सोमवार को कैसी रहेगी बाजार की चाल? कच्चे तेल की कीमत, US Fed समेत इन 4 फैक्टर्स से होगा तय
भारतीय शेयर बाजार सोमवार को कच्चे तेल की कीमत, बढ़ती बॉन्ड यील्ड, अमेरिकी फेड की संभावित दर बढ़ोतरी और विदेशी निवेशकों की खरीदारी से प्रभावित हो सकता है. निफ्टी के लिए 23,750-23,700 अहम सपोर्ट है. इसके नीचे 23,500 और 23,300 तक गिरावट का जोखिम है, जबकि 24150-24200 के ऊपर जाने पर कमजोरी कम हो सकती है.

Stock Market Monday: भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार को बढ़त के साथ बंद हुआ, लेकिन क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के बाद सेंसेक्स और निफ्टी ने दिन की ज्यादातर बढ़त गंवा दी और इंट्राडे लो के करीब बंद हुए. सेंसेक्स 363 अंक चढ़कर 76,515 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 करीब 24 अंक की बढ़त के साथ 23,898 से नीचे बंद हुआ. ब्रॉडर मार्केट में मिला-जुला कारोबार रहा. ऐसे में अब सोमवार को बाजार की दिशा तय करने में कच्चे तेल की कीमत, बॉन्ड यील्ड, अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर उम्मीद और FII-DII गतिविधि अहम भूमिका निभाएगी.
1. कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी नजर
इस हफ्ते कच्चे तेल की कीमतों में करीब 8 फीसदी की तेजी आई है. अमेरिका और ईरान के बीच एक महीने बाद फिर हमले होने से सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के तेल परिवहन के लिए बंद रहने से बाजार में सप्लाई संकट की आशंका बनी हुई है. Citi ने तीसरी तिमाही के लिए Brent क्रूड का औसत कीमत अनुमान 80 डॉलर से बढ़ाकर 86 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है. वहीं ANZ के विश्लेषकों ने भी अपने शॉर्ट टर्म Brent अनुमान को बढ़ाकर 95 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है. उनका मानना है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है.
भारत जैसे कच्चे तेल के बड़े आयातक देश के लिए तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई और अर्थव्यवस्था दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं. इसलिए सोमवार को क्रूड की चाल बाजार के लिए बड़ा संकेत होगी.
2. बढ़ती Bond Yield भी बाजार की चिंता बढ़ा रही
दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बॉन्ड यील्ड इस हफ्ते कई साल के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है. तेल से बढ़ती महंगाई, सख्त मौद्रिक नीति और बिगड़ती वित्तीय स्थिति ने बॉन्ड बाजार पर दबाव बढ़ाया है. कच्चे तेल की कीमतों और ईंधन लागत में बढ़ोतरी से वैश्विक स्तर पर महंगाई और सरकारों की उधारी लागत बढ़ी है. इससे आर्थिक विकास की रफ्तार कमजोर होने की चिंता भी बढ़ी है.
बॉन्ड यील्ड बढ़ने का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है. अमेरिका की फिक्स्ड इनकम वाली परिसंपत्तियां ज्यादा रिटर्न देने लगती हैं तो विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय शेयरों की तुलना में अमेरिकी बॉन्ड ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं. इससे वैश्विक पूंजी का कुछ हिस्सा भारतीय इक्विटी से बाहर जा सकता है.
3. US Jobs Data से Fed की Rate Hike की उम्मीद बढ़ी
अमेरिका के उम्मीद से बेहतर रोजगार आंकड़ों ने सितंबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना को फिर चर्चा में ला दिया है. अगस्त में अमेरिकी कंपनियों ने 1,62,000 नई नौकरियां जोड़ीं, जो अर्थशास्त्रियों के अनुमान से करीब तीन गुना थीं. अमेरिका में लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट बढ़कर 61.6% हो गया, जबकि बेरोजगारी दर 4.1% पर बनी रही. मजबूत रोजगार आंकड़ों से अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सामने सितंबर की 15-16 तारीख को होने वाली बैठक में ब्याज दर बढ़ाने का विकल्प मजबूत हुआ है.
इसका असर दुनियाभर के बाजारों पर पड़ सकता है. अगर अमेरिकी ब्याज दरें बढ़ती हैं तो डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड की मांग बढ़ सकती है, जिसका असर उभरते बाजारों और विदेशी निवेशकों के प्रवाह पर पड़ सकता है.
4. FII की वापसी से बाजार को मिल रहा सहारा
विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार में फिर से खरीदारी करते नजर आ रहे हैं. अगस्त में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI का निवेश 3.2 अरब डॉलर से ज्यादा रहा. सितंबर के शुरुआती चार कारोबारी दिनों में भी विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में ₹2,374 करोड़ का निवेश किया है. भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती भी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है. Q1 FY27 में भारत की GDP ग्रोथ 7.8% रही थी. इसके अलावा पहली तिमाही के बेहतर-से-उम्मीद कमाई के आंकड़े और रुपये में स्थिरता भी विदेशी निवेश को बनाए रखने में मदद कर सकते हैं.
Nifty के लिए 23,700 अहम सपोर्ट
टेक्निकल तस्वीर फिलहाल निफ्टी में मजबूत रिकवरी का संकेत नहीं दे रही है. निफ्टी अपने शॉर्ट और लॉन्ग टर्म मूविंग एवरेज से नीचे कारोबार कर रहा है. 20, 50 और 100 दिन के EMA भी नीचे की ओर बढ़ रहे हैं, जो बाजार में बढ़ते मंदी के दबाव का संकेत है. डेली RSI करीब 40 के आसपास है और अपने 9 दिन के औसत से नीचे बना हुआ है. वहीं डेली ADX 20 से ऊपर पहुंच गया है और बढ़ रहा है. इसका मतलब है कि मौजूदा ट्रेंड को मजबूती मिल रही है.
निफ्टी के लिए 23,750-23,700 का स्तर अहम सपोर्ट जोन है. पिछले 23,070 से 24,774 के उछाल के 61.8% Fibonacci Retracement का स्तर भी इसी क्षेत्र के आसपास है. अगर निफ्टी 23,700 के नीचे टिकता है तो करेक्शन बढ़कर 23,500 और उसके बाद 23,300 तक जा सकता है.
वहीं ऊपर की तरफ 24,150-24,200 का स्तर बड़ी चुनौती रहेगा. यह जोन 50 और 100 दिन के EMA के आसपास है. निफ्टी अगर इस स्तर के ऊपर मजबूती से टिकता है तो मौजूदा मंदी का रुख कमजोर पड़ सकता है और इंडेक्स में स्थिरता लौट सकती है.
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डिस्क्लेमर: Money9live कभी भी किसी शेयर, आईपीओ और म्यूचुअल फंड में निवेश की सलाह नहीं देता है. ये खबर केवल आपकी जानकारी के लिए है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.