IPO में एंकर इन्वेस्टर्स का बड़ा खेल! 1 साल में 51% बिकी होल्डिंग्स; SEBI ने खोला राज

SEBI की नई स्टडी में IPO के एंकर इन्वेस्टर्स की सेलिंग को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. मेनबोर्ड आईपीओ में एक साल के भीतर करीब 51 फीसदी एंकर होल्डिंग्स बिक गईं. स्टडी के मुताबिक, FPIs सबसे बड़े सेलर रहे और 365 दिनों में उन्होंने करीब 60 फीसदी एंकर होल्डिंग्स की एग्जिट की. छोटे आईपीओ में सेलिंग और ज्यादा रही.

आईपीओ Image Credit: money9live

Highlights

  • एंकर इन्वेस्टर्स ने 1 साल में अपनी करीब 51% होल्डिंग्स बेच दीं, सेलिंग में एफपीआई सबसे आगे रहे.
  • 365 दिनों में एफपीआई ने करीब 60% एंकर होल्डिंग्स की एग्जिट की, जबकि म्यूचुअल फंड्स का एग्जिट 38% रहा.
  • 250 करोड़ रुपये तक के छोटे आईपीओ में 1 साल के भीतर 72.5% एंकर होल्डिंग्स बिक गईं.

SEBI IPO Study: IPO मार्केट को लेकर SEBI की नई स्टडी में एंकर इन्वेस्टर्स की सेलिंग को लेकर अहम जानकारी सामने आई है. स्टडी के मुताबिक, मेनबोर्ड IPOs में एंकर इन्वेस्टर्स एक साल के भीतर अपनी करीब आधी होल्डिंग्स बेच रहे हैं. इस सेलिंग में फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स यानी FPIs सबसे आगे हैं. वहीं, छोटे IPOs में एंकर इन्वेस्टर्स का एग्जिट बड़े IPOs के मुकाबले काफी ज्यादा देखने को मिला है.

1 साल में 51 फीसदी होल्डिंग्स बिकी

SEBI के डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक एंड पॉलिसी एनालिसिस यानी DEPA के अधिकारियों Laltu Pore and Pampana Hari Nayak Akshay ने यह स्टडी की है. इसमें अप्रैल 2022 से अक्टूबर 2025 के बीच लिस्टेड 242 IPOs का एनालिसिस किया गया. स्टडी में अलॉटमेंट के बाद 29, 33, 60, 93, 180 और 365 दिनों के आंकड़ों को देखा गया. स्टडी के मुताबिक, एंकर इन्वेस्टर्स का एग्जिट शुरुआत में काफी कम रहा.

पहले अनलॉक के बाद एग्रीगेट एग्जिट सिर्फ 3.2 फीसदी था. 60 दिनों तक यह बढ़कर करीब 8 फीसदी और 90 दिनों के दूसरे अनलॉक के बाद 17.3 फीसदी हो गया. हालांकि, लंबे समय में सेलिंग काफी तेज हो गई. 2024 के अंत तक लिस्टेड 167 IPOs में 365 दिनों के बाद एंकर एग्जिट करीब 51 फीसदी तक पहुंच गया. यानी एक साल के भीतर एंकर इन्वेस्टर्स ने अपनी शुरुआती एलोकेशन का करीब आधा हिस्सा बेच दिया.

FPIs सबसे बड़े सेलर

एंकर एलोकेशन में FPIs की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 43.8 फीसदी रही. इसके बाद म्यूचुअल फंड्स की हिस्सेदारी 38.5 फीसदी थी. अन्य क्यूआईबी, जिनमें इंश्योरेंस कंपनियां और बैंक शामिल हैं, की हिस्सेदारी 10.5 फीसदी रही. वहीं, AIFs की हिस्सेदारी 5.3 फीसदी थी. सेलिंग के मामले में FPIs और भी आगे रहे. 90 दिनों तक FPIs ने अपनी एंकर एलोकेशन का करीब 20 फीसदी बेच दिया था.

इसके मुकाबले म्यूचुअल फंड्स का एग्जिट करीब 15 फीसदी रहा. 365 दिनों में FPI एग्जिट बढ़कर करीब 60 फीसदी हो गया, जबकि म्यूचुअल फंड्स ने करीब 38 फीसदी होल्डिंग्स बेचीं. बॉडी कॉरपोरेट्स का एग्जिट 58 फीसदी, AIFs का 55 फीसदी और अन्य क्यूआईबी का 46 फीसदी रहा.

22,474 करोड़ रुपये की होल्डिंग्स बेचीं

एब्सोल्यूट वैल्यू में भी FPIs सबसे बड़े सेलर रहे. एक साल में FPIs ने करीब 22,474 करोड़ रुपये की एंकर होल्डिंग्स बेच दीं. इन इन्वेस्टर्स को कुल 37,491 करोड़ रुपये की एंकर एलोकेशन मिली थी. वहीं, म्यूचुअल फंड्स ने 31,529 करोड़ रुपये की एलोकेशन में से करीब 12,228 करोड़ रुपये की होल्डिंग्स बेचीं.

छोटे IPOs में सेलिंग ज्यादा

SEBI स्टडी में IPO साइज और एंकर सेलिंग के बीच भी बड़ा अंतर देखने को मिला. 250 करोड़ रुपये तक के इश्यू साइज वाले IPOs में एंकर एग्जिट सबसे ज्यादा रहा. इस कैटेगरी में 30 दिनों पर एग्जिट 9.1 फीसदी, 60 दिनों पर 20.3 फीसदी और 90 दिनों पर 32.4 फीसदी रहा. एक साल के आंकड़ों में इस कैटेगरी के IPOs में एंकर होल्डिंग्स का 72.5 फीसदी हिस्सा बिक चुका था. इसके मुकाबले 1,001-2,500 करोड़ रुपये के इश्यू साइज वाले IPOs में एक साल के भीतर एंकर एग्जिट 40.8 फीसदी रहा.

ज्यादा सेलिंग से शेयर प्राइस पर दबाव

स्टडी में एंकर सेलिंग और शेयर प्राइस के बीच भी संबंध सामने आया है. जिन स्टॉक्स में एंकर पोर्शन का 10 फीसदी से ज्यादा हिस्सा बेचा गया, उनमें T+29 से T+33 के बीच एवरेज शेयर प्राइस करीब 3.5 फीसदी गिरा. वहीं, जिन स्टॉक्स में एंकर एग्जिट 2.5 फीसदी तक रहा, उनमें एवरेज डिक्लाइन सिर्फ 0.4 फीसदी था. हाई-एग्जिट कैटेगरी में मीडियन डिक्लाइन करीब 6 फीसदी रहा. इस कैटेगरी में भी FPIs की सेलिंग ज्यादा रही. हाई-एग्जिट स्टॉक्स में FPIs का एवरेज एग्जिट 24.5 फीसदी रहा, जबकि म्यूचुअल फंड्स का एग्जिट 11.5 फीसदी था.

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