शेयर बाजार में निवेशकों के 5 लाख करोड़ रुपये डूबे, जानें गिरावट की 7 बड़ी वजहें
शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली. सेंसेक्स 800 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 23,630 के नीचे फिसल गया. बाजार में लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में गिरावट रही. ईरान-अमेरिका तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, रुपये की कमजोरी और कमजोर वैश्विक संकेतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी.
Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार यानी 24 जुलाई को शुरुआती कारोबार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली. सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों में 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 800 अंकों से ज्यादा टूटकर दिन के निचले लेवल 75474 के करीब तक पहुंच गया है. वहीं, 10 बजकर 57 मिनट पर एनएसई का निफ्टी 50 करीब 239 अंक गिरकर 23,630 के लेवल तक फिसल गया है.
खास बात ये भी है कि यह गिरावट सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही. निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में भी कारोबार के दौरान 1.5 फीसदी तक की कमजोरी देखने को मिली.
निवेशकों को हुआ 5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान
शुक्रवार की बिकवाली में बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 476 लाख करोड़ रुपये से घटकर 471 लाख करोड़ रुपये रह गया. इससे निवेशकों को करीब 5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. हालांकि, सुबह के कारोबार में बाजार में आई तेज गिरावट के दौरान बीएसई पर लिस्टेड सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैप 473 लाख करोड़ रुपये तक आ गया, जिससे 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति साफ हो गई.
लगातार पांचवें दिन दबाव में बाजार
भारतीय शेयर बाजार में लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में गिरावट देखने को मिली. कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंचना, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली और दूसरे वैश्विक कारणों ने निवेशकों की धारणा को कमजोर किया. इसके अलावा सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी ऑटो, निफ्टी मेटल और निफ्टी रियल्टी समेत कई सेक्टर करीब 1 फीसदी तक टूटे हैं. ऐसे में आइए जानते हैं बाजार में इस गिरावट की कौन-कौन सी मुख्य वजह है.
बाजार में गिरावट की 7 बड़ी वजहें
1. ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ा
अमेरिकी सेना ने गुरुवार को कहा कि उसने ईरान पर लगातार 13वीं रात हमले पूरे किए हैं. वहीं, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि उन्होंने लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमला किया है और सऊदी अरब के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी लागू करने की घोषणा की है. इससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी.
2. कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर के पार
हूतियों के हमले के बाद कच्चे तेल की कीमतें मई के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गईं. इससे बाब-अल-मंदेब समुद्री मार्ग के प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई. यह जलमार्ग लाल सागर को हिंद महासागर से जोड़ता है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाद दुनिया का दूसरा सबसे अहम तेल परिवहन मार्ग माना जाता है.
गोल्डमैन सैक्स ने चेतावनी दी है कि यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बाधा बनी रहती है तो ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है. हालांकि, उसका आधारभूत अनुमान अब भी यही है कि पश्चिम एशिया में तनाव धीरे-धीरे कम होगा.
3. रुपये में कमजोरी
शुक्रवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.63 पर खुला. इससे पिछले कारोबारी सत्र में यह 96.5725 पर बंद हुआ था. रिपोर्ट के मुताबिक, रुपये को संभालने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप किया.
4. विदेशी निवेशकों की बिकवाली
एनएसई के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 2999 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेचे. जुलाई की शुरुआत में खरीदारी करने वाले विदेशी निवेशक अब जुलाई के मध्य से ज्यादातर बिकवाली कर रहे हैं. लगातार बिकवाली से घरेलू बाजार की धारणा कमजोर हुई है.
5. कमजोर वैश्विक संकेत
घरेलू बाजार के साथ-साथ एशियाई बाजारों में भी दबाव देखने को मिला. दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 6 फीसदी गिरकर 6,678 पर पहुंच गया. जापान का निक्केई 3 फीसदी टूटा. ताइवान वेटेड इंडेक्स में 2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट रही. वहीं, चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स 1 फीसदी से ज्यादा कमजोर रहे.
6. अमेरिकी फेड के ब्याज दर बढ़ाने की आशंका
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई बढ़ने की चिंता गहरा गई है. इससे बाजार को उम्मीद है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व सितंबर की मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दर बढ़ा सकता है. CME FedWatch Tool के मुताबिक, ट्रेडर्स सितंबर बैठक में ब्याज दर बढ़ने की 82 फीसदी संभावना मान रहे हैं.
7. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल
अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड में भी तेजी देखने को मिली. 10 साल की अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़कर 4.708 फीसदी और 30 साल की बॉन्ड यील्ड 5.174 फीसदी पर पहुंच गई. आमतौर पर बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर निवेशकों का रुझान इक्विटी से बॉन्ड की ओर बढ़ जाता है, जिससे शेयर बाजार पर दबाव बनता है.
ट्रंप के नए टैरिफ पर भी रहेगी नजर
ऐसे में बाजार की नजर अमेरिका की नई टैरिफ नीति पर भी रहेगी. अमेरिका ने भारत समेत 17 देशों से आयात होने वाले उन उत्पादों पर 10 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जिन्हें उसने जबरन श्रम से जुड़े नियमों का पालन नहीं करने वाला बताया है. यह फैसला अस्थायी 10 फीसदी वैश्विक टैरिफ की अवधि समाप्त होने के बाद लिया गया है. भारत के अलावा पाकिस्तान, बांग्लादेश, कंबोडिया, श्रीलंका और ब्रिटेन पर भी 10 फीसदी टैरिफ लगाया गया है.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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