टाटा संस के नए चेयरमैन को चुनने में किस बात की अड़चन, क्या कोर्ट जाएगा ट्रस्ट; समझें पूरा मामला

चंद्रशेखरन ने फैसला किया है कि जब 20 फरवरी, 2027 को उनका मौजूदा कार्यकाल खत्म होगा, तो वे दोबारा चेयरमैन बनने के लिए अपना नाम आगे नहीं बढ़ाएंगे. टाटा ट्रस्ट्स ने उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

टाटा संस. Image Credit: Getty image

Highlights

  • अगले चेयरमैन को खोजने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.
  • SRTT पर महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर की तरफ से कुछ पाबंदियां लगी हुई हैं.
  • प्रक्रिया कानूनी और गवर्नेंस से जुड़ी मुश्किलों में फंस गई है.

एन चंद्रशेखरन के टाटा संस के चेयरमैन पद से हटने के फैसले ने टाटा ग्रुप में उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. लेकिन ग्रुप के उनकी जगह किसी और को खोजने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले ही, यह प्रक्रिया कानूनी और गवर्नेंस से जुड़ी मुश्किलों में फंस गई है.

‘द इकोनॉमिक टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट्स इस बात पर विचार कर रहा है कि सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) को टाटा संस के अहम फैसलों में शामिल होने की इजाजत दिलाने के लिए जरूरी कानूनी कदम उठाए जाएं. SRTT पर अभी महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर की तरफ से कुछ पाबंदियां लगी हुई हैं, जिनकी वजह से वह अहम फैसलों में हिस्सा नहीं ले पा रहा है.

यह समय बहुत अहम है

चंद्रशेखरन ने फैसला किया है कि जब 20 फरवरी, 2027 को उनका मौजूदा कार्यकाल खत्म होगा, तो वे दोबारा चेयरमैन बनने के लिए अपना नाम आगे नहीं बढ़ाएंगे. उनके इस फैसले के बाद, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) ने टाटा संस बोर्ड के अगले चेयरमैन के लिए नाम सुझाने वाली सिलेक्शन कमिटी बनाने की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है. लेकिन एक समस्या है. दो मुख्य टाटा ट्रस्ट्स में से एक शायद उस उत्तराधिकारी को चुनने की प्रक्रिया में शामिल न हो पाए.

चंद्रशेखरन क्यों छोड़ रहे हैं?

चंद्रशेखरन ने टाटा संस से तुरंत इस्तीफा नहीं दिया है. उन्होंने 12 अगस्त को टाटा ट्रस्ट्स को बताया कि जब अगले साल 20 फरवरी को उनका मौजूदा कार्यकाल खत्म होगा, तो वे दोबारा चेयरमैन बनने के लिए अपना नाम आगे नहीं बढ़ाएंगे.

इसका मतलब है कि मौजूदा समय-सीमा के हिसाब से वे अपने मौजूदा कार्यकाल के आखिर तक चेयरमैन बने रहेंगे, जब तक कि टाटा संस की AGM में कोई बदलाव न हो जाए.

टाटा ट्रस्ट्स ने पिछले दशक में खासकर बड़े बदलाव, विकास और ट्रांसफॉर्मेशन के दौर में टाटा संस और टाटा ग्रुप में चंद्रशेखरन के योगदान और उनकी लीडरशिप की तारीफ की है.

इस फैसले का मतलब है कि टाटा संस को ग्रुप के टॉप लेवल पर लीडरशिप में बदलाव की तैयारी शुरू करनी होगी और वह प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है.

उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया शुरू

टाटा ट्रस्ट्स ने उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने टाटा संस के ‘आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन’ के मुताबिक, जल्द से जल्द सिलेक्शन कमिटी बनाने की प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव पास किया है.

यह कमिटी टाटा संस बोर्ड के नए चेयरमैन के तौर पर नियुक्ति के लिए किसी उम्मीदवार का नाम सुझाएगी. यह इसलिए जरूरी है क्योंकि चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी की तलाश अब सिर्फ भविष्य की संभावना नहीं रह गई है.

