SAIL vs Tata Steel vs JSW Steel: किस स्टील कंपनी ने कमाई में मारी बाजी; कौन सा शेयर है सबसे सस्ता
जून 2026 तिमाही में SAIL ने मुनाफे की ग्रोथ में Tata Steel और JSW Steel को पीछे छोड़ दिया. SAIL का नेट प्रॉफिट 138.8 फीसदी बढ़ा, जबकि JSW Steel का 112.6 फीसदी और Tata Steel का 18.8 फीसदी रहा. वैल्यूएशन के मामले में भी SAIL सबसे सस्ता है और इसका PE 16.4 है. हालांकि Return on Equity में Tata Steel 11.7 फीसदी के साथ आगे है. ऐसे में प्रॉफिट ग्रोथ, वैल्यूएशन और दक्षता के लिहाज से तीनों स्टील कंपनियों की तस्वीर अलग है.

जून 2026 तिमाही में देश की प्रमुख स्टील कंपनियों के नतीजे सामने आए हैं. SAIL, Tata Steel और JSW Steel तीनों को मजबूत घरेलू स्टील मांग का फायदा मिला है. हालांकि मुनाफे की ग्रोथ के मामले में SAIL ने दोनों दिग्गज कंपनियों को पीछे छोड़ दिया. SAIL का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 138.8 फीसदी बढ़ा. वहीं JSW Steel का मुनाफा 112.6 फीसदी और Tata Steel का 18.8 फीसदी बढ़ा. इसके बावजूद वैल्यूएशन के मामले में SAIL अपने बड़े प्रतिद्वंद्वियों से काफी सस्ता है.
मुनाफे की रेस में SAIL सबसे आगे
Q1 FY27 में SAIL का नेट प्रॉफिट 138.8 फीसदी बढ़कर 1,636 करोड़ रुपये हो गया. कंपनी की स्टील बिक्री 4.5 मिलियन टन रही, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह 4.7 मिलियन टन थी. इसके बावजूद स्टील की कीमतों में सुधार से कंपनी को फायदा मिला. SAIL का स्टील रियलाइजेशन करीब 5.7 फीसदी बढ़कर 58,323 रुपये प्रति टन हो गया. लागत पर कंट्रोल से कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन भी 500 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 15.8 फीसदी पहुंच गया.
JSW Steel का मुनाफा भी दोगुने से ज्यादा बढ़ा
JSW Steel ने जून 2026 तिमाही में 4,696 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया. सालाना आधार पर इसमें 112.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. कंपनी की स्टील बिक्री 4 फीसदी बढ़कर 6.25 मिलियन टन हो गई, जो किसी वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी की अब तक की सबसे ज्यादा बिक्री रही. स्टील रियलाइजेशन करीब 5.9 फीसदी बढ़कर 75,782 रुपये प्रति टन रहा. इससे कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन 220 बेसिस प्वाइंट सुधरकर 19.8 फीसदी हो गया.
Tata Steel की कमाई में भी अच्छी ग्रोथ
Tata Steel का प्रदर्शन SAIL और JSW Steel से अलग रहा. कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट करीब 18.8 फीसदी बढ़कर 2,385.2 करोड़ रुपये रहा. कंपनी की कंसोलिडेटेड बिक्री 14.3 फीसदी बढ़कर 60,794.3 करोड़ रुपये हो गई. भारतीय कारोबार में मजबूत प्रदर्शन ने कंपनी के कुल नतीजों को सपोर्ट दिया. भारत में Tata Steel की डिलीवरी 5.17 मिलियन टन रही, जो पिछले साल के 4.75 मिलियन टन से ज्यादा है. हालांकि यूरोप में कंपनी के कारोबार पर कमजोर मांग और अन्य चुनौतियों का असर रहा.
कौन सा शेयर सबसे सस्ता
वैल्यूएशन की बात करें तो SAIL तीनों कंपनियों में सबसे सस्ता दिखाई देता है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, SAIL का PE करीब 16.4 है. इसके मुकाबले Tata Steel का कंसोलिडेटेड PE करीब 20 और JSW Steel का PE करीब 27.1 है. यानी PE के आधार पर SAIL, Tata Steel और JSW Steel से कम वैल्यूएशन पर कारोबार कर रहा है. यही वजह है कि मजबूत प्रॉफिट ग्रोथ के बावजूद SAIL को बाजार की ओर से उतना वैल्यूएशन प्रीमियम नहीं मिल रहा है.
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रिटर्न ऑन इक्विटी में Tata Steel आगे
सिर्फ PE देखना किसी कंपनी की पूरी तस्वीर नहीं बताता. Return on Equity यानी RoE के मामले में Tata Steel इन तीनों में आगे है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, Tata Steel का कंसोलिडेटेड RoE 11.7 फीसदी है. JSW Steel का RoE 10.2 फीसदी और SAIL का स्टैंडअलोन RoE 6.48 फीसदी है. इसका मतलब है कि SAIL की कम वैल्यूएशन के पीछे सिर्फ शेयर मार्केट की सेंटिमेंट ही नहीं, बल्कि कैपिटल के इस्तेमाल की दक्षता जैसे दूसरे संकेतक भी महत्वपूर्ण हैं.
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