H 1B वीजा पर USA का नया झटका, IT की नौकरी होगी और महंगी; 30% मिनिमम सैलरी बढ़ाने की तैयारी

अमेरिका ने H 1B वीजा से जुड़े वेतन नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है. इसके तहत विदेशी कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी में औसतन 30 फीसदी तक बढ़ोतरी हो सकती है. एंट्री लेवल कर्मचारियों का वेतन 73 हजार डॉलर से बढ़कर करीब 97 हजार डॉलर पहुंच सकता है. इसका असर भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और टेक कंपनियों पर पड़ने की संभावना है.

अमेरिका ने H 1B वीजा से जुड़े वेतन नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है. Image Credit: CANVA/AI

H 1B Visa: अमेरिका ने H 1B वीजा से जुड़े वेतन नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है. अमेरिकी लेबर डिपार्टमेंट ने विदेशी कर्मचारियों के लिए न्यूनतम सैलरी में औसतन 30 फीसदी तक बढ़ोतरी का सुझाव दिया है. इसका मकसद अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन की सुरक्षा करना बताया जा रहा है. नए नियम लागू होने पर भारतीय IT प्रोफेशनल्स और टेक कंपनियों पर सीधा असर पड़ सकता है. खास बात यह है कि H 1B वीजा का सबसे ज्यादा फायदा भारतीय प्रोफेशनल्स को मिलता है. ऐसे में यह बदलाव भारतीय कंपनियों और नौकरी तलाश रहे युवाओं के लिए अहम माना जा रहा है. फिलहाल इस प्रस्ताव पर 26 मई तक जनता से सुझाव मांगे गए हैं.

क्या है अमेरिका का नया प्रस्ताव

अमेरिकी लेबर डिपार्टमेंट ने विदेशी कर्मचारियों के सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव का ड्राफ्ट जारी किया है. इसका नाम ‘Improving Wage Protections for the Temporary and Permanent Employment of Certain Foreign Nationals in the United States’ रखा गया है. इस प्रस्ताव में चार स्तर वाले सैलरी स्ट्रक्चर को संशोधित करने की बात कही गई है. सरकार का कहना है कि मौजूदा वेतन मानक करीब 20 साल पुराने हैं और अब मौजूदा बाजार के हिसाब से सही नहीं हैं.

सैलरी में बड़ा बदलाव

प्रस्ताव के मुताबिक एंट्री लेवल विदेशी कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन 73 हजार डॉलर से बढ़कर करीब 97 हजार डॉलर किया जा सकता है. यानी शुरुआती स्तर पर ही सैलरी में करीब 30 फीसदी तक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. इसके अलावा अनुभवी कर्मचारियों के वेतन स्तर में भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित है.

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प्रोफेशनल्स पर क्या होगा असर

H 1B वीजा का सबसे ज्यादा यूज भारतीय IT प्रोफेशनल्स करते हैं. भारत की कई बड़ी IT कंपनियां अपने कर्मचारियों को इसी वीजा के जरिए अमेरिका भेजती हैं. नए नियम लागू होने पर कंपनियों की लागत बढ़ सकती है. इससे छोटी कंपनियों के लिए विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करना मुश्किल हो सकता है. हालांकि हाई स्किल वाले कर्मचारियों को इसका फायदा भी मिल सकता है क्योंकि उनकी सैलरी बढ़ने की संभावना है.

किन वीजा कैटेगरी पर लागू होंगे नियम

यह प्रस्ताव केवल H 1B वीजा तक सीमित नहीं है. नए नियम H 1B1, E 3 और PERM लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम पर भी लागू हो सकते हैं. यानी विदेशी कर्मचारियों की कई कैटेगरी इस बदलाव से प्रभावित होंगी. अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इससे घरेलू कर्मचारियों के हितों की रक्षा होगी और वेतन असमानता कम होगी.

प्रस्ताव पर मिल रही मिली जुली प्रतिक्रिया

अमेरिका में इस प्रस्ताव को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है. कुछ लोग इसे अमेरिकी कर्मचारियों के हित में जरूरी कदम बता रहे हैं. वहीं कई जानकारों का कहना है कि इससे विदेशी प्रतिभाओं को नौकरी देना महंगा हो जाएगा. खासकर स्टार्टअप और छोटी कंपनियों के लिए यह चुनौती बन सकता है. आलोचकों का कहना है कि इससे टेक सेक्टर में टैलेंट की कमी भी हो सकती है.

26 मई तक मांगे गए हैं सुझाव

अमेरिकी लेबर डिपार्टमेंट ने इस प्रस्ताव पर 26 मई तक जनता से सुझाव और प्रतिक्रियाएं मांगी हैं. इसके बाद विभाग सभी सुझावों की समीक्षा करेगा और फिर अंतिम नियम जारी किए जाएंगे. अगर यह नियम लागू होते हैं तो आने वाले समय में विदेशी कर्मचारियों के लिए अमेरिका में नौकरी पाना और महंगा हो सकता है. भारतीय IT सेक्टर भी इस फैसले पर करीबी नजर बनाए हुए है.