अगले चेयरमैन को खोजने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. लेकिन ताजा घटनाक्रम एक नया सवाल खड़ा करता है. क्या SRTT पर लगी पाबंदियों के बावजूद टाटा ट्रस्ट्स उस प्रक्रिया को आसानी से पूरा कर पाएगा?

सर रतन टाटा ट्रस्ट के साथ क्या समस्या है?

SRTT और SDTT टाटा ट्रस्ट्स के दो मुख्य ट्रस्ट हैं. टाटा संस के कुछ अहम फैसलों के लिए दोनों को मिलकर काम करना होता है.

ET की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें अगले मंगलवार को होने वाली टाटा संस की सालाना आम बैठक (AGM) के लिए संयुक्त रूप से एक प्रतिनिधि को नॉमिनेट करना होगा. उन्हें उस सिलेक्शन कमिटी के लिए भी संयुक्त रूप से तीन सदस्यों को नॉमिनेट करना होगा जो चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी की सिफारिश करेगी.

पाबंदी का क्या मतलब?

मुश्किल यह है कि महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के रोक लगाने वाले आदेश की वजह से SRTT अभी अहम फैसलों में हिस्सा नहीं ले सकता. इस पाबंदी का मतलब है कि SRTT गुरुवार को हुई टाटा ट्रस्ट्स की बैठक में हिस्सा नहीं ले सका, जिसमें ट्रस्ट्स अगले कदमों पर विचार कर रहे थे.

कौन-कौन रहा मौजूद?

SDTT और छोटे टाटा ट्रस्ट्स ने बैठक में हिस्सा लिया. रिपोर्ट में मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के हवाले से बताया गया है कि टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा के साथ-साथ ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन, डेरियस खंबाटा और विजय सिंह भी मौजूद थे. लेकिन SRTT की भागीदारी के बिना, दोनों मुख्य ट्रस्ट AGM और उत्तराधिकार कमिटी के लिए जरूरी नॉमिनेशन संयुक्त रूप से नहीं कर सके. इसलिए टाटा संस के सामने अब समस्या सिर्फ उत्तराधिकारी की पहचान करने से कहीं बड़ी है.

ग्रुप को सबसे पहले यह पक्का करना होगा कि उत्तराधिकारी को चुनने के लिए जरूरी गवर्नेंस सिस्टम असल में काम कर सके.

टाटा ट्रस्ट्स कानूनी राहत क्यों मांग सकता है?

यह मामला इसलिए भी बहुत जरूरी हो गया है, क्योंकि टाटा संस की AGM अगले मंगलवार को होनी है. टाटा ट्रस्ट्स अब SRTT को फैसला लेने की प्रक्रिया में वापस लाने के विकल्पों पर विचार कर रहा है. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रस्ट्स पाबंदियों से राहत पाने के लिए महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के सामने तत्काल सुनवाई की मांग कर सकते हैं.

क्या कोर्ट जा सकता है टाटा ट्रस्ट?

अगर यह तरीका काम नहीं करता है, तो टाटा ट्रस्ट्स बॉम्बे हाई कोर्ट जा सकता है. रिपोर्ट में बताए गए घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले लोगों के अनुसार, प्राथमिकता यह है कि तुरंत कोर्ट जाने के बजाय चैरिटी कमिश्नर से राहत ली जाए. ट्रस्ट असल में SRTT के मुद्दे को सुलझाने की कोशिश कर रहा है ताकि यह टाटा संस में लीडरशिप बदलने की प्रक्रिया के अगले कदमों में रुकावट न बने.

आने वाली AGM क्यों अहम है?

टाटा संस की AGM अब उत्तराधिकार की कहानी का एक अहम हिस्सा बन गई है. रिपोर्ट के अनुसार, अगर टाटा ट्रस्ट्स को जरूरी कोरम मिल जाता है और वह AGM में चंद्रशेखरन की डायरेक्टरशिप के खिलाफ वोट करता है, तो उनका कार्यकाल 20 फरवरी 2027 तक चलने के बजाय तुरंत खत्म हो सकता है.

दूसरी ओर, अगर SRTT के शामिल न हो पाने के कारण टाटा ट्रस्ट्स जरूरी कोरम नहीं जुटा पाता है, तो AGM को ही टाला जा सकता है.

