डीमर्जर के बाद Vedanta Alum. और Hindalco में टक्कर, जानें बिजनेस मॉडल से लेकर एक्सपेंशन प्लान में आगे कौन

भारत में एल्यूमिनियम की बढ़ती मांग के बीच Hindalco और Vedanta Aluminium के बीच प्रतिस्पर्धा तेज होने जा रही है. हालांकि, Vedanta Ltd के डीमर्जर के बाद यह मुकाबला निवेशकों के लिए और दिलचस्प हो सकता है. अलग लिस्टिंग के बाद Vedanta Aluminium की असली वैल्यू सामने आएगी, जिससे निवेशकों को देश की सबसे बड़ी एल्यूमिनियम उत्पादक कंपनी की तुलना सीधे Hindalco से करने का मौका मिलेगा.

Vedanta Aluminium vs Hindalco Image Credit: Canva/ Money9

Vedanta Aluminium vs Hindalco : भारत का एल्यूमिनियम उद्योग तेजी से बढ़ रहा है. इलेक्ट्रिक वाहन (EV), रिन्यूएबल एनर्जी, पावर ट्रांसमिशन, एयरोस्पेस और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बढ़ती मांग के बीच देश की दो बड़ी कंपनियां Hindalco Industries और Vedanta Aluminium अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटी हैं. लेकिन अब इस मुकाबले में एक नया मोड़ आने वाला है.

Vedanta Ltd के डीमर्जर के बाद Vedanta Aluminium एक अलग कंपनी के रूप में सामने आ सकती है. इससे पहली बार निवेशक देश की सबसे बड़ी एल्यूमिनियम उत्पादक कंपनी की तुलना सीधे Hindalco से कर पाएंगे. ऐसे में सवाल यह है कि दोनों कंपनियों में किसकी रणनीति ज्यादा मजबूत है, किसके पास ग्रोथ की बेहतर संभावना है और निवेशकों के लिए कौन-सा बिजनेस मॉडल ज्यादा आकर्षक हो सकता है.

डीमर्जर के बाद Vedanta Aluminium की असली तस्वीर

फिलहाल Vedanta Aluminium, Vedanta Ltd का हिस्सा है. Vedanta Ltd के पास जिंक, ऑयल एंड गैस, आयरन ओर समेत कई दूसरे कारोबार भी हैं. ऐसे में एल्यूमिनियम बिजनेस का सही मूल्यांकन अलग से नहीं हो पाता.

डीमर्जर के बाद Vedanta Aluminium एक स्वतंत्र कंपनी के रूप में बाजार में आएगी. इससे निवेशकों को उसके उत्पादन, मार्जिन, कैश फ्लो और विस्तार योजनाओं को सीधे समझने का मौका मिलेगा.

Vedanta Aluminium भारत की सबसे बड़ी प्राइमरी एल्यूमिनियम उत्पादक कंपनी है. अलग लिस्टिंग के बाद इसकी तुलना सीधे Hindalco से होगी. इससे यह भी साफ होगा कि बाजार बड़े पैमाने के उत्पादन को ज्यादा महत्व देता है या फिर वैल्यू-एडेड बिजनेस मॉडल को.

Hindalco का मॉडल

पिछले कुछ वर्षों में Hindalco ने खुद को सिर्फ एक एल्यूमिनियम उत्पादक कंपनी नहीं, बल्कि एक वैश्विक मेटल्स और वैल्यू-एडेड उत्पादों की कंपनी के रूप में स्थापित किया है. दिसंबर तिमाही में कंपनी का कंसॉलिडेटेड EBITDA 8,543 करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले की तुलना में 5% अधिक था.

कंपनी के भारतीय अपस्ट्रीम एल्यूमिनियम कारोबार ने अकेले 4,832 करोड़ रुपये का EBITDA दिया, जो बेहतर बिक्री और ऊंची कीमतों की वजह से 14% बढ़ा. वहीं उसकी अमेरिकी इकाई Novelis ने करीब 3,370 करोड़ रुपये का EBITDA योगदान दिया.

Novelis ही Hindalco को वैश्विक स्तर पर अलग पहचान दिलाती है. यह दुनिया की बड़ी फ्लैट-रोल्ड एल्यूमिनियम और रीसाइक्लिंग कंपनियों में शामिल है.

