मार्च तिमाही में शेयर बाजार ने तोड़ी निवेशकों की कमर, डूबे ₹12.6 लाख करोड़; 5 साल के निचले स्तर पर पहुंची रिटेल हिस्सेदारी
मार्च 2026 तिमाही में भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट के चलते रिटेल निवेशकों की करीब 12.6 लाख करोड़ रुपये की इक्विटी वेल्थ साफ हो गई. NSE Market Pulse Report के मुताबिक, पश्चिम एशिया तनाव, ईरान युद्ध, क्रूड ऑयल प्राइस में तेजी और FPI की लगातार बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ाया. इस दौरान Nifty में 10 फीसदी से ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है.
NSE Market Pulse Report: भारतीय शेयर बाजार में मार्च 2026 तिमाही के दौरान भारी उतार-चढ़ाव का असर सीधे रिटेल निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा है. NSE Market Pulse Report के मुताबिक, इस अवधि में भारतीय परिवारों की इक्विटी वेल्थ में करीब 12.6 लाख करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई. पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव, ईरान युद्ध, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशक यानी FPI की लगातार बिकवाली ने बाजार पर जबरदस्त दबाव बनाया. रिपोर्ट के अनुसार, मार्च तिमाही में Nifty में 10 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा.
यह गिरावट ऐसे समय में आई, जब वैश्विक बाजारों में भी अनिश्चितता बढ़ी हुई थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिमी एशिया क्राइसिस के कारण क्रूड ऑयल प्राइस में तेजी आई, जिसका असर दुनियाभर के इक्विटी मार्केट्स पर देखने को मिला. इसके अलावा विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाला और ताइवान तथा साउथ कोरिया जैसे AI आधारित बाजारों की तरफ रुख किया. इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा.
44 लाख करोड़ रुपये की वेल्थ फिर भी बनी
हालांकि मार्च तिमाही में बड़ा नुकसान देखने को मिला, लेकिन रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अप्रैल 2020 से अब तक भारतीय परिवारों ने इक्विटी बाजार से कुल मिलाकर करीब 44 लाख करोड़ रुपये की वेल्थ बनाई है. इसके बावजूद FY2026 में कुल 2.5 लाख करोड़ रुपये की नेट गिरावट दर्ज की गई, जिसकी सबसे बड़ी वजह चौथी तिमाही का करेक्शन रहा. मार्च 2026 तक भारतीय परिवारों की कुल इक्विटी होल्डिंग 76.5 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई. रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2020 के बाद से इसमें 29.6 फीसदी की CAGR दर्ज की गई है.
रिटेल निवेशकों की हिस्सेदारी घटी
रिपोर्ट में बताया गया है कि सीधे शेयर बाजार में निवेश करने वाले व्यक्तिगत निवेशकों की हिस्सेदारी घटकर 5 साल के निचले स्तर 9.1 फीसदी पर आ गई है. यह लगातार दूसरी तिमाही है, जब रिटेल निवेशकों की भागीदारी में गिरावट देखी गई है. FY2026 के दौरान सेकेंडरी मार्केट में व्यक्तिगत निवेशकों ने नेट सेलिंगम्य की, जो पिछले 7 वर्षों में पहली बार हुआ. Nifty 50 और Nifty 500 जैसे प्रमुख इंडेक्स में भी रिटेल निवेशकों की हिस्सेदारी कई वर्षों के निचले स्तर पर पहुंच गई.
म्यूचुअल फंड्स बने निवेशकों का सहारा
रिपोर्ट के मुताबिक, डायरेक्ट इक्विटी के मुकाबले म्यूचुअल फंड्स के जरिए निवेश करने वाले निवेशकों ने ज्यादा स्थिरता दिखाई. मार्च 2026 तक NSE में लिस्टेड कंपनियों के कुल मार्केट कैप में व्यक्तिगत निवेशकों की हिस्सेदारी डायरेक्ट होल्डिंग और म्यूचुअल फंड्स को मिलाकर 18.7 फीसदी रही, जो रिकॉर्ड हाई के करीब है.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि लगातार 6 तिमाहियों से व्यक्तिगत निवेशकों और डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशन की संयुक्त हिस्सेदारी, FPI ओनरशिप से ज्यादा बनी हुई है. यह भारतीय बाजार में एक बड़े संरचनात्मक बदलाव का संकेत माना जा रहा है.
FPI की बिकवाली बढ़ी
FY2026 के दौरान FPI ने भारतीय बाजार से करीब 19.6 बिलियन डॉलर की निकासी की. इसके चलते NSE में सूचीबद्ध कंपनियों में उनकी हिस्सेदारी घटकर 15.8 फीसदी रह गई, जो 17 साल का निचला स्तर है. इसके विपरीत डोमेस्टिक म्यूचुअल फंड्स की हिस्सेदारी बढ़कर रिकॉर्ड 11.4 फीसदी पर पहुंच गई. लगातार SIP Inflows और रिटेल निवेशकों की भागीदारी ने घरेलू संस्थागत निवेशकों को मजबूती दी.
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