TCS से HDFC तक, निफ्टी के इन 6 दिग्गजों ने कराया नुकसान, 5 साल में हुआ 37% का घाटा; आखिर क्यों

पिछले 5 साल में TCS, Infosys, HUL, HDFC Life, Asian Paints और HDFC Bank जैसे Nifty के दिग्गज शेयरों ने निवेशकों को नेगेटिव रिटर्न दिया है. इससे साफ है कि सिर्फ बड़ी और मजबूत कंपनी होना अच्छे रिटर्न की गारंटी नहीं है.

लॉस

Highlights

  • TCS, Infosys जैसे Nifty के दिग्गज शेयरों ने निवेशकों को नेगेटिव रिटर्न दिया है.
  • सिर्फ बड़ी और मजबूत कंपनी होना अच्छे रिटर्न की गारंटी नहीं है.
  • निवेशकों को कंपनी की ग्रोथ, कमाई और वैल्यूएशन पर नजर रखनी चाहिए.

लार्जकैप शेयरों को आमतौर पर लंबे समय के निवेश के लिए सुरक्षित माना जाता है. बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान निवेशक भी इन कंपनियों पर ज्यादा भरोसा करते हैं. लेकिन हर बड़ा और मजबूत शेयर निवेशकों को अच्छा रिटर्न दे, ऐसा जरूरी नहीं है. पिछले 5 साल में Nifty की 6 दिग्गज कंपनियों के शेयरों ने निवेशकों को नेगेटिव रिटर्न दिया है.

Trendlyne के आंकड़ों के मुताबिक, इस लिस्ट में Tata Consultancy Services यानी TCS, Infosys, Hindustan Unilever यानी HUL, HDFC Life Insurance, Asian Paints और HDFC Bank शामिल हैं. ये सभी अपने-अपने सेक्टर की बड़ी कंपनियां हैं, लेकिन पिछले 5 साल में इनके शेयर अलग-अलग कारणों से दबाव में रहे.

5 साल में इन शेयरों ने दिया नेगेटिव रिटर्न

कंपनी5 साल का रिटर्न
Tata Consultancy Services37.01%
Infosys-34.76%
Hindustan Unilever-23%
HDFC Life Insurance Company-18.36%
Asian Paints-13%
HDFC Bank-6%
Source- Trendlyne

TCS और Infosys को सबसे ज्यादा नुकसान

TCS इस लिस्ट में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला शेयर रहा है. पिछले 5 साल में कंपनी के शेयर में 37.01% की गिरावट आई है. वहीं Infosys का शेयर भी इस दौरान 34.76% टूट गया है. दोनों IT कंपनियों पर पुराने IT सर्विसेज बिजनेस मॉडल के दबाव का असर पड़ा है. दुनियाभर की कंपनियों ने टेक्नोलॉजी पर अपने खर्च में सावधानी बरती और कई ग्राहकों ने बड़े प्रोजेक्ट टाल दिए. दूसरी तरफ, AI के बढ़ते इस्तेमाल ने IT कंपनियों के पुराने प्राइसिंग मॉडल और लंबे समय की ग्रोथ को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं.

इसके अलावा Infosys पर कमजोर गाइडेंस का भी दबाव रहा है. कंपनी ने FY27 के लिए कॉन्स्टेंट करेंसी रेवेन्यू ग्रोथ गाइडेंस 1.5 फीसदी से 3.5 फीसदी के बीच रखी थी. कमजोर डिमांड, AI से प्राइसिंग पर दबाव और कुछ ग्राहकों से जुड़े मुद्दों ने शेयर को दबाव में रखा.

HUL में भी नहीं दिखी पुरानी चमक

Hindustan Unilever के शेयर में पिछले 5 साल में 23% की गिरावट आई है. कंपनी को कमजोर ग्रामीण मांग, महंगाई और बढ़ते कॉम्पिटिशन का सामना करना पड़ा है. कंपनी की बिक्री में सुधार के बावजूद निवेशक मार्जिन को लेकर चिंतित रहे. कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी और कॉस्ट प्रेशर के कारण कंपनी के लिए अपनी पुरानी मजबूत ग्रोथ को बनाए रखना मुश्किल हुआ.