Hindalco वित्त वर्ष 2030 तक करीब 35,000 करोड़ रुपये निवेश करने की योजना पर काम कर रही है. इसमें ओडिशा के संबलपुर स्थित आदित्य एल्यूमिनियम कॉम्प्लेक्स में 3.6 लाख टन सालाना क्षमता बढ़ाना और बैटरी-ग्रेड एल्यूमिनियम फॉयल प्लांट लगाना शामिल है.

कंपनी की रणनीति साफ है. यदि उसका एल्यूमिनियम उत्पादन 20 लाख टन तक पहुंचता है, तो वह 15 लाख टन डाउनस्ट्रीम क्षमता भी तैयार करना चाहती है. इससे कमाई ज्यादा स्थिर रहेगी और कंपनी को बेहतर वैल्यूएशन मिल सकता है.

Vedanta Aluminium का मॉडल

अगर Hindalco की ताकत वैल्यू-एडेड बिजनेस है, तो Vedanta Aluminium की सबसे बड़ी ताकत उसका बड़े पैमाने पर उत्पादन और कम लागत है. कंपनी देश के प्राइमरी एल्यूमिनियम बाजार में करीब 50% हिस्सेदारी रखती है और लगातार अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ा रही है.

वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में Vedanta Aluminium ने 6.2 लाख टन का रिकॉर्ड उत्पादन किया, जो कंपनी का अब तक का सबसे बड़ा तिमाही उत्पादन है. वहीं एल्यूमिना उत्पादन 57% बढ़कर रिकॉर्ड 7.94 लाख टन पर पहुंच गया.

कंपनी का लगभग 27,700 करोड़ रुपये का घोषित कैपेक्स पहले ही लगाया जा चुका है और अब वह अपने निवेश चक्र के रिटर्न फेज में प्रवेश कर रही है. कंपनी को उम्मीद है कि नई क्षमता शुरू होने और वैल्यू-एडेड उत्पादों की बिक्री बढ़ने से ऑपरेटिंग लीवरेज और कैश फ्लो में सुधार होगा.

विस्तार योजनाओं में कौन आगे?

विस्तार के मामले में दोनों कंपनियां आक्रामक हैं, लेकिन दोनों का तरीका अलग है.

Hindalco जहां चरणबद्ध तरीके से क्षमता बढ़ाने और डाउनस्ट्रीम कारोबार मजबूत करने पर ध्यान दे रही है, वहीं Vedanta Aluminium बड़े पैमाने पर उत्पादन बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है.

कंपनी ओडिशा के ढेंकनाल में करीब 1.3 लाख करोड़ रुपये की लागत से एक ग्रीनफील्ड एल्यूमिनियम परियोजना विकसित कर रही है. इस परियोजना में 30 लाख टन सालाना क्षमता वाला स्मेल्टर और 4,900 मेगावाट का कैप्टिव पावर प्लांट शामिल है.

इसके अलावा Bharat Aluminium Company (BALCO) की क्षमता भी बढ़ाकर 10 लाख टन करने की योजना है.

यह परियोजना पूरी होने के बाद Vedanta Aluminium सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े एल्यूमिनियम उत्पादकों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकती है.

निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है यह मुकाबला?

पिछले छह महीनों में Hindalco के शेयरों में करीब 37% और Vedanta Ltd के शेयरों में लगभग 66% की तेजी देखने को मिली है. इससे साफ है कि निवेशक एल्यूमिनियम सेक्टर की संभावनाओं को लेकर उत्साहित हैं.

ET की एक रिपोर्ट के मुताबिक, Vedanta Aluminium के शेयर बाजार में 477 रुपये के आसपास लिस्ट हो सकते हैं. वहीं Hindalco के शेयर फिलहाल 1,126 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहे हैं.

ऐसे में डीमर्जर के बाद निवेशकों के सामने दो अलग-अलग कहानियां होंगी. Hindalco एक संतुलित, वैश्विक और वैल्यू-एडेड बिजनेस मॉडल पेश करती है. वहीं Vedanta Aluminium बड़े पैमाने पर उत्पादन, कम लागत और तेज क्षमता विस्तार की कहानी लेकर आएगी.

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Article Source – Fortune India

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