विदेशी बैंकों में फंसा है ईरान का ₹9 लाख करोड़, चीन समेत इन देशों में फ्रीज है फंड, जानें कहां-कहां फंसा है पैसा?

ईरान के करीब 100 अरब डॉलर के विदेशी फंड दुनिया भर में फंसे हुए हैं, जो अब अमेरिका के साथ उसकी बातचीत का सबसे बड़ा मुद्दा बन गए हैं. प्रतिबंधों के चलते ईरान अपनी ही कमाई का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा. ऐसे में ये फंड न सिर्फ उसकी अर्थव्यवस्था बल्कि वैश्विक कूटनीति की दिशा भी तय कर सकते हैं.

Iran's $100-Billion Frozen Assets Image Credit: Canva/ Money9

Iran’s $100-Billion Frozen Assets: ईरान और अमेरिका के बीच चले 21 घंटे के शांति वार्ता में तेहरान ने वाशिंगटन के सामने दो मांगें रखीं. पहली, लेबनान पर हो रहे इजरायली हमलों को रोका जाए और दूसरी, ईरान के फ्रीज किए गए विदेशी फंड को जारी किया जाए. ईरान के करीब 100 अरब डॉलर (लगभग ₹9 लाख करोड़) के विदेशी फंड दुनिया के अलग-अलग देशों में फंसे हुए हैं. ये पैसा ईरान की अपनी कमाई है, लेकिन प्रतिबंधों की वजह से वह इसे इस्तेमाल नहीं कर पा रहा. अब यह मुद्दा अमेरिका के साथ संभावित बातचीत में बड़ा राजनीतिक और आर्थिक हथियार बन गया है. ऐसे में सवाल उठता है कि ईरान के पैसे कहां फंसे हैं? अमेरिका ने ईरान के फंड फ्रीज क्यों किया?

क्यों फ्रीज हुए ईरान के पैसे?

ईरान के फंड फ्रीज होने की कहानी 1979 के संकट से शुरू हुई, जब अमेरिका और ईरान के रिश्ते बिगड़े. इसके बाद ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और यूरोप ने कई सख्त प्रतिबंध लगाए. 2018 में Donald Trump ने अपने पहले कार्यकाल में परमाणु समझौता छोड़कर नए प्रतिबंध लगा दिए, जिससे ईरान का विदेशी पैसा और ज्यादा ब्लॉक हो गया.

कहां-कहां फंसा है पैसा?

ईरान का यह पैसा अलग-अलग देशों और बैंकों में जमा है, लेकिन वह इसे निकाल नहीं सकता. NDTV की रिपोर्ट के अनुसार –

  • चीन में लगभग $20 अरब
  • इराक में करीब $6 अरब
  • कतर में $6 अरब
  • जापान में $1.5 अरब
  • अमेरिका में करीब $2 अरब
  • यूरोप में $1.6 अरब

यह पैसा ज्यादातर तेल बेचकर कमाया गया था, जो अब विदेशी खातों में अटका हुआ है.

ईरान की अर्थव्यवस्था पर क्या असर?

अगर यह पैसा ईरान को मिल जाए तो उसकी अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा मिल सकता है.

  • खाने-पीने और दवाइयों के आयात में मदद
  • गिरती करेंसी (रियाल) को स्थिर करने में सहारा
  • महंगाई पर नियंत्रण
  • उद्योग और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश

सरल शब्दों में कहा जाए तो, यह पैसा ईरान के लिए ऑक्सीजन जैसा काम कर सकता है.

कतर वाले $6 अरब पर विवाद क्यों?

सबसे ज्यादा चर्चा कतर में रखे $6 अरब को लेकर है. यह पैसा पहले दक्षिण कोरिया में था, जिसे 2023 में कैदी समझौते के तहत कतर ट्रांसफर किया गया. लेकिन बाद में अमेरिका ने फिर से इस पर रोक लगा दी. ईरान का कहना है कि अमेरिका ने पैसा छोड़ने का वादा किया था, जबकि अमेरिका इससे इनकार करता है.

अभी क्यों बढ़ गया है यह मुद्दा?

ईरान अब इन फंड्स को बातचीत की शर्त बना रहा है. ईरानी संसद स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने साफ कहा है कि पहले लेबनान में सीजफायर और फ्री फंड को फ्री करने के बाद ही बातचीत संभव हो पाएगी. यानी अब यह सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि कूटनीतिक और राजनीतिक मुद्दा बन चुका है. यानी दुनियाभर के देशों में ईरान के फंसे हुए 100 अरब डॉलर अब वैश्विक राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गए हैं. अगर ये फ्री होते हैं तो ईरान की अर्थव्यवस्था को राहत मिल सकती है, लेकिन अगर नहीं, तो तनाव और बढ़ सकता है. आने वाले समय में यही तय करेगा कि बातचीत आगे बढ़ेगी या टकराव गहराएगा.