भारत में बढ़ेगी ट्रांसफॉर्मर कैपेसिटी, इन 3 स्टॉक्स पर रखें नजर; ₹9 लाख करोड़ का है पूरा खेल

भारत में बिजली की बढ़ती मांग और पावर ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश से ट्रांसफॉर्मर और CTC से जुड़ी कंपनियों के लिए अवसर बढ़ रहा है. FY23 से FY32 के बीच करीब ₹9 लाख करोड़ के ट्रांसमिशन ग्रिड कैपेक्स की योजना है. भारत की ट्रांसफॉर्मर कैपेसिटी FY28 तक 110 GVA से बढ़कर करीब 300 GVA पहुंच सकती है.

ट्रांसफॉर्मर स्टॉक Image Credit: money9live.com

Transformer Stocks: भारत में बिजली की बढ़ती मांग के साथ पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर तेजी से काम हो रहा है. रिन्यूएबल एनर्जी, डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के बढ़ते इस्तेमाल से देश में बिजली की खपत बढ़ रही है. ऐसे में बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ उसे एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने वाले ग्रिड नेटवर्क को भी मजबूत करना जरूरी हो गया है. इसी ट्रेंड का फायदा पावर ट्रांसफॉर्मर और उनसे जुड़े कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों को मिल सकता है. भारत की ट्रांसफॉर्मर कैपेसिटी 110 GVA से बढ़कर FY28 तक करीब 300 GVA पहुंच सकती है.

₹9 लाख करोड़ के ग्रिड कैपेक्स से खुल रहा बड़ा अवसर

Financial Express की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में FY23 से FY32 के बीच करीब ₹9 लाख करोड़ के ट्रांसमिशन ग्रिड कैपेक्स की योजना है. इसका सीधा फायदा केवल ट्रांसमिशन कंपनियों या ट्रांसफॉर्मर निर्माताओं को ही नहीं मिलेगा, बल्कि उन कंपनियों को भी मिल सकता है, जो ट्रांसफॉर्मर के लिए जरूरी स्पेशलाइज्ड वायर और कंडक्टर बनाती हैं. ट्रांसफॉर्मर कैपेसिटी बढ़ने पर CTC की जरूरत भी बढ़ेगी, जिससे इस क्षेत्र की कंपनियों के लिए लंबे समय का ग्रोथ अवसर बन सकता है.

KSH International

KSH International स्पेशलाइज्ड वाइंडिंग वायर की प्रमुख निर्माता कंपनियों में शामिल है. इसके प्रोडक्ट्स बड़े पावर ट्रांसफॉर्मर और इलेक्ट्रिक मशीनों में इस्तेमाल होते हैं. कंपनी के लिए स्पेशलाइज्ड वाइंडिंग वायर कारोबार सबसे महत्वपूर्ण सेगमेंट है. FY26 में इस कारोबार की हिस्सेदारी कंपनी के कुल रेवेन्यू में 75.3% थी. इसी सेगमेंट में CTC कंपनी का प्रमुख प्रोडक्ट है. कंपनी का बिजनेस मॉडल कॉपर की कीमतों में उतार-चढ़ाव से होने वाले जोखिम को कम करता है.

KSH ऑर्डर मिलने के बाद उत्पादन करती है और कॉपर की लागत ग्राहकों तक पास कर दी जाती है. इससे प्रति टन EBITDA अपेक्षाकृत स्थिर रहने में मदद मिलती है. Q1FY27 में कंपनी ने शानदार प्रदर्शन किया. रेवेन्यू सालाना आधार पर 108.4% बढ़कर ₹1,164.2 करोड़ पहुंच गया. नेट प्रॉफिट 85.9% बढ़कर ₹42.2 करोड़ रहा. कंपनी का EBITDA प्रति टन भी 41.6% बढ़कर ₹93,325 हो गया.

Vidya Wires

Vidya Wires इंसुलेटेड कॉपर और एल्युमिनियम कंडक्टर बनाने वाली कंपनी है. कंपनी अब सामान्य प्रोडक्ट्स से आगे बढ़कर ज्यादा स्पेशलाइज्ड प्रोडक्ट्स पर फोकस कर रही है. CTC इसी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है. कंपनी 3,000 MTPA की डेडिकेटेड CTC कैपेसिटी स्थापित कर रही है.

Vidya Wires अपनी कुल मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी को भी करीब 19,000 MTPA से बढ़ाकर 36,000 MTPA कर रही है. Q1FY27 में कंपनी का रेवेन्यू 33.5% बढ़कर ₹549.7 करोड़ रहा. नेट प्रॉफिट 41.4% बढ़कर ₹17.1 करोड़ हो गया.

APAR Industries

APAR Industries पावर ट्रांसमिशन, डिस्ट्रीब्यूशन और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में काम करती है. इसकी कंडक्टर डिविजन में पारंपरिक कंडक्टर के साथ-साथ प्रीमियम कंडक्टर भी शामिल हैं, जिनमें CTC प्रमुख प्रोडक्ट्स में से एक है. Q1FY27 में कंपनी के कंडक्टर कारोबार में प्रीमियम प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी बढ़कर 50.3% हो गई, जो Q1FY26 में 43.7% थी.

प्रीमियम प्रोडक्ट्स की बढ़ती हिस्सेदारी का असर कंपनी की कमाई पर भी दिखाई दिया. EBITDA प्रति टन 22.3% बढ़कर ₹53,418 हो गया. Q1FY27 में APAR Industries का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 29.1% बढ़कर ₹6,591 करोड़ हो गया. नेट प्रॉफिट 77.7% बढ़कर ₹467 करोड़ रहा.

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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.