HDFC Life में ग्रोथ और मार्जिन की चिंता

HDFC Life Insurance के शेयर ने 5 साल में 18.36% का नेगेटिव रिटर्न दिया है. कंपनी के बिजनेस में ग्रोथ की रफ्तार और प्रॉफिटेबिलिटी को लेकर निवेशकों की चिंता बनी रही. जून तिमाही में कंपनी का वैल्यू ऑफ न्यू बिजनेस यानी VNB 9% बढ़ा और एनुअल प्रीमियम इक्विवेलेंट यानी APE में भी 9% की बढ़ोतरी हुई. हालांकि, बैंक चैनल में कमजोर प्रदर्शन के कारण इंडिविजुअल APE दबाव में रहा. VNB मार्जिन भी सालाना आधार पर 10 बेसिस पॉइंट घटकर 25% रह गया.

Asian Paints पर बढ़ते कॉम्पिटिशन का असर

Asian Paints के शेयर में पिछले 5 साल में 13% की गिरावट आई है. डेकोरेटिव पेंट्स की कमजोर मांग, कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और Birla Opus के आने के बाद बढ़े कॉम्पिटिशन ने कंपनी पर दबाव डाला. कंपनी को कमजोर मांग के बीच बाजार हिस्सेदारी बचाने के लिए कड़ी कंपटीशन का सामना करना पड़ा. इसके अलावा कच्चे माल की महंगाई और रुपये की कमजोरी ने भी मार्जिन पर असर डाला.

HDFC Bank में मर्जर के बाद बढ़ा दबाव

इन 6 शेयरों में HDFC Bank ने सबसे कम नेगेटिव रिटर्न दिया है, लेकिन पिछले 5 साल में शेयर करीब 6.47% नीचे है. बैंक के कमजोर प्रदर्शन की एक बड़ी वजह HDFC Ltd के साथ हुआ मर्जर रहा. मर्जर के बाद बैंक की बैलेंस शीट काफी बड़ी हुई, लेकिन इसके साथ जमा आधार को लेकर दबाव बढ़ा. ज्यादा महंगे डिपॉजिट और उधारी पर निर्भरता बढ़ने से नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर असर पड़ा.

इन सभी शेयरों में क्या है एक जैसी बात?

इन 6 कंपनियों की सबसे बड़ी समानता यह है कि निवेशकों ने लंबे समय तक इन कंपनियों की स्थिरता और मजबूत बिजनेस को देखते हुए इनके शेयरों को ऊंचे वैल्यूएशन पर खरीदा. लेकिन जब ग्रोथ धीमी हुई, कॉम्पिटिशन बढ़ा या मार्जिन पर दबाव आया तो शेयरों में गिरावट शुरू हो गई.

क्या लार्जकैप शेयर अब भी सुरक्षित हैं?

इन 6 कंपनियों के कमजोर प्रदर्शन के बावजूद आमतौर पर लार्जकैप शेयरों को छोटे और मिडकैप शेयरों की तुलना में सुरक्षित माना जाता है. बड़ी कंपनियों की बैलेंस शीट मजबूत होती है, मैनेजमेंट का अनुभव ज्यादा होता है और बाजार में लिक्विडिटी भी बेहतर रहती है.

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बाजार अब सिर्फ ऊंचे वैल्यूएशन के भरोसे चलने के बजाय कंपनियों की कमाई और ग्रोथ पर ज्यादा ध्यान दे रहा है. ऐसे में निवेशकों के लिए सिर्फ कंपनी का बड़ा नाम देखना काफी नहीं है. निवेश से पहले उसकी कमाई, ग्रोथ, कॉम्पिटिशन और वैल्यूएशन को समझना जरूरी है.

डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.