6 सेशंस में 5 बार सेलिंग, FPIs ने निकाले $1.6 बिलियन; क्रूड ऑयल और बॉन्ड यील्ड ने बढ़ाई चिंता
इंडियन स्टॉक मार्केट में फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स यानी FPIs की खरीदारी एक बार फिर सेलिंग में बदल गई है. पिछले छह ट्रेडिंग सेशंस में से पांच में FPIs ने करीब 1.6 बिलियन डॉलर के इंडियन स्टॉक्स बेच दिए हैं. जून के मध्य से अगस्त के अंत तक करीब 6.85 बिलियन डॉलर की खरीदारी के बाद यह बदलाव आया है.

FPI Selling: इंडियन स्टॉक मार्केट में फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स यानी FPIs की खरीदारी का सिलसिला एक बार फिर सेलिंग में बदल गया है. जून के मध्य से अगस्त के अंत तक करीब 6.85 बिलियन डॉलर की इंडियन इक्विटीज खरीदने के बाद फॉरेन इन्वेस्टर्स ने पिछले छह ट्रेडिंग सेशंस में से पांच में सेलिंग की है. इस दौरान FPIs ने करीब 1.6 बिलियन डॉलर के इंडियन स्टॉक्स बेच दिए हैं.
क्रूड ऑयल और बॉन्ड यील्ड्स ने बढ़ाई चिंता
हालिया FPI सेलिंग के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं. पहला, क्रूड प्राइसेज में तेजी से इंडिया में इंफ्लेशन, करंट अकाउंट डेफिसिट और रुपये को लेकर चिंता बढ़ी है. दूसरा, यू.एस. और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड्स में बढ़ोतरी के साथ डॉलर मजबूत हुआ है, जिससे इमर्जिंग मार्केट्स में रिस्क एपेटाइट कम हुई है.
तीसरा कारण दो महीने की तेजी के बाद प्रॉफिट बुकिंग है. इसके अलावा, ग्लोबल फंड्स का एलोकेशन एक बार फिर AI-थीम्ड स्टॉक्स की ओर बढ़ रहा है. यू.एस., ताइवान और साउथ कोरिया में AI और टेक्नोलॉजी थीम्स में निवेश बढ़ने से इंडियन इक्विटीज की आकर्षण कुछ कम हुई है.
जुलाई के अंत से क्रूड ऑयल करीब 20% चढ़ा
इंडिया के लिए क्रूड ऑयल प्राइसेज में हालिया तेजी काफी महत्वपूर्ण है. ET की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई के अंत से क्रूड ऑयल प्राइसेज करीब 20% बढ़ चुके हैं. अगर क्रूड ऑयल लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहता है, तो इंडिया के इंपोर्ट बिल पर दबाव बढ़ सकता है. इससे रुपये पर दबाव और इंफ्लेशनरी प्रेशर बढ़ने की आशंका है.
वहीं, ग्लोबल बॉन्ड यील्ड्स में लगातार बढ़ोतरी से डेवलप्ड मार्केट्स में इन्वेस्टमेंट ज्यादा आकर्षक हो सकता है. इससे इमर्जिंग मार्केट्स की इक्विटीज से कैपिटल फ्लो बाहर जाने का जोखिम बढ़ सकता है.
बड़े IPOs के लिए भी पैसा जुटा रहे फॉरेन इन्वेस्टर्स
FPI सेलिंग का एक अन्य कारण इंडिया के प्राइमरी मार्केट में बढ़ रही गतिविधि भी हो सकती है. आने वाले समय में NSE और Jio Platforms जैसे बड़े IPOs बाजार में आने की उम्मीद है. ऐसे में फॉरेन इन्वेस्टर्स सेकेंडरी मार्केट में स्टॉक्स बेचकर बड़े IPOs में निवेश के लिए कैपिटल जुटा सकते हैं.
डोमेस्टिक इन्वेस्टर्स दे रहे मार्केट को सपोर्ट
फॉरेन इन्वेस्टर्स की सेलिंग के बावजूद डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स यानी DIIs की लगातार खरीदारी इंडियन स्टॉक मार्केट को सपोर्ट दे रही है. रिपोर्ट के अनुसार, इस साल FPI सेलिंग से लार्ज-कैप स्टॉक्स पर खास दबाव पड़ा है, जबकि डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स ने लगातार खरीदारी करके मार्केट को सहारा दिया है.
आगे कैसी रह सकती है FPI सेलिंग
एक्सपर्ट्स का मानना है कि FPI सेलिंग फिलहाल मार्च से जून 2026 के दौरान देखी गई तरह एकतरफा और बेहद तेज आउटफ्लो में बदलने की संभावना कम है. फॉरेन इन्वेस्टर्स की सेलिंग ऑयल प्राइसेज और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड्स में होने वाले बदलाव के प्रति सेंसिटिव रह सकती है.
कुल मिलाकर, क्रूड ऑयल प्राइसेज में तेजी, ग्लोबल बॉन्ड यील्ड्स में बढ़ोतरी, मजबूत डॉलर, प्रॉफिट बुकिंग और AI-थीम्ड स्टॉक्स की ओर ग्लोबल कैपिटल रोटेशन ने इंडियन इक्विटीज पर दबाव बढ़ाया है. आने वाले समय में FPI फ्लोज की दिशा काफी हद तक ऑयल प्राइसेज, ग्लोबल यील्ड्स और कॉरपोरेट अर्निंग्स के प्रदर्शन पर निर्भर करेगी.
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