El Nino का डर, सरकार ने घटाया खाद्यान्न उत्पादन लक्ष्य, 2026 27 के लिए 373.93 मिलियन टन का टारगेट
El Nino की आशंका के बीच सरकार ने 2026 27 के लिए फूड ग्रेन प्रोडक्शनका लक्ष्य 373.93 मिलियन टन तय किया है. यह 2025 26 के 376.56 मिलियन टन वास्तविक उत्पादन से 2.63 मिलियन टन कम है. खरीफ के लिए 196.21 मिलियन टन और रबी के लिए 177.72 मिलियन टन का लक्ष्य रखा गया है.

सरकार ने 2026 27 फसल वर्ष के लिए फूड ग्रेन प्रोडक्शन का लक्ष्य 373.93 मिलियन टन तय किया है. यह लक्ष्य 2025 26 में हुए 376.56 मिलियन टन के वास्तविक उत्पादन से 2.63 मिलियन टन कम है. हालांकि इस साल का लक्ष्य 2025 26 के लिए तय किए गए 362 मिलियन टन के लक्ष्य से ज्यादा है. सरकार ने El Nino की आशंका को देखते हुए यह लक्ष्य तय किया है. इसके अलावा बारिश पानी की उपलब्धता और मिट्टी में नमी की स्थिति को भी ध्यान में रखा गया है. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राज्यों के साथ चर्चा कर मौसम के हिसाब से फसल योजना में बदलाव किया जा रहा है.
खरीफ और रबी के लिए कितना लक्ष्य
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, 2026-27 के कुल फूड ग्रेन प्रोडक्शनलक्ष्य में खरीफ सीजन के लिए 196.21 मिलियन टन का लक्ष्य रखा गया है. वहीं रबी सीजन के लिए 177.72 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया है. धान जैसी खरीफ फसलों की बुवाई पूरी हो चुकी है जबकि गेहूं जैसी रबी फसलों की बुवाई अक्टूबर से शुरू होगी. कृषि मंत्री ने बताया कि रबी की योजना El Nino सूखा और कुछ हिस्सों में आई बाढ़ की स्थिति को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है. सरकार राज्यों के साथ फसल और बीज की किस्मों को लेकर चर्चा कर रही है. मौसम की स्थिति के हिसाब से अलग-अलग इलाकों में फसल योजना तैयार की जाएगी.
कम बारिश वाले इलाकों में बदलेगा फसल पैटर्न
सरकार कम बारिश वाले इलाकों में ज्यादा पानी लेने वाली फसलों से बचने की कोशिश करेगी. जिन क्षेत्रों में बारिश कम हुई है और जलाशयों का स्तर तथा मिट्टी में नमी कम है वहां दाल और तिलहन जैसी फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा. सरकार बारिश पानी की उपलब्धता और मिट्टी की स्थिति के आधार पर फसल योजना में बदलाव कर रही है. जहां सूखे की स्थिति बनेगी वहां वैकल्पिक उपाय अपनाए जाएंगे. केंद्र राज्यों को ऐसे बीज और फसल किस्मों की पहचान में मदद करेगा जिनमें कम पानी की जरूरत होती है. कम समय में तैयार होने वाली फसलों पर भी ध्यान दिया जाएगा.
धान के रकबे में 16.32 लाख हेक्टेयर की कमी
खरीफ सीजन में कुछ फसलों का रकबा घटा है लेकिन कुल बोया गया क्षेत्र पिछले साल के आसपास ही है. धान की खेती का रकबा करीब 16.32 लाख हेक्टेयर घटा है. मक्का सोयाबीन और कपास के रकबे में भी कमी दर्ज की गई है. दूसरी ओर उड़द बाजरा ज्वार तिल सूरजमुखी मूंग और अरहर के रकबे में बढ़ोतरी हुई है. कृषि मंत्री के मुताबिक इससे दाल और मोटे अनाज की ओर फसल पैटर्न में बदलाव का संकेत मिलता है. महाराष्ट्र तमिलनाडु तेलंगाना आंध्र प्रदेश राजस्थान और गुजरात में खेती के रकबे में कमी की जानकारी मिली है.
6.11 लाख हेक्टेयर फसल पर बारिश और बाढ़ का असर
भारी बारिश और बाढ़ के कारण कई राज्यों में करीब 6.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की फसल प्रभावित हुई है. सरकार इन इलाकों में फसल नुकसान का विस्तृत आकलन कर रही है. कर्नाटक महाराष्ट्र आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों तेलंगाना और राजस्थान में सूखे की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई गई है. राज्यों से नुकसान और सूखे की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट अभी मिलनी बाकी है. कर्नाटक सरकार के अनुरोध पर केंद्र की टीम 3 अक्टूबर को राज्य का दौरा करेगी. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के अनुरोध पर वहां भी केंद्र की आकलन टीम भेजी जाएगी.
देश में बारिश 12 फीसदी कम लेकिन बड़ा संकट नहीं
कृषि मंत्री के मुताबिक फिलहाल देश में बारिश करीब 12 फीसदी कम है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर अभी कोई बड़ा संकट नहीं है और समस्या कुछ खास क्षेत्रों तक सीमित है. आमतौर पर संबंधित अवधि में बारिश की कमी 20 फीसदी से ज्यादा होने पर सूखे की स्थिति मानी जाती है. मंत्री के मुताबिक मौजूदा बारिश की कमी से फूड ग्रेन प्रोडक्शन पर बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है. उन्होंने कहा कि खरीफ फूड ग्रेन प्रोडक्शन में बड़ी गिरावट की आशंका नहीं है और अंतिम उत्पादन अनुमान जल्द जारी किए जाएंगे. सरकार ने El Nino की स्थिति को देखते हुए अप्रैल से ही तैयारियां शुरू कर दी थीं.
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रबी के लिए खाद का पर्याप्त स्टॉक
सरकार ने कहा है कि रबी सीजन के लिए देश में खाद की पर्याप्त उपलब्धता है. कुछ खाद की कीमतों में काफी उतार चढ़ाव आया है और कुछ मामलों में कीमत करीब दोगुनी हुई है. इसके बावजूद सरकार के मुताबिक देश में खाद की कोई कमी नहीं है. 2026 27 के लिए राज्यों की जरूरत के आधार पर कुल खाद की आवश्यकता करीब 380 लाख टन आंकी गई है. फिलहाल खाद का शुरुआती स्टॉक 163 लाख टन से ज्यादा है. यह पिछले साल रबी सीजन की शुरुआत में उपलब्ध 122 लाख टन के स्टॉक से काफी ज्यादा है.