युद्ध ने तोड़ी ईरान की इकोनॉमी की कमर, करेंसी निचले स्तर पर, 1 डॉलर के लिए चुकाने पड़ रहे 15.6 लाख रियाल, महंगाई बेकाबू
Iran की करेंसी रियाल में भारी गिरावट आई है, जहां 1 डॉलर के लिए 15.6 लाख रियाल तक चुकाने पड़ रहे हैं और महंगाई तेजी से बढ़ रही है. युद्ध, प्रतिबंध और नाकेबंदी की आशंका से उद्योग-धंधे ठप हो रहे हैं, बेरोजगारी बढ़ रही है और सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है.
Iran Currency Riyal Fallen: पश्चिम एशिया में जारी तनाव, युद्ध जैसे हालात और कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने ईरान की अर्थव्यवस्था को गहरे संकट में डाल दिया है. देश की मुद्रा रियाल तेजी से गिर रही है, महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही है. वहीं उद्योग-धंधे ठप होते जा रहे हैं. हालात ऐसे हैं कि विशेषज्ञ इसे आर्थिक आपदा तक बता रहे हैं. हालात इस कदर बेकाबू है कि रियाल में दर्ज की गई गिरावट इतनी ज्यादा है कि 1 डॉलर के लिए ईरान को लाखों में करेंसी चुकानी पड़ रही है.
रियाल में ऐतिहासिक गिरावट
ईरान की करेंसी रियाल फ्री मार्केट में करीब 15.6 लाख से 15.8 लाख रियाल प्रति डॉलर तक गिर चुकी है. यह गिरावट आम लोगों की जेब पर भारी पड़ रहा है. महंगाई बेकाबू होती जा रही है. रोजमर्रा की चीजें महंगी हो गई है. आय के मुकाबले खर्च तेजी से बढ़ गया है. इससे मध्यम वर्ग की बचत खत्म होने लगी है. रियाल की कमजोरी से आयात महंगा हो गया है, जिससे देश में महंगाई और तेज हो रही है.
नाकेबंदी का खतरा
ईरान और अमेरिका के बीच दो हफ्ते के लिए सीजफायर पर सहमति बनी थी, लेकिन अगले ही दिन ये शंका मे पड़ गई थी. लेबनान पर इजरायल की आरे से किए गए हमले से हालात और बिगड़ गए. बात और बिगड़ी जब अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी की चेतावनी दी. यह कदम रणनीतिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि यहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल गुजरता है.
नाकेबंदी लागू होने पर नुकसान
- ईरान का व्यापार लगभग ठप हो सकता है.
- तेल निर्यात पर बड़ा असर पड़ेगा.
- वैश्विक तेल बाजार भी प्रभावित होगा.
उद्योग तबाह, सप्लाई चेन टूटी
युद्ध और हमलों की वजह से देश के कई अहम औद्योगिक केंद्र प्रभावित हुए हैं, जिनमें साउथ पार्स गैस फील्ड, पेट्रोकेमिकल प्लांट, इस्फहान और खुजेस्तान के स्टील प्लांट शामिल हैं. इनमें से कई यूनिट्स बंद हो गई हैं या आंशिक रूप से चल रही हैं. इससे हजारों मजदूर बेरोजगार हो गए हैं. सप्लाई चेन टूटने से छोटे उद्योग भी प्रभावित हुआ है.
कितनी बढ़ी महंगाई?
- देश में महंगाई तेजी से बढ़ी है और जरूरी चीजों की कीमतों में भारी उछाल आया है. जिसकी वजह से कुछ सामान 40% तक महंगे हो गए हैं.
- एक बेसिक फूड आइटम 7 लाख से 10 लाख रियाल तक पहुंच गया है.
- कैंसर की दवा 30 लाख से बढ़कर 1.8 करोड़ रियाल तक पहुंच गई है.
नौकरी का संकट
ईरान में जंग की वजह से फैक्ट्रियां बंद हो गई है. छोटे कारोबार भी ठप हो गए हैं. निर्माण और रिटेल सेक्टर में छंटनी की जा रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक एक फैक्ट्री मालिक को अपने 12 कर्मचारियों को निकालना पड़ा. ऐसे हजारों मामले सामने आ रहे हैं. ई-कॉमर्स और डिजिटल बिजनेस भी प्रभावित हुए हैं, क्योंकि संचार सेवाओं में भी रुकावट आई है. इतना ही नहीं बैंकिंग सिस्टम पर भी भारी दबाव पड़ रहा है. लोग लोन नहीं चुका पा रहे हैं. बैंकों पर NPA का दबाव बढ़ गया है. ऐसे में सरकार को बचाव पैकेज देना पड़ सकता है. अगर सरकार नोट छापती है, तो महंगाई और बढ़ सकती है.
अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर
- ईरान के खाड़ी देशों, खासकर UAE के साथ व्यापारिक रिश्ते कमजोर हो गए हैं.
- सामाजिक और राजनीतिक खतरे भी बढ़े हैं.
- आर्थिक संकट का असर सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं है. इससे देश में असंतोष बढ़ रहा है.
- विरोध प्रदर्शन की आशंका है, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है.
अर्थव्यवस्था में बड़ी गिरावट का खतरा
विशेषज्ञों के मुताबिक ईरान की GDP में 10% तक गिरावट आ सकती है. सरकारी खर्च बढ़ रहा है, लेकिन आय घट रही है. वहीं तेल से होने वाली कमाई का फायदा आम जनता तक नहीं पहुंच रहा है.
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