टाटा मोटर्स से जुड़ी इस कंपनी ने मचाया धमाल, रेवेन्यू 41% बढ़ा; रखें नजर
Automobile Corporation of Goa यानी ACGL ने FY26 में मजबूत कारोबारी प्रदर्शन दर्ज किया है. Tata Motors से जुड़ी इस कंपनी का रेवेन्यू 41% बढ़कर 934 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि बस बिक्री 9,328 यूनिट के रिकॉर्ड स्तर पर रही. कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी करीब 1,200 बस प्रति माह है.

Automobile Corporation of Goa: भारत में EV यानी इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट के बढ़ते बाजार के बीच एक ऐसी कंपनी भी तेजी से चर्चा में आई है, जो सीधे तौर पर इलेक्ट्रिक कार या बैटरी नहीं बनाती. यह कंपनी बस बॉडी बनाने के कारोबार में है और Tata Motors से मजबूत कारोबारी जुड़ाव रखती है. कंपनी ने FY26 में शानदार कारोबारी प्रदर्शन दर्ज किया है. रेवेन्यू में 41% की बढ़ोतरी हुई, जबकि बस बिक्री भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई.
यह कंपनी Automobile Corporation of Goa Ltd यानी ACGL है. कंपनी Tata Motors के लिए बस बॉडी बनाने का काम करती है. FY26 में ACGL ने 9,328 बसें बेचीं, जो कंपनी की अब तक की सबसे ज्यादा बिक्री है. इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू FY25 के करीब 661 करोड़ रुपये से बढ़कर FY26 में 934 करोड़ रुपये हो गया. यानी एक साल में रेवेन्यू में करीब 41% की वृद्धि दर्ज की गई.
2024 में पहली बार आई थी बाजार की नजर
ACGL इससे पहले भी बाजार में चर्चा में आ चुकी है. जुलाई 2024 में कंपनी ने मजबूत तिमाही नतीजे पेश किए थे. उस दौरान रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस सालाना आधार पर 34.7% बढ़कर 203.3 करोड़ रुपये हो गया था. EBITDA में 72% और नेट प्रॉफिट में 77% की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी.
उस तिमाही में EBITDA मार्जिन भी 9.57% से बढ़कर 12.44% हो गया था. मजबूत नतीजों के बाद कंपनी के शेयर में तेजी देखने को मिली थी. इसके पीछे मुख्य वजह सिर्फ एक अच्छी तिमाही नहीं थी, बल्कि बाजार को कंपनी में ऑपरेटिंग लीवरेज की संभावना नजर आने लगी थी.
बस बिक्री बढ़ने के साथ रेवेन्यू में भी तेज उछाल
ACGL के आंकड़ों पर नजर डालें तो FY24 में कंपनी ने 6,511 बसें बेची थीं. FY25 में यह आंकड़ा बढ़कर 7,265 और FY26 में 9,328 हो गया. इसी अवधि में कंपनी का रेवेन्यू 584 करोड़ रुपये से बढ़कर 661 करोड़ रुपये और फिर FY26 में 934 करोड़ रुपये पहुंच गया. ऑपरेटिंग प्रॉफिट भी FY24 के 43 करोड़ रुपये से बढ़कर FY26 में 86 करोड़ रुपये हो गया. वहीं, प्रॉफिट आफ्टर टैक्स FY26 में करीब 70 करोड़ रुपये रहा.
कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन भी FY24 के करीब 7% से बढ़कर FY25 में 8% और FY26 में करीब 9% हो गया. मैनेजमेंट के मुताबिक FY26 की ग्रोथ में ज्यादा प्रोडक्शन वॉल्यूम, बेहतर एफिशिएंसी और प्रोडक्ट मिक्स में बदलाव की भूमिका रही. इसमें हायर-टनाज और इंस्टीट्यूशनल बसों की हिस्सेदारी भी शामिल रही.
1,200 बस प्रति माह की मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी
ACGL ने अपनी इंस्टॉल्ड मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी बढ़ाकर करीब 1,200 बस प्रति माह कर ली है. FY26 में कंपनी की कैपेसिटी यूटिलाइजेशन में भी सुधार हुआ. कंपनी हायर-टनाज व्हीकल्स और इमर्जिंग इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लिए अपनी इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग कैपेबिलिटीज को मजबूत कर रही है.
इसका मतलब है कि मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी के आधार पर कंपनी के पास आगे वॉल्यूम बढ़ाने की गुंजाइश है. हालांकि, वास्तविक प्रोडक्शन प्रोडक्ट मिक्स, कस्टमर शेड्यूल और मैन्युफैक्चरिंग कंस्ट्रेंट्स पर निर्भर करेगा. कंपनी हायर-टनाज बसों पर भी फोकस कर रही है. इसका उद्देश्य सिर्फ ज्यादा बसें बनाना नहीं, बल्कि ज्यादा वैल्यू वाले व्हीकल्स के जरिए प्राइस रियलाइजेशन और ऑपरेटिंग लीवरेज में सुधार करना है.
