हैकर्स से एक कदम आगे रहना जरूरी, मारुति सुजुकी CEO ने ऑटो इंडस्ट्री को किया सतर्क

मारुति सुजुकी के CEO हिसाशी ताकेउची ने भारतीय ऑटो इंडस्ट्री को साइबर हमलों के बढ़ते खतरे को लेकर सतर्क किया है. उन्होंने कहा कि हैकर्स लगातार ज्यादा एडवांस हो रहे हैं, इसलिए कंपनियों को उनसे एक कदम आगे रहना होगा. JLR और Suzuki Motorcycle India पर हुए साइबर हमले इसका उदाहरण हैं.

मारुति सुजुकी CEO ने ऑटो कंपनियों को साइबर हमलों से सतर्क रहने की सलाह दी. Image Credit: money9live

भारत की ऑटो इंडस्ट्री को साइबर हमलों के बढ़ते खतरे को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है. मारुति सुजुकी इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO हिसाशी ताकेउची ने कहा कि हैकर्स लगातार नई और ज्यादा एडवांस तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं. ऐसे में ऑटो कंपनियों को साइबर सिक्योरिटी के मामले में उनसे एक कदम आगे रहना होगा. उन्होंने कहा कि साइबर हमले की संभावना को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता. इसलिए कंपनियों के पास मजबूत कंटिन्जेंसी प्लान भी होना चाहिए.

साइबर सिक्योरिटी जरूरी

हिसाशी ताकेउची ने ACMA के 66वें वार्षिक सत्र में ऑटो इंडस्ट्री को साइबर सिक्योरिटी पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि जैसे- जैसे ऑटो सेक्टर में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ रहा है, वैसे ही साइबर सिक्योरिटी की अहमियत भी बढ़ रही है. कंपनियां एडवांस तकनीक में निवेश कर अपने सिस्टम को मजबूत बना रही हैं. लेकिन हैकर्स भी लगातार अपनी तकनीक को बेहतर बना रहे हैं. इसलिए कंपनियों को सिक्योरिटी सिस्टम को लगातार अपडेट करना होगा.

बंद हो सकता है पूरा कारोबार

ताकेउची ने कहा कि किसी भी कंपनी के साथ साइबर घटना होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. इसलिए ऑटो कंपनियों को पहले से ऐसा प्लान तैयार रखना चाहिए जिससे हमले के बाद कारोबार को जल्द शुरू किया जा सके. मजबूत कंटिन्जेंसी प्लान से उत्पादन और सप्लाई पर पड़ने वाले असर को कम किया जा सकता है. साइबर हमला केवल IT सिस्टम तक सीमित नहीं रहता बल्कि इसका असर फैक्ट्री और बिक्री नेटवर्क पर भी पड़ सकता है. इससे कंपनियों को भारी आर्थिक नुकसान होने का खतरा रहता है.

JLR पर साइबर हमले से हुआ बड़ा नुकसान

सितंबर 2025 में Jaguar Land Rover पर एक बड़ा साइबर हमला हुआ था. इसके बाद कंपनी को अपने IT सिस्टम बंद करने पडे़ और ब्रिटेन के प्लांट्स में प्रोडक्शन रोकना पड़ा. यह समस्या करीब 6 सप्ताह तक चला और मैन्युफैक्चरिंग, रिटेल और डिस्ट्रीब्यूशन पर असर पड़ा. कंपनी के तीन ब्रिटेन प्लांट्स मिलकर रोज करीब 1000 वाहन बनाते हैं. इस घटना से यह साफ हुआ कि साइबर हमला पूरी सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है.

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डीलर्स पर भी पड़ता है असर

JLR पर हुए साइबर हमले का असर केवल कंपनी तक सीमित नहीं रहा. लंबे समय तक प्रोडक्शन बंद रहने से सप्लायर्स और डीलर्स भी प्रभावित हुए. कंपनी को साइबर हमले से जुड़ी लागत के रूप में 196 मिलियन पाउंड का नुकसान उठाना पड़ा. इस दौरान होलसेल वॉल्यूम में सालाना आधार पर 24 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. वहीं, रिटेल बिक्री भी 17 फीसदी कम हो गई. यह घटना ऑटो सेक्टर के लिए साइबर रिस्क का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई.