‘हर पायलट का डोप टेस्ट होना जरूरी’, DGCA बना रहा 100 फीसदी टेस्टिंग प्लान
अभी नियम यह है कि कुल पायलट नेटवर्क में से 10 फीसदी का ड्रग टेस्ट किया जाए, लेकिन जैसा कि मैंने कहा, DGCA संबंधित पक्षों के साथ बातचीत कर रहा है. मंत्री ने कहा कि इसलिए, हमें यह देखना होगा कि सभी संबंधित पक्ष इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं.
Highlights
- फिलहाल, पायलटों के ड्रग टेस्ट रैंडम आधार पर किए जाते हैं.
- एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली फ्लाइट में गड़बड़ी.
- साल भर में कभी भी रैंडम समय पर इससे (ड्रग टेस्ट से) गुजरना होगा.
नागरिक उड्डयन मंत्रालय सभी कमर्शियल पायलटों के लिए साल भर रैंडम आधार पर साइकोएक्टिव पदार्थ (नशीले पदार्थों) के टेस्ट करने की संभावना पर विचार कर रहा है. नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने मंगलवार को कहा कि नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) पायलटों के ड्रग-टेस्टिंग मानकों को और मजबूत करने के लिए संबंधित पक्षों (स्टेकहोल्डर्स) के साथ बातचीत कर रहा है.
10 फीसदी का ड्रग टेस्ट
अभी नियम यह है कि कुल पायलट नेटवर्क में से 10 फीसदी का ड्रग टेस्ट किया जाए, लेकिन जैसा कि मैंने कहा, DGCA संबंधित पक्षों के साथ बातचीत कर रहा है. हमारी तरफ से एक राय यह है कि सभी को साल भर में कभी भी रैंडम समय पर इससे (ड्रग टेस्ट से) गुजरना होगा. मंत्री ने कहा कि इसलिए, हमें यह देखना होगा कि सभी संबंधित पक्ष इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं.
पायलटों के ड्रग टेस्ट
फुकेत-दिल्ली उड़ान के दौरान अचानक ऊंचाई कम होने की घटना में शामिल एयर इंडिया के एक कैप्टन के मारिजुआना (गांजा) टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने के बाद पायलटों द्वारा नशीले पदार्थों के संभावित इस्तेमाल का मुद्दा चर्चा में आया है.
फिलहाल, पायलटों के ड्रग टेस्ट रैंडम आधार पर किए जाते हैं. नायडू ने मंगलवार को कहा कि रेगुलेटर DGCA मौजूदा नियमों की समीक्षा करने और भविष्य के लिए सख्त नीति बनाने के लिए संबंधित पक्षों से सलाह-मशविरा कर रहा है. इस डोप टेस्ट (मामले) से निपटने के कई तरीके हैं.
अनिवार्य साइकोएक्टिव पदार्थ टेस्टिंग
वे राष्ट्रीय राजधानी में एक कार्यक्रम के दौरान पायलटों के लिए साइकोएक्टिव पदार्थ टेस्टिंग से जुड़े सवालों का जवाब दे रहे थे. इस बीच एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने भी अपने सभी पायलटों की अनिवार्य साइकोएक्टिव पदार्थ टेस्टिंग शुरू कर दी है.
एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली फ्लाइट में गड़बड़ी
यह घटना 4 अगस्त को हुई, जब एयर इंडिया की फ्लाइट AI2379 (एयरबस A320neo) फुकेट से दिल्ली जा रही थी और क्रूजिंग के दौरान अचानक लगभग 300 फीट नीचे आ गई. बाद में विमान स्थिर हो गया और दिल्ली में सुरक्षित उतर गया, लेकिन ऊंचाई में अचानक आए इस बदलाव से यात्री और क्रू सदस्य घायल हो गए. रिपोर्ट्स के अनुसार, कुल 24 लोग घायल हुए – जिनमें 20 यात्री और चार क्रू सदस्य शामिल थे.
पायलट पर हुई कार्रवाई
दोनों पायलटों की फ्लाइट के बाद होने वाली जरूरी साइकोएक्टिव पदार्थ (नशीले पदार्थ) की जांच की गई. पायलट-इन-कमांड की शुरुआती जांच में कन्फर्मेटरी टेस्ट की जरूरत बताई गई, जिसके बाद उनका सैंपल एक तय लैब में भेजा गया. बाद में हुए कन्फर्मेटरी टेस्ट में मारिजुआना (गांजा) की पुष्टि हुई. DGCA ने जांच और जरूरी प्रक्रियाओं के पूरा होने तक दोनों पायलटों को ड्यूटी रोस्टर से हटा दिया.
इस घटना ने इस बात पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या मौजूदा सिस्टम – जिसमें हर साल पायलटों के एक हिस्से की रैंडम जांच की जाती है – नशीले पदार्थों के इस्तेमाल का पता लगाने और यह पक्का करने के लिए काफी है कि फ्लाइट क्रू विमान उड़ाने के लिए फिट हैं.
Latest Stories
दिल्ली हाई कोर्ट से ITC को राहत, FSSAI को आदेश… ‘100% आटा’ मामले में लाइसेंस पर न करें कोई कार्रवाई
Coal Gasification पर बड़ा निवेश करने को तैयार कंपनियां, लेकिन सरकार से चाहिए गारंटी, जानें पूरा मामला
Gold Price Today: सोने की चमक पड़ी फीकी, 10 ग्राम गोल्ड 1.63 लाख रुपये पर; चांदी भी लुढ़की
