ईरान में 2 रोटी की कीमत 1 लाख रियाल, अब तक 10 लाख बेरोजगार, दूध और फल भी जेब से बाहर

ईरान इस समय गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है, जहां महंगाई ने आम लोगों की कमर तोड़ दी है. हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया है. देश में महंगाई दर 72 फीसदी के पार पहुंच चुकी है और करेंसी तेजी से गिर रही है, जिससे जीवन यापन बेहद चुनौतीपूर्ण बन गया है.

Economic Crisis in Iran Image Credit: @AI/Money9live

Economic Crisis in Iran: ईरान इस समय गहरे आर्थिक और सामाजिक संकट से गुजर रहा है, जहां महंगाई ने आम लोगों की जिंदगी बेहद कठिन बना दी है. हालात इतने खराब हैं कि 2 रोटियों के लिए ही 1 लाख रियाल खर्च करने पड़ रहे हैं. दूसरी ओर, करीब 25 लाख लोगों की नौकरियां खतरे में हैं, जिससे बेरोजगारी तेजी से बढ़ रही है. स्वास्थ्य व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई है और लगभग 60 फीसदी मरीजों को जरूरी दवाएं नहीं मिल पा रही हैं. बढ़ती महंगाई, गिरती मुद्रा और कमजोर होती व्यवस्था ने लोगों के सामने जीवनयापन का गंभीर संकट खड़ा कर दिया है.

महंगाई दर 72% के पार

ईरान में महंगाई तेजी से बढ़कर 72 फीसदी से ऊपर पहुंच चुकी है. खाने-पीने की चीजों की कीमतों में भारी उछाल आया है. लोगों की आमदनी उतनी नहीं बढ़ी, जितनी तेजी से खर्च बढ़ गया है, जिससे आम जनता पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है. दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के बाद ईरान में खाद्य तेल सबसे ज्यादा 220 फीसदी महंगा हुए हैं. ब्रेड की कीमत 150 फीसदी तक बढ़ गई है. डेयरी और फल की कीमतों में भी 120 फीसदी का इजाफा हुआ है.

रियाल की कीमत में भारी गिरावट

ईरान की करेंसी रियाल लगातार कमजोर हो रही है. हाल ही में एक डॉलर के मुकाबले रियाल करीब 18 लाख तक पहुंच गया. इसका मतलब है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईरान की मुद्रा की कीमत बहुत कम हो गई है, जिससे आयात महंगा हो गया है और महंगाई और बढ़ रही है. साथ ही भारतीय रुपये की तुलना में 1 हजार ईरानी रियाल 2 रुपये के बराबर है.

आम जनता की जिंदगी पर असर

महंगाई का सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर पड़ रहा है. युद्ध शुरू होने के बाद लगभग 10 लाख लोगों की नौकरियां चली गई है. 15 लाख लोगों की नौकरी खतरे में है. यानी कुल 25 लाख लोगों की नौकरी या तो खतरे में है या खत्म हो गई है. साथ ही देश में बेरोजगारी दर 25 फीसदी के पार पहुंच गई है. रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है. खाने की चीजें महंगी होने से लोगों को अपनी जरूरतों में कटौती करनी पड़ रही है. सरकार राहत देने की कोशिश कर रही है, लेकिन हालात अभी भी गंभीर बने हुए हैं.

60% मरीजों को नहीं मिल रही दवाएं

सरकार पेंशन भुगतान में दिक्कत का सामना कर रही है. लाखों परिवारों की आय रुक गई है. सरकार केवल सीमित रूप से नकद सब्सिडी और फूड वाउचर ही जारी कर रही है. स्थिति इतनी खराब हो गई है कि रिपोर्ट के मुताबिक हर 5 में से केवल 2 ईरानी जनता को ही दवाएं मिल पा रही है. यानी 60 फीसदी मरीजों को दवाएं नहीं मिल रही है. इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह यह है कि अमेरिकी हमले में केमिकल प्लांट तबाह हो गए हैं और आयात भी ठप है.

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