इलेक्ट्रिक बस सेगमेंट में भी तैयारी
ACGL के लिए अगला महत्वपूर्ण ग्रोथ एरिया इलेक्ट्रिक बस हो सकता है. कंपनी इलेक्ट्रिक बस बॉडीज पर काम कर रही है और 13.5 मीटर इलेक्ट्रिक स्लीपर बस का डेवलपमेंट शुरू कर चुकी है. इसके अलावा, कंपनी स्कूल, स्टाफ और EV सेगमेंट में भी अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है.
हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है. ACGL अभी प्योर EV कंपनी नहीं है. इसका मौजूदा कारोबार बस बॉडी मैन्युफैक्चरिंग है और EV सेगमेंट कंपनी के लिए एक अतिरिक्त ग्रोथ अपॉर्च्युनिटी है. इलेक्ट्रिक बस का असली असर तभी दिखाई देगा, जब कंपनी को बड़े स्तर पर EV ऑर्डर्स, प्रोडक्शन और रेवेन्यू मिलना शुरू होगा.
Tata Motors पर बड़ी निर्भरता
कंपनी की सबसे बड़ी ताकतों में से एक Tata Motors के साथ उसका कारोबार है, लेकिन यही एक बड़ा रिस्क भी है. FY26 में Tata Motors से ACGL को करीब 817.8 करोड़ रुपये का रेवेन्यू मिला, जो कंपनी के कुल 933.7 करोड़ रुपये के रेवेन्यू का लगभग 88% है.
इस तरह Tata Motors के साथ मजबूत कारोबारी संबंध कंपनी को स्थिरता दे सकते हैं, लेकिन एक ही ग्राहक पर इतनी ज्यादा निर्भरता कस्टमर कॉन्सन्ट्रेशन रिस्क भी पैदा करती है. अगर Tata Motors की ओर से ऑर्डर्स, प्रोडक्ट मिक्स या प्रोडक्शन शेड्यूल में बड़ा बदलाव होता है, तो उसका असर ACGL के कारोबार पर पड़ सकता है.
बैलेंस शीट में भी सुधार
FY26 में कंपनी की बॉरोइंग्स में भी बड़ी गिरावट आई. बॉरोइंग्स करीब 85-86 करोड़ रुपये से घटकर 9 करोड़ रुपये से भी कम रह गई. डेट-इक्विटी रेशियो भी 0.34 से घटकर 0.03 हो गया. इसके साथ ही इन्वेंटरी टर्नओवर 12.56 गुना से बढ़कर 15.04 गुना और ट्रेड रिसीवेबल्स टर्नओवर 6.26 गुना से बढ़कर 9.44 गुना हो गया. कंपनी का ROCE भी 18.52% से बढ़कर 30.84% पहुंच गया.
Q1 FY27 में मार्जिन पर दबाव
हालांकि, FY26 के मजबूत प्रदर्शन के बाद Q1 FY27 के आंकड़ों ने कुछ सवाल भी खड़े किए हैं. Q1 FY27 में सेल्स करीब 249 करोड़ रुपये रही, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 256 करोड़ रुपये थी. इस दौरान ऑपरेटिंग प्रॉफिट करीब 13 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही के करीब 28 करोड़ रुपये से काफी कम है. ऑपरेटिंग मार्जिन भी करीब 11% से घटकर 5% रह गया. नेट प्रॉफिट भी करीब 23 करोड़ रुपये से घटकर 11 करोड़ रुपये रहा.
एक्सपोर्ट और कॉम्पिटिशन भी अहम
ACGL ने FY26 में 3,382 बसें विदेशों में बेचीं. हालांकि, एक्सपोर्ट बिजनेस के साथ जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, फ्रेट कॉस्ट्स और कमोडिटी प्राइसेज जैसे जोखिम भी जुड़े हुए हैं. इसके अलावा, इलेक्ट्रिक बस सेगमेंट में मल्टीनेशनल कंपनियों और विदेशी कंपनियों के साथ पार्टनरशिप बढ़ने से कॉम्पिटिशन भी बढ़ सकता है. ऐसे में आने वाले समय में ACGL के लिए सिर्फ बस वॉल्यूम बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा. कंपनी को हायर-वैल्यू प्रोडक्ट्स, बेहतर मार्जिन, EV ऑर्डर्स और कस्टमर बेस में डायवर्सिफिकेशन पर भी काम करना होगा.
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