इसलिए टाटा संस को स्थिति की समीक्षा करनी होगी और ट्रस्ट्स से इस बात का इंतजार करना होगा कि क्या जरूरी कोरम पूरा हो सकता है. यही वजह है कि SRTT पर लगी रोक सिर्फ ट्रस्ट के अंदरूनी मामले से कहीं ज्यादा अहम है. इसका सीधा असर AGM के समय और संभवतः चंद्रशेखरन के कार्यकाल और उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया पर पड़ सकता है.

अगले चेयरमैन की तलाश

साथ ही टाटा ट्रस्ट्स ने यह साफ कर दिया है कि वह चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी को खोजने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहता है. सिलेक्शन कमेटी टाटा संस बोर्ड के नए चेयरमैन के तौर पर नियुक्ति के लिए किसी उम्मीदवार की सिफारिश करने के लिए जिम्मेदार होगी. लेकिन उस कमेटी के तीन सदस्यों को दो मुख्य ट्रस्टों – SRTT और SDTT – द्वारा संयुक्त रूप से नॉमिनेट किया जाना जरूरी है.

मुश्किल हो गई आसान लगने वाली प्रक्रिया?

चूंकि अभी SRTT को अहम फैसलों में शामिल होने से रोका गया है, इसलिए यह आसान लगने वाली प्रक्रिया जटिल हो गई है.

इसका मतलब है कि टाटा संस को दो समानांतर कामों का सामना करना पड़ रहा है. एक तो चंद्रशेखरन की जगह लेने के लिए सही व्यक्ति को खोजना. दूसरा यह सुनिश्चित करना कि टाटा ट्रस्ट्स का गवर्नेंस स्ट्रक्चर इस नियुक्ति में मदद कर सके, बिना किसी देरी या चुनौती के.

अहम मोड़ पर टाटा समूह?

चंद्रशेखरन 2017 से टाटा संस की कमान संभाले हुए हैं और उन्होंने टाटा ग्रुप के बड़े विस्तार और बदलाव के दौर को देखा है. उनके कार्यकाल में एयर इंडिया के जरिए ग्रुप की एविएशन सेक्टर में वापसी, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर में बड़े निवेश और नए बिजनेस में विस्तार शामिल है. इसलिए, उनका दोबारा कार्यकाल न लेने का फैसला ग्रुप के लिए एक अहम मोड़ पर आया है.

टाटा संस के लिए आने वाले दिन अहम

12 अगस्त को चंद्रशेखरन ने टाटा ट्रस्ट्स को बताया कि फरवरी 2027 में उनका मौजूदा कार्यकाल खत्म होने पर वे दोबारा नियुक्ति के लिए अपना नाम आगे नहीं बढ़ाएंगे. अगले दिन, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने कहा कि वे उनके फैसले का सम्मान करते हैं और उनके योगदान की तारीफ करते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि वे उनके उत्तराधिकारी को चुनने के लिए सिलेक्शन कमिटी बनाने की प्रक्रिया शुरू करेंगे. हालांकि, अब SRTT का मामला एक नई मुश्किल बनकर सामने आया है.

गुरुवार को टाटा ट्रस्ट्स की बैठक टाटा संस की AGM से पहले हुई, लेकिन चैरिटी कमिश्नर की पाबंदियों के कारण SRTT इसमें शामिल नहीं हो सका. इसलिए ट्रस्ट इस बात पर विचार कर रहा है कि क्या उसे आगे होने वाले फैसलों में शामिल होने के लिए तुरंत कानूनी राहत की जरूरत है. इसलिए, टाटा संस के लिए अगले कुछ दिन अहम हो सकते हैं.

ग्रुप को चंद्रशेखरन के पद छोड़ने की प्रक्रिया को संभालना है, नए चेयरमैन की तलाश शुरू करनी है और टाटा ट्रस्ट्स के अंदरूनी कामकाज से जुड़े मसले को भी सुलझाना है. यह सब तब करना है जब एक अहम AGM पास आ रही है. अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि टाटा संस का अगला चेयरमैन कौन होगा. सवाल यह है कि क्या ग्रुप चेयरमैन चुनने की प्रक्रिया को आसानी से पूरा कर पाएगा.

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