SEBI ने 11 रिसर्च एनालिस्ट का रजिस्ट्रेशन किया रद्द, रिन्यूअल फीस नहीं भरने पर हुई कार्रवाई; जानें डिटेल
SEBI ने रिन्यूअल फीस जमा नहीं करने पर 11 रिसर्च एनालिस्ट का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है. SEBI के अनुसार इन संस्थाओं ने कई नोटिस मिलने के बाद भी कोई जवाब नहीं दिया. नियमों के तहत हर पांच साल में रजिस्ट्रेशन का रिन्यूएबल कराना जरूरी होता है.

कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI ने 11 रिसर्च एनालिस्ट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. SEBI ने इन सभी का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है. यह फैसला तय समय पर रिन्यूअल फीस जमा नहीं करने के कारण लिया गया. SEBI के अनुसार इन संस्थाओं को कई बार नोटिस भेजे गए थे, लेकिन किसी ने भी जवाब नहीं दिया. इसके बाद इंटरमीडियरीज नियम 2008 के तहत उनका रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया गया. SEBI ने कहा कि यह कदम समाप्त हो चुके रजिस्ट्रेशन के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए उठाया गया है.
किन कंपनियों पर हुई कार्रवाई
SEBI ने जिन 11 रिसर्च एनालिस्ट का रजिस्ट्रेशन रद्द किया है उनमें 24 कैरेट फाइनेंशियल सर्विसेज, बंसल फिनस्टॉक, सागर शाह, मनोज अशोक कुमार, अमर कुमार श्रीवास्तव, यश उतमानी और लक्ष्मीश्री इनवेस्टमेंट एंड सिक्योरिटीज समेत अन्य नाम शामिल हैं. इन सभी ने तय समय पर रिन्यूअल फीस जमा नहीं की थी. इसके कारण उनका रजिस्ट्रेशन समाप्त कर दिया गया.
हर पांच साल में भरनी होती है फीस
SEBI के नियमों के अनुसार हर रजिस्टर रिसर्च एनालिस्ट को हर पांच साल में रिन्यूअल फीस जमा करनी होती है. फीस जमा होने के बाद ही रजिस्ट्रेशन वैध माना जाता है. संबंधित संस्थाओं ने मार्च 2020 से अक्टूबर 2025 के बीच देय फीस जमा नहीं की. इसी वजह से उनके खिलाफ कार्रवाई की गई.
कई बार भेजा गया था नोटिस
SEBI ने फरवरी 2025 और उसके बाद मई तथा जून 2026 में इन संस्थाओं को नोटिस जारी किए थे. नोटिस में पूछा गया था कि उनका रजिस्ट्रेशन क्यों न रद्द किया जाए या निलंबित किया जाए. हालांकि तय समय के भीतर किसी भी संस्था ने जवाब नहीं दिया. इसके बाद नियामक ने अंतिम फैसला सुनाया.
रजिस्ट्रेशन रद्द होने के बाद भी जिम्मेदारी रहेगी
SEBI ने अपने आदेश में साफ किया है कि रजिस्ट्रेशन रद्द होने के बावजूद इन संस्थाओं की पहले की एक्टिविटी से जुड़ी जिम्मेदारी खत्म नहीं होगी. रिसर्च एनालिस्ट के रूप में किए गए किसी भी काम या चूक के लिए वे जवाबदेह बने रहेंगे. यानी कार्रवाई केवल रजिस्ट्रेशन तक सीमित नहीं रहेगी.
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गलत इस्तेमाल रोकना है मकसद
SEBI का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य समाप्त हो चुके रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के गलत इस्तेमाल को रोकना है. रेगुलेटर समय-समय पर ऐसे मामलों की समीक्षा करता है ताकि निवेशकों के हितों की रक्षा की जा सके. SEBI ने संकेत दिया है कि नियमों का पालन नहीं करने वाले अन्य मामलों में भी इसी तरह की कार्रवाई की जा सकती है.