US ने चीन पर कसा शिकंजा! ट्रंप के एक फैसले से पावर स्टॉक में हरियाली; CG Power समेत इन शेयरों में 4% तक उछाल
यूएस में चाइनीज पावर इक्विपमेंट पर संभावित प्रतिबंध की खबर से भारतीय पावर इक्विपमेंट कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली. सीजी पावर के शेयर में 4 फीसदी तक उछाल आया, जबकि जीई वर्नोवा, हिताची एनर्जी इंडिया और ट्रांसफॉर्मर्स एंड रेक्टिफायर्स इंडिया के शेयर भी बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए.
Highlights
- यूएस में चाइनीज पावर इक्विपमेंट पर संभावित सख्ती की खबर से सीजी पावर के शेयर में 4 फीसदी तक तेजी आई.
- हिताची एनर्जी इंडिया और ट्रांसफॉर्मर्स एंड रेक्टिफायर्स (इंडिया) के शेयरों में भी 2 से 3 फीसदी तक की बढ़त देखने को मिली.
- चाइनीज सप्लायर्स पर प्रतिबंध बढ़ने से भारतीय पावर इक्विपमेंट कंपनियों के लिए यूएस मार्केट में नए बिजनेस अवसर बनने की उम्मीद है.
Power Stocks: भारतीय पावर इक्विपमेंट कंपनियों के शेयरों में गुरुवार को जोरदार खरीदारी देखने को मिली. सीजी पावर, जीई वर्नोवा, हिताची एनर्जी इंडिया और ट्रांसफॉर्मर्स एंड रेक्टिफायर्स (इंडिया) के शेयरों में 4 फीसदी तक की तेजी आई. शेयरों में यह उछाल यूएस में चाइनीज पावर इक्विपमेंट के इस्तेमाल पर संभावित प्रतिबंध से जुड़ी खबर के बाद देखने को मिला है.
सीजी पावर के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी
गुरुवार के कारोबार में सीजी पावर इस सेक्टर की कंपनियों में सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज करने वाला शेयर रहा. कंपनी के शेयर में शुरुआती कारोबार के दौरान करीब 4 फीसदी तक तेजी आई. इसके बाद जीई वर्नोवा के शेयर में करीब 3 फीसदी की बढ़त देखने को मिली.
ट्रांसफॉर्मर्स एंड रेक्टिफायर्स (इंडिया) के शेयर में 2.71 फीसदी और हिताची एनर्जी इंडिया के शेयर में 2.13 फीसदी तक की तेजी दर्ज की गई. सीजी पावर के शेयर में कारोबार के दौरान 898.75 रुपये का डे हाई और 870.20 रुपये का डे लो दर्ज किया गया. सुबह करीब 10:36 बजे शेयर 886 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था.
यूएस ने उठाया बड़ा कदम
डोनाल्ड ट्रंप की ओर से हस्ताक्षर एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में यूएस इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड में इस्तेमाल होने वाले कुछ फॉरेन-मेड बल्क-पावर सिस्टम्स को लेकर नेशनल सिक्योरिटी रिस्क का मुद्दा उठाया गया है. व्हाइट हाउस के मुताबिक, कुछ फॉरेन-मेड इक्विपमेंट से यूएस के पावर इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा को खतरा हो सकता है. इसी वजह से ऐसे इक्विपमेंट के इस्तेमाल को लेकर नए रिस्ट्रिक्शंस लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है.
हालांकि, यह किसी भी फॉरेन-मेड पावर इक्विपमेंट पर ब्लैंकेट बैन नहीं है. रिस्ट्रिक्शंस किन कंपनियों और इक्विपमेंट पर लागू होंगे, इसका फैसला यूएस डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी की ओर से किया जाएगा. डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी कवर्ड फॉरेन एंटिटीज और नेशनल सिक्योरिटी रिस्क से जुड़े मामलों का आकलन करेगा. इसके अलावा डिपार्टमेंट कुछ प्री-क्वालिफाइड इक्विपमेंट और वेंडर्स की लिस्ट भी तैयार कर सकता है.
चाइनीज कंपनियों पर बढ़ सकता है दबाव
यूएस का यह कदम चीन से जुड़े पावर इक्विपमेंट को लेकर वॉशिंगटन की बढ़ती चिंता को दिखाता है. अमेरिकी प्रशासन पहले भी चाइनीज टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रोडक्ट्स पर सिक्योरिटी रिस्क को लेकर कदम उठाता रहा है. एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में फॉरेन-मेड बल्क-पावर सिस्टम्स को संभावित नेशनल सिक्योरिटी वल्नरेबिलिटी से जोड़ते हुए रिस्ट्रिक्शंस की बात कही गई है.
ऐसे में अगर चाइनीज पावर इक्विपमेंट पर बड़े स्तर पर रोक लगती है, तो इसका सीधा फायदा दूसरे देशों की कंपनियों को मिल सकता है. यही वजह है कि भारतीय पावर इक्विपमेंट कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ी है. इन्वेस्टर्स को उम्मीद है कि यूएस मार्केट में चाइनीज सप्लायर्स की हिस्सेदारी कम होने पर इंडियन मैन्युफैक्चरर्स और अन्य नॉन-चाइनीज सप्लायर्स के लिए नए ऑर्डर्स और बिजनेस अपॉर्च्युनिटीज बन सकते हैं.
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