कमजोर मानसून की आशंका के बीच बीज कंपनियां तैयार, 30 फीसदी तक अतिरिक्त स्टॉक मौजूद
खरीफ सीजन में संभावित कमजोर और देरी से मानसून को देखते हुए प्राइवेट बीज कंपनियों ने 20 से 30 फीसदी अतिरिक्त बीज का स्टॉक तैयार किया है. फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया के अनुसार सबसे बड़ी चुनौती जरूरत वाले जिलों तक समय पर बीज पहुंचाना है.

Kharif Season: देश में इस बार कमजोर और देरी से मानसून की आशंका के बीच खरीफ फसल को लेकर सीड इंडस्ट्री ने तैयारी पूरी कर ली है. फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया के अनुसार प्राइवेट बीज कंपनियों के पास इस समय 20 से 30 फीसदी अतिरिक्त बीज का स्टॉक मौजूद है. हालांकि सबसे बड़ी चुनौती जरूरत वाले इलाकों तक समय पर बीज पहुंचाना है. इंडस्ट्री का कहना है कि अगर जुलाई और अगस्त में बारिश कमजोर रहती है तो किसानों को कम अवधि वाली और मौसम के अनुकूल फसल किस्मों को अपनाना चाहिए.
प्राइवेट कंपनियों के पास है पर्याप्त बीज का स्टॉक
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार मक्का, धान और मोटे अनाज का प्रोडक्शन अच्छा रहा है. इसी वजह से प्राइवेट कंपनियों ने 20 से 30 फीसदी अतिरिक्त बीज का स्टॉक तैयार किया है. खरीफ सीजन के लिए 173 लाख क्विंटल की जरूरत के मुकाबले 192.43 लाख क्विंटल बेरिफाइड सीड उपलब्ध है. इससे जरूरत पड़ने पर दोबारा बुआई करने वाले किसानों को भी मदद मिल सकेगी.
मानसून वाले इलाकों पर सबसे ज्यादा फोकस
सरकार ने 12 राज्यों के 315 जिलों को ऐसे क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया है जहां देरी से मानसून का असर पड़ सकता है. मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ, झारखंड और बिहार के कई हिस्सों में बुआई पहले ही प्रभावित हो चुकी है. वहीं पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे सिंचित क्षेत्रों में स्थिति बेहतर बताई गई है. इंडस्ट्री का कहना है कि चुनौती बीज की कमी नहीं बल्कि जरूरत वाले क्षेत्रों तक समय पर उसकी सप्लाई करना है.
किसानों को दी गई यह सलाह
सीड इंडस्ट्री ने किसानों को सलाह दी है कि यदि बारिश में देरी होती है तो कम अवधि में तैयार होने वाली और अधिक प्रोडक्शन देने वाली किस्मों का चयन करें. धान की नर्सरी को 25 से 30 दिन में रोपने और खाद का उपयोग समय से पहले करने की भी सलाह दी गई है. इंडस्ट्री का कहना है कि आधुनिक हाइब्रिड बीज कम समय में तैयार होते हैं और कई मामलों में सामान्य किस्मों की तुलना में कम पानी और कम यूरिया की जरूरत होती है.
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नकली बीज रोकने और निगरानी पर जोर
फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया ने बताया कि सदस्य कंपनियां सरकार की साथी पहल के तहत बीज की पहचान और क्वालिटी तय करने के लिए क्यूआर कोड वाले बीज बैग उपलब्ध करा रही हैं. साथ ही रिमोट सेंसिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिये प्रभावित जिलों की लगातार निगरानी की जा रही है. हाल के एक सर्वे में 75 फीसदी किसानों ने पहले ही बीज खरीद लिया है जबकि 25 फीसदी किसान मानसून का इंतजार कर रहे हैं.