्रेडर्स ने सिर्फ ऑप्शंस में ट्रेडिंग की. इसके मुकाबले केवल 6.6 फीसदी ट्रेडर्स ने फ्यूचर्स में हिस्सा लिया. ऑप्शंस में नुकसान उठाने वाले ट्रेडर्स की हिस्सेदारी 87.7 फीसदी रही, जबकि फ्यूचर्स में यह आंकड़ा 66 फीसदी था.

30 साल से कम उम्र के ट्रेडर्स की हिस्सेदारी बढ़ी

रिटेल F&O मार्केट में युवा ट्रेडर्स की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है. 30 साल से कम उम्र के ट्रेडर्स की हिस्सेदारी FY22 में 31 फीसदी थी, जो FY26 में बढ़कर 43 फीसदी हो गई. इनमें करीब 89 फीसदी ट्रेडर्स को नुकसान हुआ. आय के स्तर पर भी तस्वीर चिंताजनक है. 5 लाख रुपये से कम सालाना आय वाले ट्रेडर्स कुल इंडिविजुअल पार्टिसिपेंट्स के करीब तीन-चौथाई रहे.

इनकी हिस्सेदारी कुल टर्नओवर में करीब 43 फीसदी थी, लेकिन कुल नुकसान में इनकी हिस्सेदारी 53 फीसदी रही. वहीं, टॉप 30 शहरों के बाहर रहने वाले ट्रेडर्स अब कुल इंडिविजुअल पार्टिसिपेंट्स के करीब दो-तिहाई हैं. इससे पता चलता है कि F&O ट्रेडिंग अब बड़े वित्तीय केंद्रों तक सीमित नहीं रह गई है.

प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग फर्म्स और FPI को मुनाफा

इंडिविजुअल ट्रेडर्स के मुकाबले प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग फर्म्स और संस्थागत खिलाड़ियों का प्रदर्शन बेहतर रहा. FY26 में प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग फर्म्स ने करीब 44,000 करोड़ रुपये का ग्रॉस प्रॉफिट कमाया. इसके बाद FPI ने करीब 14,000 करोड़ रुपये और कॉरपोरेट्स ने करीब 8,000 करोड़ रुपये का ग्रॉस प्रॉफिट कमाया. SEBI के मुताबिक, FPI और प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग डेस्क द्वारा कमाए गए करीब 99 फीसदी प्रॉफिट में एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग की भूमिका रही.

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