ट्रंप का बड़ा ऐलान! ‘ईरान से युद्ध खत्म!’, पर होर्मुज की खाड़ी में टकराने को तैयार युद्धपोत; जानें क्या है हकीकत

डोनाल्ड ट्रंप भले ही ईरान के साथ युद्ध खत्म होने का दावा कर रहे हों, लेकिन जमीनी हालात इसके उलट हैं. अमेरिकी नौसेना ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी तेज कर दी है और खाड़ी में तनाव चरम पर है. हालांकि अच्छी खबर ये है कि दोनों देश दोबारा शांति वार्ता के लिए मेज पर एक साथ बैठने वाले हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. Image Credit: Canva/ Money9

Trump Iran war over claim: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा है कि ईरान के साथ युद्ध अब ‘अतीत’ की बात हो गई है. ट्रंप के इस बयान ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है. एक तरफ ट्रंप इसे खत्म मान रहे हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिकी नौसेना ईरान की बंदरगाहों की सख्त नाकेबंदी कर रही है. खाड़ी के पानी में तनाव चरम पर है और तेहरान की ओर से जवाबी हमले की धमकियां मिल रही हैं, जो इशारा करती हैं कि शांति अभी कोसों दूर है.

फॉक्स न्यूज के लिए पत्रकार मारिया बार्टिरोमो को दिए एक इंटरव्यू की क्लिप में ट्रंप ने बड़े आत्मविश्वास के साथ कहा कि ईरान के साथ युद्ध अब खत्म हो चुका है. जब उनसे पूछा गया कि क्या वह युद्ध के लिए ‘था’ (was) शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो क्या यह माना जाए की युद्ध खत्म हो गया है. उन्होंने दो टूक जवाब दिया- “यह खत्म हो गया है.”

समुद्र में सख्त नाकेबंदी, 6 जहाजों को वापस खदेड़ा

ट्रंप के शांति के दावे के बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने मंगलवार को पुष्टि की कि ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी पूरी तरह लागू हो चुकी है. ऑपरेशन के पहले 24 घंटों के भीतर ही अमेरिकी युद्धपोतों ने छह व्यापारिक जहाजों को रोक दिया और उन्हें वापस ईरानी बंदरगाहों की ओर लौटने पर मजबूर कर दिया. अमेरिकी सेना का दावा है कि फिलहाल कोई भी जहाज इस घेराबंदी को तोड़कर बाहर निकलने में कामयाब नहीं हुआ है.

हालांकि, समुद्र में लुका-छिपी का खेल भी जारी है. ‘रिच स्टारी’ नाम के एक तेल टैंकर ने अमेरिकी आदेश के बाद पहले तो रास्ता बदला, लेकिन बाद में चालाकी से होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को पार करने की कोशिश की. MarineTraffic के समुद्री डेटा के अनुसार, इस तरह के ‘शैडो फ्लीट’ (Shadow Fleet) जहाज अक्सर अपनी लोकेशन छिपाने या गलत जानकारी देने के लिए जाने जाते हैं ताकि अमेरिकी प्रतिबंधों से बच सकें. कई जहाजों ने तो पकड़े जाने के डर से अपने डेस्टिनेशन के नाम तक बदल लिए हैं.

दोबार सजेगी शांति वार्ता की मेज

तनाव के इस माहौल में भी बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं. पाकिस्तान दोनों देशों को एक बार फिर मेज पर लाने की कोशिश कर रहा है. राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया है कि अगले दो दिनों के भीतर ईरान के साथ दूसरे दौर की परमाणु वार्ता हो सकती है. पहले उन्होंने इसके यूरोप में होने की संभावना जताई थी, लेकिन बाद में कहा कि यह बैठक फिर से इस्लामाबाद में हो सकती है.

ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाएं इस पूरे विवाद की जड़ बनी हुई हैं. इस्लामाबाद में हुई पहले दौर की बातचीत में कोई ठोस नतीजा नहीं निकला था, जिससे गतिरोध बना हुआ है. सबसे बड़ी चिंता 22 अप्रैल को लेकर है, क्योंकि इसी दिन मौजूदा युद्धविराम की समय सीमा समाप्त हो रही है. इसके बाद क्या होगा, इसे लेकर न तो वाशिंगटन ने और न ही तेहरान ने अपने पत्ते खोले हैं.

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ईरान की कमर तोड़ने की तैयारी

सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक शिकंजा भी कस दिया है. अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने साफ कर दिया है कि समुद्र में फंसे ईरानी तेल को बेचने की जो छूट दी गई थी, उसे अब आगे नहीं बढ़ाया जाएगा. 19 अप्रैल को यह राहत खत्म हो जाएगी, जिसके बाद ईरान के तेल निर्यात पर पूरी तरह रोक लग जाएगी.

इतना ही नहीं, अमेरिका ने चीन, हांगकांग और यूएई जैसे देशों के बैंकों को भी कड़ी चेतावनी दी है. अमेरिकी ट्रेजरी का आरोप है कि ईरान ने फर्जी कंपनियों के जरिए करीब 9 अरब डॉलर का लेनदेन किया है. अब वाशिंगटन ने धमकी दी है कि जो भी विदेशी वित्तीय संस्थान ईरान की मदद करेंगे, उन पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाएंगे. कुल मिलाकर, ट्रंप प्रशासन ईरान को चारों तरफ से घेरकर उसे घुटनों पर लाने की रणनीति पर काम कर रहा है.