चीन के टैरिफ खेल पर US की सख्ती, भारत समेत 40 से ज्यादा देश रडार पर; जानें क्या है शैडो ट्रेड नेटवर्क

अमेरिका ने चीन के कथित शैडो ट्रांसशिपमेंट नेटवर्क को लेकर भारत समेत 40 से ज्यादा देशों पर नजर रखी है. अमेरिकी व्यापार सलाहकार पीटर नवारो के अनुसार चीन तीसरे देशों के जरिए सामान की प्रोसेसिंग, री-लेबलिंग और रूट बदलकर अमेरिकी टैरिफ से बचने की कोशिश करता है. रिपोर्ट में इस कथित अवैध व्यापार का सालाना मूल्य 40 अरब डॉलर से 303 अरब डॉलर तक बताया गया है.

अमेरिका ने चीन के कथित Shadow Trade नेटवर्क पर सख्ती बढ़ाई. Image Credit: freepik

Highlights

  • अमेरिका ने चीन के कथित Shadow Trade नेटवर्क पर सख्ती बढ़ाई.
  • India समेत 40 से ज्यादा देश अमेरिकी निगरानी के दायरे में.
  • US का आरोप चीन तीसरे देशों के जरिए टैरिफ से बचने की कोशिश करता है.

US Tariffs: अमेरिका ने चीन के सामान पर लगाए गए भारी टैरिफ से बचने के लिए इस्तेमाल होने वाले कथित नेटवर्क को लेकर बड़ा दावा किया है. अमेरिकी व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने 40 से ज्यादा देशों पर चीन के सामान की री-रूटिंग में मदद करने का आरोप लगाया है. इस लिस्ट में भारत के साथ कनाडा, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोपीय संघ भी शामिल हैं. अमेरिका का आरोप है कि चीन कुछ देशों के जरिए अपने सामान का मूल देश बदलकर अमेरिकी बाजार तक पहुंचा रहा है. अब अमेरिका ऐसे मामलों की पहचान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करने की तैयारी में है.

भारत समेत 40 देशों पर नजर

पीटर नवारो के मुताबिक, चीन का कथित शैडो ट्रांसशिपमेंट नेटवर्क 40 से ज्यादा देशों तक फैला हुआ है. इसमें अमेरिका के कई बडे़ व्यापारिक साझेदार भी शामिल बताए गए हैं. भारत, कनाडा, मैक्सिको, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोपीय संघ का नाम इस नेटवर्क में लिया गया है.

क्या है अमेरिका का आरोप

रिपोर्ट के मुताबिक, चीन अपने सामान को तीसरे देशों के जरिए अमेरिकी बाजार तक पहुंचा सकता है. इसके लिए मामूली प्रोसेसिंग, लेबल बदलना, पैकिंग, बिलिंग या सामान का रूट बदलने जैसे तरीकों का इस्तेमाल किए जाने का आरोप है. ऐसा करने से सामान का मूल देश चीन के बजाय किसी दूसरे देश का दिखाई दे सकता है. अमेरिका का कहना है कि इससे चीन पर लगाए गए हाई टैरिफ से बचने की कोशिश की जाती है.

303 अरब डॉलर तक हो सकता है ट्रांसशिपमेंट

रिपोर्ट में कथित तौर पर इस तरह के ट्रांसशिपमेंट कारोबार की सालाना वैल्यू 40 अरब डॉलर से 303 अरब डॉलर के बीच बताई गई है. यह अनुमान इस्तेमाल की गई तरीके और ट्रांसशिपमेंट की परिभाषा के आधार पर अलग- अलग है. अमेरिका के मुताबिक, 2018 के बाद इस तरह की एक्टिविटी ज्यादा आम हुई हैं. इसी दौरान ट्रंप प्रशासन ने चीन पर Section 301 के तहत कई टैरिफ लगाए थे.

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पुणे गुजरात चेन्नई बेल्ट का भी जिक्र

पीटर नवारो की रिपोर्ट में भारत के पुणे गुजरात चेन्नई प्रोडक्शन बेल्ट का भी जिक्र किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, यहां चीन से आने वाले पंप और कंप्रेसर जैसे प्रोडक्ट को लेकर सवाल उठाए गए हैं. अमेरिका का आरोप है कि ऐसे सामान की प्रोसेसिंग या रूटिंग के बाद वे भारतीय मूल के सामान के तौर पर अमेरिकी बाजार में पहुंच सकते हैं. इससे अमेरिकी घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और औद्योगिक सप्लाई चेन पर असर पड़ने का दावा किया गया है.