RBI ने भी माना… बढ़ गई है महंगाई, चावल, गेहूं, दाल… हर चीज की बढ़ी कीमत; आगे और खाली होगी आपकी जेब?

Food Inflation: सामान्य से कम मॉनसून की संभावना, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता विकास और महंगाई के लिए जोखिम पैदा कर रहे हैं. केंद्रीय बैंक का यह दूसरा 'हॉकिश' (सख्त रुख वाला) बयान है.

क्यों बढ़ रही महंगाई? Image Credit: PTI

Highlights

  • केंद्रीय बैंक का यह दूसरा 'हॉकिश' (सख्त रुख वाला) बयान है.
  • जुलाई में घरेलू मांग मजबूत बनी रही, जिसे ग्रामीण मांग का समर्थन मिला.
  • खाने-पीने की चीजों की कीमतों की वजह से महंगाई पर दबाव बढ़ने लगा है.

Food Inflation: देश में महंगाई लगातार बढ़ रही है और इस बात को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने भी अपने ताजा बुलेटिन में माना है. मंगलवार को जारी रिजर्व बैंक के ताजा बुलेटिन के अनुसार, घरेलू मांग में तेजी और मैन्युफैक्चरिंग व सर्विस सेक्टर की बढ़ती गतिविधियों के कारण अर्थव्यवस्था ने वैश्विक चुनौतियों का मजबूती से सामना किया है. लेकिन सामान्य से कम मॉनसून की संभावना, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता विकास और महंगाई के लिए जोखिम पैदा कर रहे हैं.

सख्त रुख वाला बयान

इस आकलन में मजबूत घरेलू मांग, बेहतर होती औद्योगिक गतिविधि और कंपनियों के अच्छे मुनाफे को विकास में सहायक बताया गया है. केंद्रीय बैंक का यह दूसरा ‘हॉकिश’ (सख्त रुख वाला) बयान है. इससे पहले, मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) की बैठक के मिनट्स से पता चला था कि MPC सदस्य भविष्य में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना देख रहे थे.

मजबूत बनी रही घरेलू मांग

लेख में कहा गया है, ‘जुलाई में घरेलू मांग मजबूत बनी रही, जिसे ग्रामीण मांग का समर्थन मिला. ट्रैक्टर और दोपहिया वाहनों की बिक्री बढ़ने से रिटेल ऑटोमोबाइल बिक्री में तेजी आई. शहरी मांग भी मजबूत बनी रही.’

वाहन और ट्रैक्टर की बिक्री उन संकेतकों में शामिल थी जो लगातार मांग की ओर इशारा करते हैं. औद्योगिक गतिविधि भी सहायक रही. PMI डेटा से पता चला कि भविष्य के उत्पादन के लिए कंपनियों की उम्मीदें बेहतर हुईं, जो मांग और नए व्यापारिक अवसरों के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण की ओर इशारा करते हैं.

लेख के अनुसार, अर्थव्यवस्था ने इन चुनौतियों के बावजूद मजबूती दिखाई, जबकि Q1:2026-27 में रिटेल महंगाई में लागत के दबाव का सीमित असर दिखा और विकास दर मजबूत बनी रही.

मॉनसून में सुधार के संकेत

लेख में यह भी कहा गया है कि जुलाई में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून में सुधार से खरीफ फसल की बुआई का रकबा सामान्य स्तर के करीब पहुंच गया, जिससे कृषि क्षेत्र से जुड़े कुछ जोखिमों को आंशिक रूप से कम करने में मदद मिली.

हालांकि, ‘अर्थव्यवस्था की स्थिति’ (State of the Economy) पर आधारित लेख में कहा गया है कि वैश्विक आर्थिक परिदृश्य अभी भी पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका द्वारा लगाए गए नए टैरिफ से प्रभावित हो रहा है.

महंगाई दर लक्ष्य से ऊपर

लेख में आगे कहा गया कि हालांकि हेडलाइन कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) महंगाई दर लक्ष्य से थोड़ी ऊपर चली गई, लेकिन ऐसा मुख्य रूप से सप्लाई-साइड के दबावों के कारण हुआ. स्थिर कोर महंगाई दर ने लागत के दबावों का कम असर पड़ने की पुष्टि की.

खाने-पीने की चीजें हुईं महंगी

खाने-पीने की चीजों की कीमतों की वजह से महंगाई पर दबाव बढ़ने लगा है. जुलाई में खाने-पीने की चीजों और पेय पदार्थों की वजह से हेडलाइन CPI महंगाई में थोड़ी बढ़ोतरी हुई. हाई-फ़्रीक्वेंसी डेटा से पता चलता है कि खाने-पीने की चीजों की कीमतों में हर महीने व्यापक बढ़ोतरी हो रही है. इसमें चावल और गेहूं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, मुख्य दालों की कीमतें थोड़ी बढ़ रही हैं और खाने के तेल की कीमतों में भी व्यापक बढ़ोतरी देखी जा रही है.

क्यों बढ़ रही महंगाई?

जहां हेडलाइन महंगाई में थोड़ी बढ़ोतरी हुई, वहीं कोर महंगाई स्थिर रही. लेख में कहा गया है कि हेडलाइन महंगाई में बढ़ोतरी मुख्य रूप से सप्लाई-साइड के दबावों के कारण हुई और स्थिर कोर महंगाई से पता चलता है कि लागत के दबाव का असर सीमित रहा है.

सामान्य से कम बारिश का अनुमान

IMD ने अगस्त और सितंबर में सीजन के दूसरे भाग में सामान्य से कम बारिश का अनुमान लगाया है. कमजोर मॉनसून से खेती के उत्पादन पर असर पड़ सकता है और खाने-पीने की चीजों की महंगाई का दबाव बढ़ सकता है. इनपुट लागत भी ज्यादा बनी हुई है. लेख में कहा गया है, ‘इंडस्ट्रियल और खेती से जुड़े इनपुट की लागत में महंगाई कम हुई, लेकिन यह अभी भी ज्यादा बनी हुई है.’

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