मिडिल ईस्ट टेंशन से सहमा बाजार! अगले हफ्ते बाजार की दिशा तय करेंगे ये 5 बड़े फैक्टर, जानें पूरी डिटेल

भारतीय शेयर बाजार लगातार पांचवें हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुआ. सेंसेक्स और निफ्टी में 2 फीसदी से ज्यादा कमजोरी रही. बाजार पर मिडिल ईस्ट तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, रुपये में गिरावट और FIIs की बिकवाली का दबाव है. इस हफ्ते US-ईरान संबंध, तेल कीमतें और वैश्विक संकेत बाजार की दिशा तय करेंगे.

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पिछले हफ्ते बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला. लगातार पांचवें हफ्ते गिरावट का सिलसिला जारी रहा, जिसकी मुख्य वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ता जियो-पॉलिटिकल टेंशन रहा. शुक्रवार, 27 मार्च को दोनों प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी में 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. ब्रॉडर मार्केट में भी दबाव देखने को मिला, जहां BSE मिडकैप इंडेक्स 2.18 फीसदी और स्मॉलकैप इंडेक्स 1.82 फीसदी फिसल गया. इन सब के बीच अगले कारोबारी हफ्ते 5 ऐसे बड़े फैक्टर हैं जो बाजार की दिशा तय कर सकते हैं.

अमेरिका-ईरान सीजफायर बातचीत

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी भी बना हुआ है और जल्द किसी समझौते के संकेत नहीं दिख रहे हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत के लिए 6 अप्रैल तक की समयसीमा बढ़ाई है. वहीं, ईरान ने अमेरिका के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जो वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा संभालता है, फिलहाल बंद जैसी स्थिति में है, जिससे बाजार की चिंता बढ़ी हुई है.

कच्चे तेल की कीमतें

कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है. ब्रेंट क्रूड 112 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बंद हुआ है, और यह इस पूरे संकट के दौरान 55 प्रतिशत से ज्यादा उछल चुका है. ऊंची तेल कीमतों से महंगाई और भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ता है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार पर पड़ता है.

रुपये में कमजोरी

भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 94 के स्तर के पार फिसल गया है, जो बाजार के लिए चिंता का विषय है. तेल की बढ़ती कीमतें, विदेशी पूंजी का बाहर जाना और वैश्विक जोखिम से बचने की प्रवृत्ति रुपये पर दबाव बना रही है. अगर यह कमजोरी जारी रहती है, तो बाजार में और अस्थिरता देखी जा सकती है.

सोना-चांदी की चाल

सोना और चांदी की कीमतों में शुक्रवार को 3 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी देखी गई. निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर इनकी ओर रुख कर रहे हैं. हालांकि, हाल की गिरावट के बाद अब इनकी कीमतें फिर से संतुलन बनाने की कोशिश कर रही हैं.

विदेशी निवेशकों की बिकवाली (FII Outflows)

मार्च में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने करीब 1.13 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की है. है.इस साल अब तक कुल आउटफ्लो 1.27 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो बाजार के लिए बड़ा नेगेटिव संकेत है. ग्लोबल अनिश्चितता के चलते विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से दूरी बना रहे हैं.

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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.