RBI MPC: कम होगी आपकी EMI या बढ़ेगी महंगाई? आज होगा फैसला, शेयर बाजार पर भी दिखेगा असर!

RBI MPC Today: महंगाई दर सेंट्रल बैंक की 2 फीसदी से 6 फीसदी की तय सीमा के अंदर ही है, लेकिन कोर महंगाई दर भी 4 फीसदी के आस-पास बनी हुई है. इससे पता चलता है कि कीमतों पर बना दबाव बहुत कम नहीं हुआ है. यह पैनल भारत के लिए जरूरी आर्थिक बदलावों और सेंट्रल बैंक के मॉनेटरी रुख की समीक्षा करेगा.

रिजर्व बैंक एमपीसी. Image Credit: Tv9

Highlights

  • जून में रिटेल महंगाई दर बढ़कर 4.38 फीसदी हो गई थी.
  • पश्चिम एशिया में युद्ध की अनिश्चितता फैसलों पर असर डाल सकती है.
  • RBI ने दिसंबर 2025 से अपनी बेंचमार्क रेपो रेट को स्थिर रखा है.

RBI MPC Today: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) 5 अगस्त को अपनी मॉनेटरी पॉलिसी की बैठक में लिए गए फैसलों का ऐलान करेगा. इसलिए होम लोन लेने वाले लोग इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि क्या सेंट्रल बैंक ब्याज दरों में कोई बदलाव करेगा. जून में रिटेल महंगाई दर बढ़कर 4.38 फीसदी हो गई, जो पिछले 17 महीनों में पहली बार RBI के 4 फीसदी के टारगेट से अधिक रही है. इसके बाद रेपो रेट पर सभी की नजरें टिक गई हैं.

कैसा रुख अपनाए RBI?

हालांकि, महंगाई दर सेंट्रल बैंक की 2 फीसदी से 6 फीसदी की तय सीमा के अंदर ही है, लेकिन कोर महंगाई दर भी 4 फीसदी के आस-पास बनी हुई है. इससे पता चलता है कि कीमतों पर बना दबाव बहुत कम नहीं हुआ है. इससे इस उम्मीद को बल मिला है कि RBI सावधानी भरा रुख अपनाएगा, जिससे कर्ज लेने की लागत में तुरंत कमी आने की संभावना कम है.

इन फैक्टर्स का रखा जाएगा ध्यान

यह पैनल भारत के लिए जरूरी आर्थिक बदलावों और सेंट्रल बैंक के मॉनेटरी रुख की समीक्षा करेगा, जिसमें जियो-पॉलिटिकल और घरेलू मैक्रो-इकोनॉमिक हालात को ध्यान में रखा जाएगा. साथ ही पश्चिम एशिया में युद्ध की अनिश्चितता भी मॉनिटरी फैसलों पर असर डाल रही है.

होम लोन लेने वाले और निवेशक इस घोषणा पर बारीकी से नजर रख रहे हैं क्योंकि इससे तय होगा कि उनकी लागत, बचत और निवेश स्थिर रहेंगे या उन पर बुरा असर पड़ेगा.

क्या RBI रेपो रेट कम करेगा?

उम्मीद है कि MPC मुख्य रेपो रेट को 5.25% पर ही बनाए रखेगी. इसका मतलब है कि छह सदस्यों वाले इस पैनल का रुख न्यूट्रल रहने की उम्मीद है. जानकारों का कहना है कि रिजर्व बैंक ‘वेट एंड वॉच’ का रुख अपनाएगा और सप्लाई-साइड में बढ़ोतरी के बीच महंगाई को काबू में रखने के लिए दरों को 5.25% पर स्थिर रखेगा.

होम लोन पर क्या मिलेगी राहत?

अगर घर खरीदार अपने होम लोन की EMI पर तुरंत राहत की उम्मीद कर रहे हैं, उन्हें शायद थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है. हालांकि दरों में कटौती से पहली बार घर खरीदने वालों को त्योहारों के मौसम से ठीक पहले एक अतिरिक्त बढ़ावा मिलता, लेकिन स्थिर दरें भी अच्छी खबर है, क्योंकि इससे कर्ज लेने की लागत बढ़ने का डर खत्म हो जाता है.

रेपो रेट का भारतीयों पर क्या असर पड़ता है?

रेपो रेट वह ब्याज दर है जो भारतीय रिजर्व बैंक कमर्शियल बैंकों को पैसा उधार देने पर वसूलता है.

अर्थशास्त्रियों का मानना ​​है कि अगर केंद्रीय बैंक दर को स्थिर रखता है, तो बैंकों को कर्ज लेने की अधिक लागत का सामना नहीं करना पड़ेगा. नतीजतन, वे अपनी बाहरी बेंचमार्क लेंडिंग दरों (EBLR) को अपरिवर्तित रखने की संभावना रखते हैं.

फ्लोटिंग-रेट वाले लोन दर में ठहराव के दौरान वैसे ही रहते हैं, जबकि फिक्स्ड-रेट वाले लोन रेपो रेट में बदलाव से प्रभावित नहीं होते हैं.

रेपो रेट में बदलाव नहीं होने का मतलब

रेपो रेट में बदलाव न होने का मतलब है कि मौजूदा इक्वेटेड मंथली इंस्टॉलमेंट (EMI) की राशि और लोन की अवधि बिना किसी जबरन बढ़ोतरी के जारी रहेगी. हालांकि, EMI बढ़ती नहीं हैं, लेकिन वे घटती भी नहीं हैं. सस्ते लोन की उम्मीद करने वाले उधारकर्ताओं को दर में कटौती के दौर का इंतजार करना पड़ सकता है.

निवेशकों की रहेगी नजर

रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​5 अगस्त को पॉलिसी के नतीजों का ऐलान करेंगे. निवेशक महंगाई, आर्थिक विकास और ब्याज दरों पर सेंट्रल बैंक के नजरिए पर बारीकी से नजर रखेंगे. रिजर्व बैंक के फैसलों का असर शेयर बाजार पर साफ-साफ नजर आ सकता है.

जून की बैठक में क्या हुआ था?

जून की MPC बैठक में अपने पिछले फैसले के साथ, RBI ने स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) दर को 5 फीसदी पर बनाए रखा, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) दर और बैंक दर को 5.5 फीसदी पर रखा था. RBI ने दिसंबर 2025 से अपनी बेंचमार्क रेपो रेट को स्थिर रखा है.

इसी तरह, US फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान सहित अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों ने भी अपनी हालिया मौद्रिक नीति बैठक में अपनी-अपनी पॉलिसी दरों को अपरिवर्तित रखने का फैसला किया.

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