भारत ने पैराक्वाट पर लगाया प्रतिबंध, जानलेवा खरपतवार नाशक पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाने के निर्देश

70 से अधिक देशों में बैन होने के बावजूद, जिनमें वे देश भी शामिल हैं जहां इसे बनाया और इसका आविष्कार किया गया था, भारत के खेतों में पैराक्वाट डाइक्लोराइड का छिड़काव कानूनी रूप से जारी रहा. पैराक्वाट डाइक्लोराइड दुनिया के सबसे विवादित खरपतवारनाशकों (Herbicides) में से एक है.

पैराक्वाट पर लगा बैन. Image Credit: tv9

मंगलवार को केंद्र सरकार ने पैराक्वाट नाम के जानलेवा खरपतवार नाशक पर तुरंत प्रभाव से पूरी तरह रोक लगाने के लिए एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया. कई टॉक्सिकोलॉजिस्ट, डॉक्टर और कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि इस पर रोक लगाने में बहुत देर हो चुकी थी.

70 से अधिक देशों में बैन होने के बावजूद, जिनमें वे देश भी शामिल हैं जहां इसे बनाया और इसका आविष्कार किया गया था, भारत के खेतों में पैराक्वाट डाइक्लोराइड का छिड़काव कानूनी रूप से जारी रहा.

ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने मंगलवार को पैराक्वाट पर प्रतिबंध लगाने का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया. पैराक्वाट डाइक्लोराइड, जो दुनिया के सबसे विवादास्पद खरपतवारनाशकों में से एक है, पर जहरीले असर की चिंताओं के कारण दुनिया के कई हिस्सों में प्रतिबंध लगा दिया गया है, लेकिन भारत में इसकी बिक्री जारी रही है.

क्यों किया गया बैन?

‘किसान तक’ की मंगलवार की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने पैराक्वाट डाइक्लोराइड के उत्पादन, आयात, परिवहन, वितरण, बिक्री और इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगाने का प्रस्ताव देते हुए एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है. इंसानों और जानवरों की सेहत को होने वाले खतरों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है.

कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी ‘पैराक्वाट डाइक्लोराइड पर रोक का आदेश, 2026’ का ड्राफ्ट 13 जुलाई को भारत के राजपत्र (गजट) में प्रकाशित किया गया था. अंतिम फैसला लेने से पहले इस पर आम लोगों की राय जानने के लिए इसे 30 दिनों तक खुला रखा जाएगा. इस संबंध में अपनी बात नई दिल्ली के कृषि भवन स्थित कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय में संयुक्त सचिव को भेजी जा सकती है.

यह केमिकल कीटनाशक क्या है?

पैराक्वाट डाइक्लोराइड दुनिया के सबसे विवादित खरपतवारनाशकों (Herbicides) में से एक है. इसके जहरीले होने की वजह से कई देशों में इस पर रोक लगाई जा चुकी है, हालांकि भारत में खरपतवार को नियंत्रित करने के लिए इसका इस्तेमाल जारी रहा है.

कीटनाशक अधिनियम, 1968 की धारा 27 का इस्तेमाल करते हुए, केंद्र सरकार ने भारतीय खेतों में इसके इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगाने का प्रस्ताव दिया है. अगर प्रस्तावित आदेश को अंतिम रूप दे दिया जाता है, तो भारत उन देशों की बढ़ती सूची में शामिल हो जाएगा जिन्होंने पैराक्वाट डाइक्लोराइड पर या तो रोक लगा दी है या फिर उस पर कड़े प्रतिबंध लागू किए हैं.

पहले भी हो चुकी बैन करने की मांग

‘इंडिया टुडे’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह पहली बार नहीं है जब इस खरपतवारनाशक पर रोक लगाने की मांग की गई है. कई राज्यों ने पहले भी इसके इस्तेमाल पर रोक लगाई थी, लेकिन दूसरे राज्यों में ऐसे कदमों को कानूनी चुनौतियों या तकनीकी अड़चनों का सामना करना पड़ा था.

हालांकि, मंगलवार को जारी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन राज्य-स्तर के प्रतिबंधों से ऊपर होगा, क्योंकि यह पूरे देश में लागू होगा. अगर यह नियम लागू हो जाता है, तो इस कीटनाशक के उत्पादन या वितरण का लाइसेंस रखने वालों के पास उन्हें सरकार को सौंपने के लिए तीन महीने का समय होगा.

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