होर्मुज स्ट्रेट में फिर खुल सकता है रास्ता? ईरान और ओमान के बीच अस्थायी कॉरिडोर पर चल रही बातचीत
ईरान और ओमान ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए अस्थायी नौवहन कॉरिडोर बनाने पर बातचीत शुरू की है. इस रणनीतिक जलमार्ग से युद्ध से पहले दुनिया के करीब पांचवें हिस्से का तेल और प्राकृतिक गैस कारोबार गुजरता था. फरवरी में संघर्ष शुरू होने के बाद यहां शिपिंग गतिविधियां प्रभावित हुई हैं.
Highlights
- ईरान और ओमान ने होर्मुज स्ट्रेट में अस्थायी कॉरिडोर पर की बातचीत.
- युद्ध से पहले दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल और LNG कारोबार इसी रूट से गुजरता था.
- टैंकर पर हमले के बाद होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है.
Strait of Hormuz: ईरान और ओमान ने होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री यातायात को सुरक्षित और व्यवस्थित करने के लिए बातचीत फिर शुरू की है. दोनों देशों के बीच रणनीतिक जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही को लेकर पिछले कई हफ्तों से चर्चा चल रही थी. अब दोनों पक्षों ने एक संयुक्त अस्थायी नौवहन कॉरिडोर बनाने के प्रस्ताव पर चर्चा की है. यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर बातचीत में गतिरोध बना हुआ है. हालांकि, दोनों देशों के बीच सक्रिय सैन्य टकराव में कमी आई है, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है.
होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता है दुनिया का बड़ा तेल कारोबार
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है. युद्ध शुरू होने से पहले इस जलमार्ग से दुनिया के करीब पांचवें हिस्से का तेल और प्राकृतिक गैस कारोबार गुजरता था. हालांकि, फरवरी में युद्ध शुरू होने के बाद से इस रूट पर ज्यादातर शिपिंग गतिविधियां बंद हैं. ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित तरीके से दोबारा खोलना वैश्विक तेल सप्लाई और एनर्जी मार्केट के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
अस्थायी नौवहन कॉरिडोर बनाने की तैयारी
ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान और ओमान ने मंगलवार को होर्मुज स्ट्रेट के जरिए जहाजों की आवाजाही के लिए एक अस्थायी नौवहन कॉरिडोर पर चर्चा की. दोनों देशों ने इस रणनीतिक जलमार्ग से माइंस हटाने पर भी सहमति जताई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में मौजूद सभी माइंस को साफ कर दिया गया है. हालांकि, इसके बावजूद समुद्री यातायात पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ है और जहाजों के लिए जोखिम बना हुआ है.
तेल टैंकर पर हुआ हमला
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर चिंता उस समय और बढ़ गई, जब मंगलवार को एक तेल टैंकर को एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल ने निशाना बनाया. यह घटना ओमान के ऐश शिशाह के करीब 9 नॉटिकल माइल यानी लगभग 17 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में हुई.
यूनाइटेड किंगडम मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस के मुताबिक, हमले के बाद टैंकर को नुकसान पहुंचा और वह आगे बढ़ने में असमर्थ हो गया. इससे साफ है कि सक्रिय सैन्य टकराव कम होने के बावजूद इस समुद्री मार्ग में सुरक्षा का खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.
अमेरिका से बातचीत में अभी भी गतिरोध
अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष को खत्म करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन अभी तक कोई स्थायी शांति समझौता नहीं हो पाया है. दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के बावजूद बातचीत आगे बढ़ने में मुश्किलें बनी हुई हैं.
इसी बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति भी जारी रखी है. अमेरिका ने उन देशों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है, जो ईरान के साथ कारोबार जारी रखते हैं. हालांकि, अमेरिका ने कहा है कि इन देशों पर तत्काल दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी.
अमेरिका ने मध्य-पूर्व में राजनयिक कर्मचारियों को भेजना शुरू किया
ईरान के साथ तनाव कम होने के संकेतों के बीच अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपने कुछ राजनयिक मिशनों में कर्मचारियों को वापस भेजना शुरू किया है. ये कर्मचारी पहले क्षेत्र में बढ़े तनाव के कारण वहां से हटा दिए गए थे या उनकी संख्या कम कर दी गई थी.
इस कदम से संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन को निकट भविष्य में ईरान के साथ संघर्ष के दोबारा बढ़ने का जोखिम पहले की तुलना में कम दिखाई दे रहा है. हालांकि, कुछ दूतावास शुरुआत में पूरी क्षमता के साथ काम नहीं करेंगे.
होर्मुज स्ट्रेट पर टिकी दुनिया की नजर
ईरान और ओमान के बीच प्रस्तावित अस्थायी नौवहन कॉरिडोर अगर लागू होता है, तो इससे होर्मुज स्ट्रेट में सीमित स्तर पर शिपिंग गतिविधियां दोबारा शुरू करने में मदद मिल सकती है. इससे वैश्विक तेल सप्लाई को लेकर बनी चिंता भी कुछ कम हो सकती है.
हालांकि, कॉरिडोर की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि समुद्री मार्ग कितना सुरक्षित रहता है और अमेरिका-ईरान के बीच कूटनीतिक गतिरोध किस तरह आगे बढ़ता है. फिलहाल होर्मुज स्ट्रेट में सामान्य शिपिंग बहाल होने के रास्ते में सुरक्षा और राजनीतिक दोनों तरह की चुनौतियां बनी हुई हैं.
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