सरकारी कंपनी ने रच दिया इतिहास! 4 साल में 300% बढ़ा कारोबार, अब मिला नवरत्न का दर्जा

कोलकाता की सरकारी रक्षा कंपनी गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) को अब 'नवरत्न' का दर्जा मिल गया है. यह सम्मान सार्वजनिक उद्यम विभाग (DPE) की ओर से दिया गया है. किसी भी सरकारी कंपनी के लिए नवरत्न का दर्जा बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इससे उसे कारोबार बढ़ाने और बड़े फैसले लेने की ज्यादा आजादी मिलती है.

GRSE Image Credit: CANVA

GRSE: भारत में रक्षा क्षेत्र की सरकारी कंपनियां लगातार मजबूत हो रही हैं और देश को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभा रही हैं. इसी दिशा में एक बड़ी खबर सामने आई है. कोलकाता की सरकारी रक्षा कंपनी गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) को अब ‘नवरत्न’ का दर्जा मिल गया है. यह सम्मान सार्वजनिक उद्यम विभाग (DPE) की ओर से दिया गया है. किसी भी सरकारी कंपनी के लिए नवरत्न का दर्जा बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इससे उसे कारोबार बढ़ाने और बड़े फैसले लेने की ज्यादा आजादी मिलती है.

पिछले कुछ वर्षों में GRSE ने कारोबार, मुनाफे और उत्पादन के मामले में शानदार प्रदर्शन किया है. कंपनी ने भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के लिए कई युद्धपोत तैयार किए हैं. यही वजह है कि सरकार ने उसके लगातार अच्छे प्रदर्शन को देखते हुए यह बड़ा दर्जा दिया है. कंपनी का कहना है कि इससे भविष्य में नए अवसर मिलेंगे और भारत को समुद्री ताकत बनाने के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी.

शुक्रवार को मिला नवरत्न का दर्जा

ET के मुताबिक GRSE के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कंपनी को शुक्रवार को आधिकारिक तौर पर नवरत्न का दर्जा दिया गया. यह सम्मान कंपनी के कई वर्षों के लगातार अच्छे वित्तीय और कामकाजी प्रदर्शन को देखते हुए दिया गया है.

नवरत्न का दर्जा मिलने के बाद किसी सरकारी कंपनी को निवेश और विस्तार से जुड़े फैसले लेने में अधिक स्वतंत्रता मिलती है. इससे कंपनी तेजी से नए प्रोजेक्ट्स पर काम कर सकती है.

चार साल में कारोबार में जबरदस्त बढ़ोतरी

कंपनी के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2021-22 में GRSE की परिचालन आय 1,754 करोड़ रुपये थी. यह बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 7,002 करोड़ रुपये पहुंच गई. यानी चार साल में कंपनी का कारोबार करीब 300 प्रतिशत बढ़ गया.

इसी अवधि में कंपनी का शुद्ध मुनाफा भी 190 करोड़ रुपये से बढ़कर 748 करोड़ रुपये हो गया. यह लगभग 294 प्रतिशत की बढ़ोतरी है.

युद्धपोत बनाने में देश की बड़ी कंपनी

GRSE मुख्य रूप से युद्धपोत बनाने का काम करती है. इसके अलावा कंपनी व्यावसायिक जहाज भी तैयार करती है. वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी ने कुल 8 युद्धपोतों की डिलीवरी दी. खास बात यह रही कि 30 मार्च 2026 को एक ही दिन में 3 युद्धपोत सौंपे गए. कंपनी अब तक भारतीय नौसेना, भारतीय तटरक्षक बल और कई मित्र देशों को बड़ी संख्या में जहाज दे चुकी है.

118 में से 80 युद्धपोत भारतीय नौसेना को मिले

कंपनी के अनुसार अब तक GRSE कुल 118 युद्धपोतों की डिलीवरी कर चुकी है. इनमें से 80 युद्धपोत भारतीय नौसेना में शामिल किए जा चुके हैं. यह किसी भी भारतीय शिपबिल्डिंग कंपनी के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है.

CMD ने बताया ऐतिहासिक पल

GRSE के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक कमोडोर पी. आर. हरि (सेवानिवृत्त) ने कहा कि नवरत्न का दर्जा मिलना कंपनी की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है. उन्होंने कहा कि इससे कंपनी को नए अवसरों पर काम करने, रक्षा उत्पादन को मजबूत करने और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बढ़ाने में मदद मिलेगी. साथ ही यह भारत को वर्ष 2047 तक दुनिया की प्रमुख समुद्री ताकत बनाने के लक्ष्य में भी योगदान देगा.

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