Tata Sons IPO को लेकर बड़ा अपडेट, लिस्टिंग का काम शुरू! सामने आई संभावित डेट
RBI के निर्देश के बाद Tata Sons ने शेयर बाजार में लिस्टिंग की तैयारी शुरू कर दी है. फरवरी 2027 को संभावित लिस्टिंग के लिए आंतरिक लक्ष्य माना जा रहा है. हालांकि यह आधिकारिक IPO टाइमलाइन नहीं है. कंपनी को वित्तीय दस्तावेज, Capital Structure, शेयरहोल्डिंग और कई रेगुलेटरी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी.
Highlights
- Tata Sons ने लिस्टिंग की तैयारी शुरू कर दी है और फरवरी 2027 को संभावित मार्केट डेब्यू के लिए वर्किंग टारगेट माना जा रहा है.
- Tata Trusts की 65.9%, SP Group की 18.4% और Tata Group Companies की 12.9% हिस्सेदारी है.
- अभी निवेश बैंकर्स की नियुक्ति समेत कई जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होनी बाकी हैं.
Tata Sons Listing: टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी Tata Sons की शेयर बाजार में लिस्टिंग को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. RBI के निर्देश के बाद कंपनी ने सार्वजनिक लिस्टिंग की तैयारी शुरू कर दी है. RBI ने पिछले सप्ताह Tata Sons की Core Investment Company का रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की अर्जी खारिज कर दी थी और कंपनी को NBFC के अपर लेयर के लिए लागू नियमों का पालन करने को कहा था. इसके बाद Tata Sons ने अंदरूनी तौर पर यह रुख अपनाया है कि RBI का निर्देश एक रेगुलेटरी जरूरत है और कंपनी इसका पालन करेगी.
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2027 को संभावित लिस्टिंग के लिए एक आंतरिक लक्ष्य के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, यह अभी कोई आधिकारिक IPO टाइमलाइन नहीं है और कंपनी को लिस्टिंग से पहले कई कॉरपोरेट और रेगुलेटरी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी.
RBI के आदेश के बाद शुरू हुई IPO की तैयारी
रिपोर्ट के मुताबिक, 11 सितंबर को RBI के निर्देश के तुरंत बाद Tata Sons की एक टीम ने लिस्टिंग के लिए जरूरी वित्तीय और रेगुलेटरी दस्तावेज तैयार करने का काम शुरू कर दिया. हालांकि, अभी तक इन्वेस्टमेंट बैंकर्स या दूसरे बाहरी सलाहकारों की नियुक्ति नहीं हुई है. इसलिए फरवरी 2027 को फिलहाल सिर्फ एक वर्किंग टारगेट माना जा रहा है, न कि आधिकारिक IPO शेड्यूल. Tata Sons को IPO लाने से पहले कई कॉरपोरेट और रेगुलेटरी कदम पूरे करने होंगे.
RBI के Upper Layer NBFC नियम ने क्यों बदला पूरा खेल?
RBI के Scale-Based Regulation Framework के तहत Upper Layer में रखी गई NBFC कंपनियों को किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होना जरूरी है. यह नियम सिस्टम के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय संस्थानों की निगरानी मजबूत करने के मकसद से लाया गया था.
Tata Sons को भी इसी Upper Layer के तहत रखा गया है. कंपनी ने इस ढांचे से बाहर निकलने के लिए अपना Core Investment Company रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की कोशिश की थी, लेकिन RBI ने आवेदन खारिज कर दिया. अब कंपनी को लागू रेगुलेटरी नियमों का पालन करना होगा, जिसके तहत लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ना पड़ेगा.
IPO से पहले बोर्ड और Capital Structure में हो सकते हैं बदलाव
IPO की तैयारी सिर्फ DRHP यानी Draft Red Herring Prospectus दाखिल करने तक सीमित नहीं होगी. Tata Sons को अपने बोर्ड स्ट्रक्चर और Capital Structure की भी समीक्षा करनी पड़ सकती है. इसमें Bonus Issue या Share Split जैसे विकल्पों पर फैसला, मौजूदा Convertible Preference Shares का ट्रीटमेंट और Authorised Share Capital में बदलाव जैसे कदम शामिल हो सकते हैं.
