Sensex-Nifty Outlook; 697 दिन से ऑल टाइम हाई से दूर सेंसेक्स; क्या FII की वापसी से बदलेगा रुख

शेयर मार्केट लंबे समय से दबाव में है और सेंसेक्स को नया ऑल टाइम हाई बनाए 697 दिन हो चुके हैं. 2026 में 62.3 फीसदी कारोबारी दिनों में एक साल का रिटर्न निगेटिव रहा. महंगे कच्चे तेल, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितता ने बाजार पर दबाव बढ़ाया. हालांकि जुलाई और अगस्त में FII की खरीदारी से राहत के संकेत मिले हैं.

सेंसेक्स को नया ऑल टाइम हाई बनाए 697 दिन हो चुके हैं. Image Credit: Money9 Live

Highlights

  • Sensex को नया ऑल टाइम हाई बनाए 697 दिन हो चुके हैं.
  • 2026 में 62.3 फीसदी कारोबारी दिनों में सेंसेक्स का एक साल का रिटर्न निगेटिव रहा.
  • महंगे कच्चे तेल और वैश्विक अनिश्चितता से भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बना हुआ है.

शेयर मार्केट लंबे समय से दबाव में कारोबार कर रहा है. सेंसेक्स को अपने नए ऑल टाइम हाई का स्तर छुए 697 दिन हो चुके हैं. 2026 में सेंसेक्स के 62.3 फीसदी कारोबारी दिनों में एक साल का रिटर्न निगेटिव रहा. दो साल के रिटर्न के मामले में भी बाजार पर दबाव बना हुआ है. महंगे वैल्यूएशन, महंगे कच्चे तेल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार की चिंता बढ़ाई है. हालांकि अब FII की खरीदारी में वापसी के संकेत दिख रहे हैं.

सेंसेक्स का 697 दिन का रिकॉर्ड

सेंसेक्स लगातार 697 दिनों से नया ऑल टाइम हाई नहीं बना पाया है. यह भारतीय शेयर मार्केट में कमजोरी के लंबे दौर को दिखाता है. 2026 में अब तक 37 फीसदी कारोबारी दिनों में सेंसेक्स का दो साल का रिटर्न निगेटिव रहा. यह आंकड़ा 2012 के बाद सबसे ज्यादा है. एक साल के रिटर्न के मामले में स्थिति और कमजोर रही है. इस साल 62.3 फीसदी कारोबारी दिनों में एक साल का रिटर्न निगेटिव रहा.

एशिया का सबसे कम पसंदीदा बाजार

Bank of America के फंड मैनेजर सर्वे में भारत को एशिया का सबसे कम पसंदीदा शेयर मार्केट बताया गया है. यह दूसरी बार है जब इस साल भारत को इस कैटेगरी में रखा गया है. इससे विदेशी निवेशकों की चिंता का अंदाजा लगाया जा सकता है. मई में भी भारत को सबसे कम पसंदीदा बाजार बताया गया था. उस समय अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बाजार पर दबाव बना रही थी.

ईरान युद्ध और महंगे तेल की चिंता

भारत कच्चे तेल के सबसे बडे़ आयातकों में शामिल है. ऐसे में तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है. ईरान युद्ध के कारण फरवरी से कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी हलचल देखने को मिली. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल सप्लाई को लेकर भी चिंता बनी हुई है. बाजार में ब्रेंड क्रूड के 92 से 95 डॉलर प्रति बैरल तक जाने की संभावना जताई जा रही है. तनाव बढ़ने पर कीमत 100 डॉलर के पार भी जा सकती है.

FII की बिकवाली में अब कमी के संकेत

सितंबर 2024 के बाजार शिखर के बाद विदेशी निवेशक लगातार भारतीय शेयरों में बिकवाली कर रहे थे. इस दौरान कुल FII आउटफ्लो करीब 60 अरब डॉलर रहा. 2026 में भी करीब 30 अरब डॉलर की निकासी हुई. हालांकि मार्च से जून तक लगातार चार महीने बिकवाली के बाद जुलाई में FII ने खरीदारी की. जुलाई में विदेशी निवेशकों ने करीब 2.5 अरब डॉलर भारतीय बाजार में लगाए. अगस्त में भी उन्होंने 13123 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे.

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FII अब चुनिंदा शेयरों पर लगा रहे दांव

विदेशी निवेशकों की वापसी पूरे बाजार में एक जैसी नहीं है. वे अब चुनिंदा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेश कर रहे हैं. ऐसे शेयरों पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है जहां ग्रोथ, कमाई और लिक्विडिटी बेहतर दिखाई दे रही है. Motilal Oswal के अनुसार कमाई में सुधार और ग्रोथ का दायरा बढ़ने से भारतीय बाजार का रिस्क रिवॉर्ड बेहतर हो सकता है. घरेलू निवेशकों की लगातार खरीदारी भी बाजार को सहारा दे रही है.