ऑल इज नॉट वेल इन TATA! चंद्रशेखरन और नोएल टाटा ने सरकार बता दी थी अंदरूनी खींचतान की कहानी, क्या है असली समस्या?

मौजूदा चेयरमैन एन.चंद्रशेखरन और टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को कंपनी के अंदर चल रही उथल-पुथल के बारे में जानकारी दी थी. यह जानकारी चंद्रशेखरन के चेयरमैन के पद छोड़ने के ऐलान से पहले दी गई थी.

टाटा सन्स Image Credit: @AI

टाटा संस के बोर्ड रूम का विवाद अब सड़कों पर है. भीतरी मदभेद के चलते पिछले हफ्ते टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने पद छोड़ने का ऐलान कर दिया. लेकिन अभी भी उथल-पुथल बरकरार है. द टाइम्स ऑफ इंडिया ने मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के हवाले से बताया कि टाटा के टॉप अधिकारियों, मौजूदा चेयरमैन एन.चंद्रशेखरन और टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को कंपनी के अंदर चल रही उथल-पुथल के बारे में जानकारी दी थी. यह जानकारी चंद्रशेखरन के चेयरमैन के पद छोड़ने के ऐलान से पहले दी गई थी.

किस मुद्दे पर हुई थी चर्चा?

सूत्रों के मुताबिक, सरकारी अधिकारियों के साथ हुई बातचीत में स्ट्रैटेजी और गवर्नेंस को लेकर चंद्रशेखरन और नोएल टाटा के बीच मतभेद, चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर बनी अनिश्चितता और नए बिजनेस वेंचर्स की दिशा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई.

सरकारी नेताओं ने टाटा के दोनों अधिकारियों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं. इन मुलाकातों में कुछ नियुक्तियों, टाटा ग्रुप की एयरलाइन ‘एयर इंडिया’ को हुए नुकसान और टाटा के डिजिटल प्लेटफॉर्म व सेमीकंडक्टर वेंचर्स से जुड़ी चिंताओं पर भी चर्चा हुई थी.

नोएल टाटा का दिल्ली दौरा

रिपोर्ट के मुताबिक, नोएल टाटा ने वीकेंड पर राजधानी का दौरा किया. यह दौरा स्वतंत्रता दिवस समारोह और पारसी नव वर्ष की छुट्टियों के दौरान हुआ, लेकिन सूत्रों ने इस वीकेंड यात्रा के दौरान सरकारी अधिकारियों के साथ किसी भी तरह की बैठक से इनकार किया है. उनके करीबी लोगों ने बताया कि टाटा अधिकारी द्वारा की गई वीकेंड यात्रा समूह की रिटेल ब्रॉन्च ट्रेंट से संबंधित थी और समूह के उत्तराधिकारी डेवलपमेंट से जुड़ी नहीं थी.

नोएल टाटा ट्रेंट के गैर-कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं, यह भूमिका वह समूह की 70 वर्षों की रिटायरमेंट लिमिट के तहत इस नवंबर में छोड़ देंगे.

चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच उनकी यात्रा के समय ने सबका ध्यान खींचा, खासकर इसलिए क्योंकि ट्रेंट के रोजमर्रा के कामकाज में उनकी कोई भूमिका नहीं है.

क्या सरकार ने टाटा के नेताओं को बुलाया था?

रिपोर्ट में साफ किया गया है कि किसी प्राइवेट सेक्टर के कॉरपोरेट ग्रुप के अंदरूनी मामलों की जानकारी देश के राजनीतिक नेताओं को देना आम बात नहीं है, खासकर तब जब वह ग्रुप किसी फाइनेंशियल संकट या दिवालियापन की प्रक्रिया से न गुज़र रहा हो. हालांकि, सरकारें सिस्टम के लिए अहम व्यवसायों पर नजर रखती हैं.

इस मामले में सरकारी अधिकारियों ने टाटा ग्रुप के नेताओं की बात सुनी और यह सुनिश्चित किया कि वे किसी भी गुट का पक्ष न लें. साथ ही, अधिकारियों से संपर्क करने वाले लोग चंद्रशेखरन और नोएल ही थे. टाटा ग्रुप के अंदर हो रही गतिविधियों में सरकार की दिलचस्पी कोई नई बात नहीं है.

पिछले साल भी सरकार तक पहुंची थी बात

इससे पहले 2025 में नोएल टाटा के अपने सौतेले भाई रतन टाटा की जगह टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन बनने के लगभग एक साल बाद, टाटा संस को कंट्रोल करने वाले ट्रस्ट्स के बीच मतभेद हुए. इसके चलते नोएल टाटा, चंद्रशेखरन और टीवीएस मोटर के चेयरमैन एमेरिटस वेणु श्रीनिवासन समेत अन्य ट्रस्टियों ने वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ अलग-अलग बातचीत की. इन बैठकों का मकसद ट्रस्ट्स के बीच मतभेदों को सुलझाना और टाटा संस के कॉरपोरेट स्ट्रक्चर को कंट्रोल करने वाले प्रस्तावित नियमों पर चर्चा करना था.

टाटा लीडरशिप और सरकारी अधिकारियों के बीच हालिया बैठकें जून 2026 में नोएल टाटा की भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई मुलाकात के लगभग दो महीने बाद हुईं. यह मुलाकात टाटा संस के संभावित इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के बारे में थी, जिससे कंपनी पर ट्रस्ट्स का कंट्रोल कम हो जाता.

स्ट्रक्चरल समस्या की ओर इशारा

TOI से बात करते हुए एक ट्रस्टी ने तर्क दिया कि टाटा संस के चेयरमैन और ट्रस्ट्स के चेयरमैन के बीच बार-बार होने वाले तनाव – पहले साइरस मिस्त्री के समय और अब चंद्रशेखरन के समय – ग्रुप में एक ऐसी स्ट्रक्चरल समस्या की ओर इशारा करते हैं जिसके लिए लंबे समय तक चलने वाले समाधान की जरूरत है.

क्या हो सकता है समाधान?

ट्रस्टी ने कहा कि आपको इसका कोई रास्ता निकालना होगा और आगे जोड़ा कि IPO एक ऐसा ही समाधान है, जो कंपनी और उसके मुख्य शेयरहोल्डर के बीच के रिश्ते को नए सिरे से तय करेगा.

एन चंद्रशेखरन, जिन्हें आमतौर पर चंद्रा के नाम से जाना जाता है, 12 अगस्त को सबसे हालिया हाई-प्रोफाइल एग्जिट बने. उन्होंने कहा कि 20 फरवरी 2027 को उनका मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद वे टाटा संस के चेयरमैन के तौर पर दोबारा नियुक्ति नहीं चाहेंगे. उनकी यह घोषणा रतन टाटा के भरोसेमंद अधिकारियों विजय सिंह और मेहली मिस्त्री के धीरे-धीरे हटने के बाद आई.

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