HDFC बैंक पर गलत तरीके से प्रॉडक्ट बेचने के आरोप, कार्लिस्ले इन्वेस्टर्स PMO से करेंगे संपर्क; क्या है पूरा मामला
75 से अधिक लोगों का यह ग्रुप, जिसने Carlisle के लक्जमबर्ग लाइफ फंड में 13.5 मिलियन डॉलर से ज्यादा का मूल निवेश किया है, अपनी शिकायतों को एक साथ कर रहा है और HDFC बैंक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर विचार कर रहा है. यह कदम फंड को लेकर वर्षों से चल रहे विवादों के बाद उठाया जा रहा है.

HDFC बैंक के दुबई ऑपरेशन्स के जरिए Carlisle का ‘लाइफ सेटलमेंट प्रोडक्ट’ खरीदने वाले इन्वेस्टर्स का एक ग्रुप इस हफ्ते प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को पत्र लिखने की तैयारी कर रहा है. वे गलत तरीके से प्रोडक्ट बेचने (Mis-Selling), भारी नुकसान और वर्षों से रिडेम्पशन (पैसे की वापसी) न मिलने का आरोप लगा रहे हैं.
75 से अधिक लोगों का यह ग्रुप, जिसने Carlisle के लक्जमबर्ग लाइफ फंड में 13.5 मिलियन डॉलर से ज्यादा का मूल निवेश किया है, अपनी शिकायतों को एक साथ कर रहा है और HDFC बैंक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर विचार कर रहा है.
केंद्रीय बैंकों से संपर्क करने की योजना
ईटी के अनुसार, कुछ इन्वेस्टर्स रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और सेंट्रल बैंक ऑफ बहरीन से भी संपर्क करने की योजना बना रहे हैं, जबकि कुछ इन्वेस्टर्स ने पहले ही दुबई फाइनेंशियल सर्विसेज अथॉरिटी (DFSA) में स्वतंत्र रूप से शिकायत दर्ज कराई है.
क्या हैं अहम मुद्दें?
ईटी के अनुसार, दुबई में रहने वाले पूर्व बैंकर हितेश भाटिया, जिन्होंने 2019 में इस फंड में निवेश किया था, ने कहा, ‘हम इस हफ्ते PMO को पत्र लिखने की योजना बना रहे हैं. इसमें हम दुबई में HDFC बैंक की ओर से क्लाइंट-सूटेबिलिटी (ग्राहक के लिए उपयुक्तता) में गंभीर चूक, लेवरेज (उधार लेकर निवेश), डिस्क्लोजर (जानकारी देने), इन्वेस्टर्स के नुकसान और लिक्विडिटी (पैसे की उपलब्धता) न मिलने जैसे मुद्दों को उठाएंगे.’
उन्होंने कहा कि हम अनुरोध करेंगे कि इस मामले को उचित रेगुलेटरी और जांच अधिकारियों को सौंपा जाए.
फंड को लेकर वर्षों से विवाद
यह कदम फंड को लेकर वर्षों से चल रहे विवादों के बाद उठाया जा रहा है. इन्वेस्टर्स का आरोप है कि इंश्योरेंस-लिंक्ड प्रोडक्ट को ‘कैपिटल प्रोटेक्शन इन्वेस्टमेंट’ (पूंजी सुरक्षा निवेश) के तौर पर बेचा गया था, जबकि निवेश के साथ दिए गए लेवरेज ने कोविड-19 के दौरान मार्केट क्रैश के समय उनके रिस्क और नुकसान को काफी बढ़ा दिया.
एक इन्वेस्टर ने आरोप लगाया कि Carlisle से जुड़े इस प्रोडक्ट को उन्हें ‘कैपिटल प्रोटेक्शन’ और इंश्योरेंस-लिंक्ड इन्वेस्टमेंट के तौर पर पेश किया गया था, जिसमें सालाना 12-19% का पिछला रिटर्न मिलने का दावा किया गया था.
गलत तरीके से बॉन्ड बेचने का आरोप
यह कदम DFSA द्वारा 2025 में HDFC बैंक की DIFC ब्रांच के खिलाफ की गई कार्रवाई की पृष्ठभूमि में उठाया जा रहा है. यह कार्रवाई रिटेल ग्राहकों को अधिक रिस्क वाले Credit Suisse AT1 बॉन्ड गलत तरीके से बेचने के आरोपों के कारण की गई थी, जिसके तहत रेगुलेटरी चिंताओं के चलते ब्रांच को नए क्लाइंट्स जोड़ने और उनके साथ कुछ खास फाइनेंशियल-सर्विसेज गतिविधियां करने से रोक दिया गया था.
कानूनी रास्ता भी अपनाने की तैयारी
भाटिया ने कहा कि इन्वेस्टर्स का ग्रुप RBI से संपर्क करने सेंट्रल बैंक ऑफ बहरीन में शिकायत दर्ज कराने और DFSA के साथ मामले को आगे बढ़ाने के लिए वकील हायर करने की भी योजना बना रहा है. उन्होंने कहा, ‘हमने HDFC बैंक को एक पत्र लिखा है और उन्हें जवाब देने के लिए 31 अगस्त तक का समय दिया है. अगर वे कोई जवाब नहीं देते हैं, तो हम कानूनी रास्ता अपनाएंगे.’
DFSA, दुबई इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर (DIFC) के जरिए दी जाने वाली सभी फाइनेंशियल सर्विस का स्वतंत्र रेगुलेटर है. DIFC दुबई में एक फेडरल फाइनेंशियल फ्रीजोन है.
ऊपर बताए गए इन्वेस्टर ने ET के साथ बातचीत और रिकॉर्ड शेयर किए. उन्होंने आरोप लगाया कि HDFC बैंक ने इन प्रोडक्ट्स में इन्वेस्टमेंट के लिए, बैंक में ब्लॉक की गई डिपॉजिट की रकम से तीन से पांच गुना तक लेवरेज (उधार या अतिरिक्त फंड) की पेशकश की थी.