Demerger के बाद Vedanta Share पर अब क्या है Anil Agarwal की बड़ी Planning
सोने के दाम चढ़ते हैं या फिर रुपया कमजोर पड़ता है तो असर सिर्फ देश की इकॉनमी पर नहीं बल्कि आपकी SIP, शेयर और आपकी जेब पर भी पड़ता है. जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है तो उसका असर रुपए इनफ्लेशन और शेयर बाजार पर दिखता है. अगर भारत आयात कम करता है और इंपोर्ट कम करता है तो डॉलर की बचत हो सकती है. रुपया मजबूत हो सकता है और ट्रेड डेफिसिट कम हो सकता है. ऑयल मार्केटिंग, माइनिंग और मेटल कंपनियों को फायदा मिल सकता है. लंबी अवधि में भारतीय बाजार को मजबूती भी मिल सकती है.
अनिल अग्रवाल ने कहा है कि भारत संसाधनों की कमी वाला देश नहीं है. भारत में संसाधनों की रिसोर्सेज की कमी नहीं है बल्कि हमारे पास जमीन के नीचे तेल, गैस और कई मिनरल्स का बड़ा भंडार है. उनका कहना है कि भारत के टोटल इंपोर्ट में ऑयल और सोने की जो हिस्सेदारी है वह 30% से ज्यादा है. अगर भारत को एक दिन तेल और सोना बाहर से खरीदना ही ना पड़े तो क्या होगा?
