ईरान के साथ समझौते की उम्मीद, ट्रंप ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ पर लगाई रोक, $108 के पास क्रूड ऑयल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ समझौते की दिशा में बड़ी बढ़त का दावा करते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में चल रहे “प्रोजेक्ट फ्रीडम” को फिलहाल रोक दिया है. यह फैसला ऐसे समय आया है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव, जहाजों पर हमलों और वैश्विक तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी हुई है.
खाड़ी देशों में जारी तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिल रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए चलाए जा रहे सैन्य मिशन ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को फिलहाल स्थगित करने का ऐलान किया है. ट्रंप का दावा है कि ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने की दिशा में एक “अंतिम समझौते” को लेकर बड़ी बढ़त मिली है, जिसके चलते यह फैसला लिया गया.
ट्रुथ सोशल पर ट्रंप का बड़ा एलान
मंगलवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने इस बदलाव की जानकारी दी. उन्होंने लिखा कि पाकिस्तान और अन्य मित्र देशों के अनुरोध पर, और ईरान के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत में हो रही ‘शानदार प्रगति’ को देखते हुए, सैन्य मिशन को कुछ समय के लिए रोका जा रहा है. ट्रंप ने स्पष्ट किया कि हालांकि ईरान की आर्थिक घेराबंदी (ब्लॉकेड) पूरी तरह लागू रहेगी, लेकिन जहाजों को एस्कॉर्ट करने वाले ऑपरेशन ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को रोक दिया गया है ताकि यह देखा जा सके कि समझौता फाइनल हो पाता है या नहीं.

तेल के दाम 100 डॉलर पार
ट्रंप के इस कदम और ईरान के साथ समझौते की सुगबुगाहट का असर ग्लोबल ऑयल मार्केट पर भी साफ दिख रहा है. कच्चs तेल (Crude Oil) की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है, जहां ब्रेंट क्रूड $107.9 और WTI क्रूड $100.5 के स्तर पर आ गया है. सप्लाई चेन बहाल होने की उम्मीद ने निवेशकों को राहत दी है, जिससे कीमतों में करीब 1.7% की कमी आई है.

क्या है ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’?
ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट बंद किए जाने के बाद वहां फंसे जहाजों और नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए सोमवार को ही यह मिशन लॉन्च किया गया था. इस समुद्री रास्ते से दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है. इस ऑपरेशन के दौरान तनाव इतना बढ़ गया था कि यूएई ने अपने जहाजों पर हमले का दावा किया, वहीं अमेरिका ने भी ईरान की कई छोटी नावों को नष्ट करने की बात कही थी. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के मुताबिक, इस मिशन का मकसद 87 देशों के लगभग 23,000 नागरिकों को सुरक्षित निकालना था, जो वहां फंसे थे.
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‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ भी हुआ समाप्त
ट्रंप की घोषणा से कुछ घंटे पहले ही विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि 28 फरवरी को शुरू हुआ ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ अब अपने टारगेट को हासिल करने के बाद बंद हो गया है. रूबियो ने साफ किया कि अमेरिका संघर्ष नहीं बल्कि शांति का रास्ता चाहता है. उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप एक डील चाहते हैं. हमारा रुख रक्षात्मक है, यानी जब तक हम पर हमला नहीं होगा, हम गोली नहीं चलाएंगे.”
फिलहाल दुनिया की नजरें इस संभावित समझौते पर टिकी हैं. अगर यह समझौता सफल होता है, तो न केवल वैश्विक तेल बाजार को राहत मिलेगी, बल्कि पश्चिम एशिया में एक बड़े युद्ध का खतरा भी टल सकता है.
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