इसके अलावा कंपनी को पिछले तीन साल के वित्तीय आंकड़ों और Stub Period को भी नए सिरे से पेश करना होगा. IPO दस्तावेज में Related Party Transactions से जुड़ी विस्तृत जानकारी भी देनी होगी.
Tata Sons में किसकी कितनी हिस्सेदारी?
Tata Sons में सबसे बड़ी हिस्सेदारी Tata Trusts की है.
| शेयरहोल्डर | हिस्सेदारी |
|---|---|
| Tata Trusts | 65.9% |
| SP Group | 18.4% |
| Tata Group Companies | 12.9% |
| 7 Individuals/Others | 2.8% |
Tata Trusts की 65.9% हिस्सेदारी में Sir Dorabji Tata Trust की 28%, Sir Ratan Tata Trust की 23.6%, JRD Tata Trust की 4%, Tata Education Trust की 3.7%, Tata Social Welfare Trust की 3.7%, RD Tata Trust की 2.2%, MK Tata Trust की 0.6% और Sarvajanik Seva Trust की 0.1% हिस्सेदारी शामिल है. इस शेयरहोल्डिंग स्ट्रक्चर की वजह से IPO के दौरान Tata Trusts की भूमिका काफी अहम रहेगी.
Tata Sons की Cross-Holding भी बन सकती है बड़ा मुद्दा
Tata Group की कंपनियों के बीच मौजूद Cross-Holding भी IPO के दौरान बाजार के निवेशकों की नजर में रह सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक, पब्लिक मार्केट निवेशक आम तौर पर ऐसी संरचना पसंद करते हैं जिसमें कंपनी के मालिकाना हक और दूसरी कंपनियों में हिस्सेदारी का ढांचा आसानी से समझ में आए. Tata Sons और Tata Group की दूसरी कंपनियों के बीच मौजूद Cross-Holding को लेकर भी IPO प्रक्रिया के दौरान सवाल उठ सकते हैं.
इसलिए कंपनी को अपने शेयरहोल्डिंग और आपसी हिस्सेदारी के ढांचे को लेकर विस्तृत जानकारी देनी पड़ सकती है.
SP Group के लिए भी खुल सकता है रास्ता
Tata Sons में दूसरा सबसे बड़ा शेयरहोल्डर SP Group है, जिसकी हिस्सेदारी 18.4% है. SP Group के चेयरमैन Shapoor Mistry ने शुक्रवार को सार्वजनिक रूप से Tata Sons की लिस्टिंग का समर्थन किया और आगे मिलकर काम करने की बात कही.
हालांकि, SP Group को अपनी हिस्सेदारी से जुड़ी तत्काल नकदी की जरूरत को लेकर जो भी फैसला होगा, उसे Tata Sons के बोर्ड स्तर पर संभाले जाने की बात कही गई है. Tata Sons के बोर्ड में SP Group की हिस्सेदारी को लेकर पहले भी चर्चा हो चुकी है, जिसमें Tata Sons की ओर से SP Group को उसकी कुछ हिस्सेदारी के बदले Liquidity उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी शामिल था.
AGM को भी मिला तीन महीने का एक्सटेंशन
Tata Sons को Registrar of Companies से अपनी Annual General Meeting यानी AGM के लिए तीन महीने का एक्सटेंशन भी मिला है. यह बैठक पहले 18 अगस्त को होनी थी, लेकिन पर्याप्त कोरम नहीं होने के कारण इसे टाल दिया गया था. कोरम की समस्या इसलिए आई क्योंकि Maharashtra Charity Commissioner ने Sir Ratan Tata Trust पर बैठक करने या फैसले लेने से जुड़ी पाबंदियां नहीं हटाई थीं. Sir Ratan Tata Trust और Sir Dorabji Tata Trust मिलकर Tata Sons में बहुमत हिस्सेदारी रखते हैं.
पाबंदियों के चलते दोनों ट्रस्ट की ओर से संयुक्त रूप से नियुक्त nominee बैठक में हिस्सा नहीं ले सका और जरूरी quorum पूरा नहीं हो पाया.
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