‘डेड’ नहीं वॉर फ्रूफ इकोनॉमी की तरफ ऐसे बढ़ रहा भारत, न हो यकीन तो खुद देख लीजिए ये आंकड़े
जुलाई 2025 में व्यापारिक तनाव के दौरान, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की अर्थव्यवस्था को डेड करार दिया था, लेकिन फिलहाल भारतीय इकोनॉमी अपने ग्रोथ के झंडे लहरा रही है. आइए एक-एक करके उन मैक्रो इंडिकेटर्स पर नजर डालते हैं, जो आर्थिक मजबूती के संकेत दे रहे हैं.
Highlights
- पहली तिमाही में भारत की जीडीपी ने 7.8 फीसदी की ग्रोथ हासिल की है.
- मंगलवार को कई मैक्रो इंडिकेटर्स ने अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर दी.
- भारत की GDP ने US-ईरान युद्ध के असर को पीछे छोड़ दिया है.
देश के ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) के आंकड़े सुर्खियों में बने हुए हैं. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी ने 7.8 फीसदी की ग्रोथ हासिल की है. इसे ग्रोथ दर को अहम इसलिए माना जा रहा है, क्योंकि प्रतिकूल माहौल में ये आंकड़े आए हैं. इसके अलावा मंगलवार को जारी कई मैक्रो इंडिकेटर्स ने अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर दी. इससे पता चलता है कि टैरिफ से जुड़ी चुनौतियों और पश्चिम एशिया में जारी संकट के बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है. ग्रोथ के आंकड़े और मैक्रो इंडिकेटर्स ये बता रहे हैं कि भारत की GDP ने US-ईरान युद्ध के असर को पीछे छोड़ दिया है. यानी भारतीय इकोनॉमी वॉर प्रूफ हो गई है. आइए एक-एक करके उन मैक्रो इंडिकेटर्स पर नजर डालते हैं, जो आर्थिक मजबूती के संकेत दे रहे हैं.
जुलाई 2025 में व्यापारिक तनाव के दौरान, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की अर्थव्यवस्था को डेड करार दिया था, लेकिन फिलहाल भारतीय इकोनॉमी अपने ग्रोथ के झंडे लहरा रही है.
मैक्रो इंडिकेटर्स
अगस्त में भारत का कुल गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) कलेक्शन पिछले साल के मुकाबले 14.8 फीसदी बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपये हो गया. वहीं, कारों की थोक बिक्री 36% बढ़कर 4,48,000 यूनिट हो गई, जिससे भारत चालू वित्त वर्ष में 50 लाख (5 मिलियन) यूनिट की बिक्री के आंकड़े तक पहुंचने की राह पर है.
इस महीने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) प्लेटफॉर्म ने रिकॉर्ड 24.51 अरब ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए, जिनकी कुल वैल्यू 29.82 लाख करोड़ रुपये थी. यह ग्राहकों की मजबूत मांग को दिखाता है.
पिछले साल के मुकाबले ट्रांजैक्शन की संख्या में 22 फीसदी और ट्रांजैक्शन की वैल्यू में 20% की बढ़ोतरी हुई. बिजली की खपत भी पिछले साल के मुकाबले 12.9% बढ़कर 169 अरब यूनिट हो गई.ये आंकड़े जुलाई-सितंबर में भी इसी रफ्तार के बने रहने का संकेत देते हैं.
फ्यूल की खपत में इजाफा
अगस्त में पेट्रोल की बिक्री 7.9 फीसदी और डीजल की बिक्री 6.5 फीसदी (साल-दर-साल) बढ़ी. इसकी वजह लोगों की आवाजाही में बढ़ोतरी, गाड़ियों की अच्छी बिक्री और अर्थव्यवस्था का विस्तार था. तेल मंत्रालय के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की बिक्री 1.4 फीसदी बढ़ी, जबकि कुकिंग गैस की बिक्री 16.1 फीसदी घट गई.
