Swiggy के शेयरों आएगा 60 फीसदी का उछाल, ब्रोकरेज ने दी खरीदने की सलाह; जानें- टारगेट प्राइस
Swiggy Share Target Price: NSE पर कंपनी के शेयर 4.78 फीसदी बढ़कर 285.40 रुपये के इंट्राडे हाई पर पहुंच गए. बाद में, प्रॉफिट बुकिंग के कारण स्टॉक की बढ़त थोड़ी गिरावट आई और दोपहर करीब 02:26 बजे यह 3 फीसदी की बढ़त के साथ 280.55 रुपये पर ट्रेड कर रहा था.
Highlights
- जेफरीज ने स्विगी के शेयर पर 'बाय' रेटिंग दी है.
- स्विगी के शेयर में दो दिन से जारी गिरावट थम गई.
- ब्रोकरेज ने स्विगी का टारगेट प्राइस ₹435 तय किया है.
Swiggy Share Target Price: गुरुवार को इंट्राडे ट्रेडिंग में स्विगी के शेयरों में लगभग 5 फीसदी की बढ़त हुई. ऐसा ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज (Jefferies) के इस स्टॉक पर बुलिश (तेजी की उम्मीद) होने और 435 रुपये का टारगेट प्राइस तय करने के बाद हुआ. यह टारगेट प्राइस बुधवार के क्लोजिंग लेवल से लगभग 60 फीसदी अधिक है.
NSE पर कंपनी के शेयर 4.78 फीसदी बढ़कर 285.40 रुपये के इंट्राडे हाई पर पहुंच गए. बाद में, प्रॉफिट बुकिंग के कारण स्टॉक की बढ़त थोड़ी गिरावट आई और दोपहर करीब 02:26 बजे यह 3 फीसदी की बढ़त के साथ 280.55 रुपये पर ट्रेड कर रहा था.
स्विगी का टारगेट प्राइस
जेफरीज द्वारा स्विगी पर 435 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ ‘बाय’ (खरीदने) की सलाह देने के बाद स्टॉक में दो दिन से जारी गिरावट थम गई. जेफरीज़ ने कहा कि शेयरधारकों द्वारा कुल विदेशी हिस्सेदारी पर 49.5 फीसदी की सीमा (कैप) को मंजूरी देने के बाद, स्विगी का भारतीय स्वामित्व और नियंत्रण वाली कंपनी (IOCC) बनने की दिशा में कदम एक और आगे बढ़ गया है.
फर्स्ट-पार्टी इन्वेंट्री-बेस्ड मॉडल
फर्म ने कहा कि यह कदम इंस्टामार्ट (Instamart) को फर्स्ट-पार्टी इन्वेंट्री-बेस्ड मॉडल की ओर ले जाने के मैनेजमेंट के प्लान को सपोर्ट करता है, जिससे मार्जिन में लगभग 80 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी हो सकती है.
जेफरीज ने कहा कि हालांकि ओनरशिप कैप संभावित रेगुलेटरी रिस्क को कम करने में मदद कर सकती है, लेकिन नया विदेशी ओनरशिप फ्रेमवर्क लागू होने पर पैसिव आउटफ्लो (निवेश का बाहर जाना) की आशंका है. उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में कुछ सप्ताह लग सकते हैं.
अतिरिक्त कॉन्ट्रिब्यूशन मार्जिन
स्विगी के IOCC स्टेटस की ओर बढ़ने से इंस्टामार्ट के लिए प्रति ऑर्डर लगभग 4-5 रुपये का अतिरिक्त कॉन्ट्रिब्यूशन मार्जिन मिल सकता है, क्योंकि क्विक-कॉमर्स बिजनेस को डायरेक्ट इन्वेंट्री ओनरशिप की ओर बढ़ने में अधिक फ्लेक्सिबिलिटी मिलेगी.
स्विगी के शेयरधारकों ने 18 अगस्त को कुल विदेशी हिस्सेदारी पर 49.5 फीसदी की सीमा और गवर्नेंस स्ट्रक्चर में बदलाव को मंजूरी दी, जिससे IOCC के रूप में क्वालिफाई करने की कोशिश में एक बड़ी बाधा दूर हो गई.
डायरेक्ट इन्वेंट्री ओनरशिप
एनालिस्ट्स के अनुसार, मार्जिन का फायदा मुख्य रूप से प्रोक्योरमेंट (खरीद) से मिलने की उम्मीद है, क्योंकि डायरेक्ट इन्वेंट्री ओनरशिप की ओर बढ़ने से इंस्टामार्ट उस इकोनॉमिक्स का बड़ा हिस्सा अपने पास रख सकेगा जो अभी बिचौलियों के पास जा रहा है.
स्विगी का वित्तीय प्रदर्शन
फूड और ग्रॉसरी डिलीवरी प्लेटफॉर्म स्विगी ने 30 जुलाई को बताया कि वित्त वर्ष 2026-25 (FY27) की पहली तिमाही (Q1) में उसका नेट लॉस सालाना आधार पर (YoY) लगभग 34 फीसदी घटकर 791 करोड़ रुपये हो गया है, जो एक साल पहले इसी अवधि में 1,197 करोड़ रुपये था. बेंगलुरु की इस कंपनी ने पिछली तिमाही में 800 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया था.
Q1 में स्विगी का ऑपरेशन से रेवेन्यू सालाना आधार पर 37 फीसदी बढ़कर 6,812 करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले 4,961 करोड़ रुपये था. पिछली तिमाही में कंपनी ने 6,383 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया था.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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