अमेरिका हटाएगा सैन्य ताकत, ईरान बहाल करेगा शिपिंग ट्रैफिक! दोनों देशों के बीच चल रही ड्राफ्ट डील पर चर्चा

पश्चिमी एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच संभावित ड्राफ्ट डील को लेकर बड़ी चर्चा शुरू हो गई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ईरान के आसपास अपनी सैन्य मौजूदगी कम कर सकता है और नेवल ब्लॉकेड हटाया जा सकता है. इसके बदले ईरान होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल शिपिंग ट्रैफिक को सामान्य करने पर सहमत हुआ है.

अमेरिका ईरान समझौता Image Credit: FreePik

Iran US Deal: पश्चिमी एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच संभावित समझौते को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. ईरानियन स्टेट मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के बीच एक ड्राफ्ट डील पर चर्चा चल रही है, जिसके तहत अमेरिका ईरान के आसपास मौजूद अपनी सैन्य ताकत को पीछे हटा सकता है और नेवल ब्लॉकेड समाप्त कर सकता है. इसके बदले तेहरान ने होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल शिपिंग ट्रैफिक को फिर से सामान्य स्तर पर बहाल करने पर सहमति जताई है. होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऑयल ट्रांजिट रूट्स में से एक है, जहां से वैश्विक क्रूड ऑयल और एलएनजी सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है.

क्या है ड्राफ्ट डील में

ईरानियन स्टेट टेलीविजन के मुताबिक, ड्राफ्ट मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी को ईरान के आसपास के क्षेत्रों से कम करने और युद्ध के दौरान लगाए गए नेवल रिस्ट्रिक्शंस हटाने का प्रस्ताव शामिल है. इसके बदले ईरान ने एक महीने के भीतर होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल ट्रांजिट को युद्ध से पहले के स्तर तक बहाल करने की बात कही है. हालांकि मिलिट्री वेसल्स को इस समझौते से बाहर रखा गया है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में शिपिंग रूट्स और ट्रैफिक मैनेजमेंट की संयुक्त निगरानी ईरान और ओमान मिलकर करेंगे.

वैश्विक बाजारों की नजर

इस संभावित समझौते पर वैश्विक बाजारों की नजरें टिकी हुई हैं. पिछले कई महीनों से गल्फ रीजन में अस्थिरता के कारण क्रूड ऑयल प्राइसेज में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. कई जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई और वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा है.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में स्थिति सामान्य होती है, तो ऑयल सप्लाई डिसरप्शंस का खतरा कम हो सकता है और क्रूड प्राइसेज में भी नरमी देखने को मिल सकती है. इसका फायदा भारत जैसे बड़े एनर्जी इम्पोर्टिंग कंट्रीज को मिल सकता है, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करते हैं.

14-पॉइंट फ्रेमवर्क पर भी चर्चा

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच एक व्यापक 14-पॉइंट अंडरस्टैंडिंग पर भी बातचीत चल रही है. इसमें सैंक्शंस रिलीफ, ईरान की फ्रोजन एसेट्स की रिहाई और ईरान को ऑयल एक्सपोर्ट्स दोबारा शुरू करने की अनुमति जैसे मुद्दे शामिल हैं.

ईरानियन स्टेट मीडिया ने दावा किया है कि यदि अगले 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौता हो जाता है, तो इसे बाइंडिंग यूएन सिक्योरिटी काउंसिल रिजोल्यूशन के रूप में मंजूरी दी जा सकती है. हालांकि ईरान ने यह भी साफ किया है कि किसी भी समझौते को अंतिम रूप देने से पहले “टैन्जिबल वेरिफिकेशन” जरूरी होगी.

अभी कई मुद्दों पर बनी हुई है असहमति

हालांकि बातचीत में प्रगति के संकेत मिले हैं, लेकिन कई अहम मुद्दों पर अब भी सहमति नहीं बन पाई है. इनमें ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम और क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य संपत्तियों की भविष्य की भूमिका जैसे विषय शामिल हैं. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इस पूरे संघर्ष के दौरान सबसे संवेदनशील केंद्र बना रहा है. संघर्ष शुरू होने के बाद वैश्विक मेरीटाइम ट्रेड पर असर पड़ा था और गल्फ रीजन में कई जहाज फंस गए थे. ऐसे में यह संभावित समझौता वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजारों के लिए राहत की बड़ी खबर माना जा रहा है.

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