ग्रोथ के प्रमुख कारण
| सेक्टर | स्थिति |
|---|---|
| घरेलू मांग | हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स मजबूत घरेलू मांग और सर्विस एक्टिविटी दिखा रहे हैं. |
| औद्योगिक उत्पादन | इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग में सुधार. |
| निर्यात | ट्रेड डील्स से निर्यात को बढ़ावा. |
| निवेश | मजबूत बैंक क्रेडिट ग्रोथ से निवेश को समर्थन. |
घरेलू रेवेन्यू में बढ़ोतरी
आयात से होने वाला GST कलेक्शन परफॉर्मेंस का मुख्य आधार बना रहा. यह एक साल पहले के मुकाबले 29 फीसदी बढ़कर 62,604 करोड़ रुपये हो गया. वहीं, घरेलू मांग के कारण अगस्त में इस टैक्स से घरेलू रेवेन्यू 9.3% बढ़कर 1.37 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया.
GST में जबरदस्त बढ़ोतरी और जून तिमाही में GDP का 7.8 फीसदी विस्तार, जियो-पॉलिटिकल तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दिखाता है. ताजा आंकड़े अच्छी खपत, अर्थव्यवस्था के फॉर्मलाइजेशन (औपचारिक होने) और नियमों के पालन में सुधार का मिला-जुला असर दिखाते हैं.
नेट GST कलेक्शन
रिफंड के बाद नेट GST कलेक्शन 1.68 लाख करोड़ रुपये रहा, जो साल-दर-साल 8.3 फीसदी अधिक है. रिफंड 68 फीसदी बढ़कर 31,795 करोड़ रुपये हो गया. इससे नेट टैक्स कलेक्शन में बढ़ोतरी की रफ्तार तो धीमी हुई, लेकिन यह रिफंड प्रोसेस में तेजी को भी दिखाता है.
ग्रोथ के अनुमानों में इजाफा
Q1 FY27 में 7.8 फीसदी की उम्मीद से बेहतर GDP ग्रोथ के बाद अर्थशास्त्रियों ने पूरे FY27 के लिए अपने विकास अनुमानों को बढ़ाकर मीडियन 7.3 फीसदी कर दिया है, जो पहले 6.7 फीसदी था. मजबूत घरेलू खपत, निवेश, सर्विस सेक्टर और निर्यात को ग्रोथ के प्रमुख इंजन के तौर पर देखा जा रहा है.
FY27 GDP ग्रोथ अनुमान: अर्थशास्त्रियों का अनुमान
| बैंक/रेटिंग एजेंसी | पुराना अनुमान (%) | नया अनुमान (%) | बदलाव |
|---|---|---|---|
| IDFC First Bank | 6.8 | 7.5 | +0.7 |
| SBI | 6.6 | 7.3 | +0.7 |
| HDFC Bank | 6.8 | 7.1 | +0.3 |
| CareEdge Ratings | 7.0 | 7.3 | +0.3 |
| ICRA | 6.7 | 7.1 | +0.4 |
| Morgan Stanley | 6.7 | 7.3 | +0.6 |
| Crisil | 6.6 | 7.0 | +0.4 |
| QuantEco Research | 6.4 | 6.9 | +0.5 |
| DBS Bank | 6.9 | 7.3 | +0.4 |
| Kotak Mahindra Bank | 6.6 | 7.2 | +0.6 |
हालांकि, ऊंची तेल कीमतें, अल नीनो और भू-राजनीतिक अनिश्चितता जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं.
चीन-अमेरिका के मुकाबले मजबूत भारत
वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती के बावजूद भारत की विकास दर अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले मजबूत बनी हुई है. 2026 के अनुमानों के अनुसार, IMF ने भारत की ग्रोथ 6.4% और World Bank ने 6.6% रहने का अनुमान जताया है.
भारत के लिए यह अनुमान FY27 का है. इसके मुकाबले चीन की आर्थिक वृद्धि दर IMF के अनुसार 4.6% और World Bank के अनुसार 4.2% रहने का अनुमान है. अमेरिका की ग्रोथ दोनों संस्थानों के अनुमानों में करीब 2.2-2.3%, जबकि जापान की 0.6-0.7% रहने की संभावना है. वैश्विक स्तर पर IMF ने 2026 में 3% और World Bank ने 2.5% की आर्थिक वृद्धि का अनुमान लगाया है.
प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की ग्रोथ प्रोजेक्शन (2026 के अनुमान, भारत के लिए FY27)
| अर्थव्यवस्था | IMF अनुमान (%) | World Bank अनुमान (%) |
|---|---|---|
| भारत | 6.4 | 6.6 |
| चीन | 4.6 | 4.2 |
| अमेरिका | 2.3 | 2.2 |
| जापान | 0.6 | 0.7 |
| विश्व | 3.0 | 2.5 |
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