35000 KM रेंज और कई न्यूक्लियर बम, पुतिन की सरमत मिसाइल से दुनिया हैरान; जानें कैसे बनी सबसे विध्वंसक
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने RS-28 Sarmat मिसाइल के सफल परीक्षण को दुनिया की सबसे ताकतवर मिसाइल सिस्टम बताया है. रूस का दावा है कि यह मिसाइल 35,000 किलोमीटर तक हमला करने में सक्षम है और इसमें कई न्यूक्लियर वॉरहेड लगाए जा सकते हैं. MIRV टेक्नोलॉजी, हाई स्पीड और मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भेदने की क्षमता इसे बेहद खतरनाक बनाती है.

Sarmat Missile: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दुनिया की सबसे ताकतवर मिसाइल सिस्टम बताए जा रहे RS-28 Sarmat के सफल परीक्षण की सराहना की है. पुतिन ने इसे रूस की रणनीतिक ताकत का अहम हिस्सा बताया और कहा कि यह ऐसी मिसाइल है, जो मौजूदा और भविष्य के लगभग हर मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भेद सकती है. रूस का दावा है कि यह मिसाइल 35,000 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक हमला करने में सक्षम है और इसमें कई न्यूक्लियर वॉरहेड लगाए जा सकते हैं.
दुनिया की सबसे ताकतवर मिसाइल सिस्टम का दावा
रूस के स्ट्रैटेजिक मिसाइल फोर्सेज कमांडर सर्गेई कराकायेव की रिपोर्ट मिलने के बाद पुतिन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस मिसाइल टेस्ट को बड़ी सफलता बताया. पुतिन के अनुसार, सरमत मिसाइल सोवियत दौर की वोयेवोडा मिसाइल सिस्टम से भी ज्यादा आधुनिक और ताकतवर है. उन्होंने दावा किया कि इसकी पेलोड क्षमता पश्चिमी देशों की मौजूदा मिसाइलों की तुलना में चार गुना तक ज्यादा हो सकती है.
रूस का कहना है कि यह मिसाइल केवल बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी पर ही नहीं, बल्कि सब-ऑर्बिटल रास्ते से भी हमला कर सकती है. यही वजह है कि इसकी ऑपरेशनल रेंज 35,000 किलोमीटर तक बताई जा रही है. इतनी लंबी दूरी इसे दुनिया की सबसे खतरनाक इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों में शामिल करती है.
कई न्यूक्लियर वॉरहेड ले जाने में सक्षम
सरमत मिसाइल की सबसे बड़ी ताकत इसकी MIRV टेक्नोलॉजी मानी जा रही है. इसका मतलब है कि एक ही मिसाइल कई अलग-अलग न्यूक्लियर वॉरहेड लेकर उड़ान भर सकती है और अलग-अलग लक्ष्यों पर हमला कर सकती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसमें 10 से ज्यादा बड़े न्यूक्लियर वॉरहेड या कई छोटे वॉरहेड लगाए जा सकते हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक के कारण दुश्मन देशों के लिए इसे रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है. यदि एक मिसाइल से कई शहरों या सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जाए, तो डिफेंस सिस्टम पर दबाव कई गुना बढ़ जाता है.
मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भी दे सकती है चकमा
पुतिन ने दावा किया है कि सरमत मिसाइल मौजूदा और भविष्य में विकसित होने वाले लगभग सभी मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भेदने में सक्षम है. इसकी वजह इसकी हाई स्पीड, दिशा बदलने की क्षमता और एडवांस फ्लाइट सिस्टम हैं. रूस ने हाल के वर्षों में अवांगार्ड हाइपरसोनिक सिस्टम, किंझाल मिसाइल और पोसाइडन अंडरवॉटर सिस्टम जैसे कई एडवांस हथियार भी विकसित किए हैं, जिनका मकसद रणनीतिक बढ़त हासिल करना है.
विशेषज्ञों के अनुसार, सरमत मिसाइल हाइपरसोनिक स्पीड के करीब पहुंच सकती है, जिससे दुश्मन देशों के पास प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय बचता है. यही वजह है कि अमेरिका और नाटो देशों की नजर इस मिसाइल प्रोग्राम पर लगातार बनी हुई है.
अमेरिका से तनाव के बाद तेज हुआ विकास
पुतिन ने कहा कि 2002 में अमेरिका के एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल ट्रीटी से बाहर निकलने के बाद रूस को अपनी रणनीतिक सुरक्षा व्यवस्था पर दोबारा काम करना पड़ा. इसके बाद रूस ने ऐसे हथियार विकसित करने शुरू किए, जिनका दुनिया में कोई मुकाबला नहीं हो.
सरमत मिसाइल प्रोग्राम को पहली बार 2018 में सार्वजनिक किया गया था. अब रूस का दावा है कि इसे इसी साल के अंत तक कॉम्बैट ड्यूटी पर तैनात कर दिया जाएगा. ऐसे में आने वाले समय में यह मिसाइल वैश्विक सैन्य संतुलन और न्यूक्लियर रणनीति पर बड़ा असर डाल सकती है.
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