FPI Selling: विदेशी निवेशकों ने 9 महीने में निकाले 3 लाख करोड़ रुपये, बाजार पर बढ़ा दबाव

शेयर मार्केट से विदेशी निवेशकों की बिकवाली 2026 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है. पहले 9 महीनों में FPI ने भारतीय इक्विटी से 3.05 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा निकाल लिए हैं. यह अब तक का सबसे बड़ा सालाना आउटफ्लो है. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी, मजबूत डॉलर, ग्लोबल ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और महंगे कच्चे तेल ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है.

2026 के पहले 9 महीनों में FPI ने इक्विटी से 3.05 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा निकाले. Image Credit: tv9 bharatvarsh

शेयर मार्केट से विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने 2026 में नया रिकॉर्ड बना दिया है. पहले 9 महीनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI ने भारतीय शेयरों से 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा निकाल लिए हैं. यह पहली बार है जब किसी साल में सेकेंडरी मार्केट से FPI आउटफ्लो 3 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा है. इससे पहले 2025 में FPI ने 2.4 लाख करोड़ रुपये और 2024 में 1.21 लाख करोड़ रुपये निकाले थे. साल खत्म होने में अभी तीन महीने बाकी हैं और बाजार में विदेशी बिकवाली का दबाव बना हुआ है.

3.05 लाख करोड़ रुपये की निकासी

NSDL के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 में अब तक FPI भारतीय इक्विटी से 3.05 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा निकाल चुके हैं. इस साल के अभी तीन महीने बाकी हैं. ऐसे में FPI आउटफ्लो पहले के सभी सालाना रिकॉर्ड को पार कर चुका है. अगर सरकारी बॉन्ड में Fully Accessible Route यानी FAR के तहत हुई निकासी को भी शामिल किया जाए तो कुल आउटफ्लो करीब 3.58 लाख करोड़ रुपये हो जाता है. इससे विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार से निकासी का पैमाना समझा जा सकता है.

क्यों बेच रहे हैं विदेशी निवेशक

विदेशी निवेशकों की बिकवाली के पीछे कई ग्लोबल कारण बताए जा रहे हैं. ग्लोबल ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों का भी निवेशकों के फैसले पर असर पड़ रहा है. इसके अलावा कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के लिए चिंता का कारण हैं. महंगे क्रूड से देश का इंपोर्ट बिल बढ़ सकता है और कंपनियों के मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है.

सितंबर में फिर तेज हुई बिकवाली

FPI ने 2026 के पहले 9 महीनों में से छह महीने भारतीय शेयरों में बिकवाली की है. जुलाई और अगस्त में विदेशी निवेशकों ने मिलाकर 46,180 करोड़ रुपये का निवेश किया था. इस दौरान ताइवान और दक्षिण कोरिया के बाजारों में तेजी कमजोर हुई थी. इसके बाद सितंबर में FPI फिर बिकवाल बन गए. सितंबर में उन्होंने करीब 33,000 करोड़ रुपये की निकासी की. वेस्ट एशिया में तनाव, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी, रुपये की कमजोरी और दक्षिण कोरिया तथा ताइवान के बाजारों में फिर बढ़ती दिलचस्पी का असर FPI फ्लो पर पड़ा.

FPI Selling से बाजार पर दबाव

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बीच 2026 में भारतीय शेयर मार्केट के प्रमुख इंडेक्स में भी गिरावट आई है. लोकल करेंसी के आधार पर सेंसेक्स करीब 15.5 फीसदी और निफ्टी करीब 14 फीसदी नीचे हैं. डॉलर के आधार पर दोनों इंडेक्स में 20 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है. FPI की बिकवाली से बाजार में लिक्विडिटी पर असर पड़ सकता है और सेंटीमेंट भी प्रभावित हो सकता है. हालांकि कुछ विदेशी निवेशक चुनिंदा छोटे और मिडकैप शेयरों में रुचि दिखा रहे हैं.

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बॉन्ड बाजार से भी निकला विदेशी पैसा

FPI की निकासी सिर्फ शेयर मार्केट तक सीमित नहीं रही है. सरकारी बॉन्ड में FAR के तहत जून में विदेशी निवेश बढ़ा था. सरकार की ओर से विदेशी कैपिटल आकर्षित करने के उपायों और जून और जुलाई में FAR के तहत कुल 49,355 करोड़ रुपये का निवेश हुआ. लेकिन Bloomberg की ओर से भारतीय बॉन्ड को इंडेक्स में शामिल करने को टालने के बाद निवेश की रफ्तार कम हुई. अगस्त और सितंबर में FAR के तहत 11,439 करोड़ रुपये की निकासी हुई.

डिस्क्लेमर: Money9live कभी भी किसी शेयर, आईपीओ और म्यूचुअल फंड में निवेश की सलाह नहीं देता है. ये खबर केवल आपकी जानकारी के लिए है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.