सेंसेक्स में हेरफेर के आरोप में फंसी JPMorgan की यूनिट को मिली बड़ी राहत, SEBI ने हटाया मार्केट बैन

SEBI ने Sensex के Closing Auction Session में कथित हेरफेर के मामले में Copthall Mauritius Investment और Mansi Share and Stock Broking पर लगा व्यापक मार्केट बैन हटा दिया है. दोनों संस्थाओं ने कथित गलत तरीके से हासिल लाभ की रकम जमा कराई है.

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भारतीय बाजार नियामक SEBI ने सेंसेक्स में कथित हेरफेर के मामले में JPMorgan की यूनिट Copthall Mauritius Investment Ltd और Mansi Share and Stock Broking को राहत दी है. दोनों संस्थाओं ने SEBI की ओर से जब्त की गई रकम जमा कर दी, जिसके बाद उन पर लगा व्यापक सिक्योरिटीज मार्केट एक्सेस प्रतिबंध हट गया है. हालांकि, दोनों अभी भी Closing Auction Session यानी CAS में सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से हिस्सा नहीं ले सकेंगी.

Copthall ने ₹2.96 करोड़, Mansi ने ₹71.65 लाख जमा किए

अब तक की जानकारी के मुताबिक, दोनों संस्थाओं ने 20 अगस्त को SEBI की ओर से जब्त की गई रकम जमा की थी. इसके एक दिन पहले यानी 19 अगस्त को बाजार नियामक ने अपने एक्स-पार्टी अंतरिम आदेश में दोनों पर कार्रवाई की थी. JPMorgan की यूनिट Copthall Mauritius Investment Ltd ने 2.96 करोड़ रुपये, जबकि Mansi Share and Stock Broking ने 71.65 लाख रुपये जमा किए. SEBI के मुताबिक, ये रकम कथित तौर पर हासिल किए गए गलत लाभ के बराबर थी.

रकम जमा होने के बाद दोनों पर लगा व्यापक बाजार एक्सेस प्रतिबंध खत्म हो गया है. हालांकि, CAS में भाग लेने पर लगी अलग रोक अभी जारी है.

13 अगस्त को Sensex में अचानक आए थे 3 बड़े उछाल

SEBI की जांच 13 अगस्त को Closing Auction Session के दौरान सेंसेक्स में हुई ट्रेडिंग गतिविधियों से जुड़ी है. यह Sensex डेरिवेटिव्स की साप्ताहिक एक्सपायरी का दिन भी था. नियामक ने उस दिन ऑक्शन के दौरान Sensex के इंडिकेटिव इक्विलिब्रियम प्राइस में तीन तेज मूवमेंट दर्ज किए. पहले मामले में इंडेक्स सिर्फ 2 सेकंड में 362.02 अंक उछला. इसके बाद 132.67 अंक और 405.08 अंक के दो और तेज उछाल देखे गए.

Copthall की आक्रामक खरीदारी, Mansi के बड़े सेल ऑर्डर

SEBI की शुरुआती जांच के मुताबिक, Copthall ने Sensex के अलग-अलग शेयरों में आक्रामक खरीदारी के ऑर्डर लगाए थे. वहीं, Mansi ने बड़ी मात्रा में बिक्री के ऑर्डर लगाए, जिन्हें बाद में कैंसिल कर दिया गया.

पहले दो बड़े उछाल के दौरान खरीद ऑर्डर की लगभग पूरी रकम Copthall की थी. दूसरी तरफ, Mansi ने बिक्री के लिए रखे 12.77 लाख शेयरों में से 12.65 लाख शेयरों के ऑर्डर कैंसिल कर दिए. SEBI ने Copthall के लिए कथित गलत लाभ 2.96 करोड़ रुपये और Mansi के लिए 71.65 लाख रुपये आंका.

दोनों ने मिलकर किया था हेरफेर? SEBI को नहीं मिले शुरुआती सबूत

इस मामले में एक अहम बात यह है कि SEBI के मुताबिक उपलब्ध सबूतों से शुरुआती तौर पर यह संकेत नहीं मिला कि दोनों संस्थाओं ने मिलकर काम किया था. नियामक की शुरुआती जांच में दोनों के ट्रेड अलग-अलग दिखाई दिए. SEBI के मुताबिक, दोनों ने अपने-अपने डेरिवेटिव्स पोजिशन के लिए Sensex को अपने पक्ष में प्रभावित करने की कोशिश की हो सकती है.

CAS में रोक अभी क्यों जारी है?

व्यापक बाजार एक्सेस से रोक हटने के बावजूद CAS में हिस्सा लेने पर प्रतिबंध जारी है. SEBI ने यह रोक अलग से लगाई थी. नियामक के मुताबिक, उस समय दोनों संस्थाओं के पास अगले हफ्ते की एक्सपायरी वाले Sensex ऑप्शंस की बकाया पोजिशन थी. ऐसे में अगर उन्हें CAS में ट्रेडिंग जारी रखने की अनुमति मिलती, तो जिस गतिविधि की जांच चल रही थी उसके दोबारा होने का जोखिम बना रह सकता था.

3:15 बजे के बाद CAS में होती है प्रक्रिया

Closing Auction Session का मौजूदा ढांचा 3 अगस्त से लागू हुआ था. इसके तहत संबंधित कैश मार्केट शेयरों में सामान्य ट्रेडिंग 3:15 बजे खत्म होती है. इसके बाद रेफरेंस प्राइस पीरियड और ऑक्शन की प्रक्रिया होती है. इस प्रक्रिया से तय होने वाली क्लोजिंग प्राइस डेरिवेटिव्स के सेटलमेंट के लिए महत्वपूर्ण होती है. 13 अगस्त का मामला इसलिए भी अहम था क्योंकि उस दिन कैश मार्केट ऑक्शन से तय होने वाली कीमत का सीधा असर उसी दिन एक्सपायर होने वाले Sensex ऑप्शंस के सेटलमेंट पर पड़ सकता था. फिलहाल SEBI की कार्रवाई अंतरिम है और कथित हेरफेर को लेकर नियामक की जांच जारी है.

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