सेंट्रल बैंक अगले महीने शुरू करेगा GIFT सिटी ब्रांच, फॉरेक्स बिजनेस जुटाने का प्लान, जानें- कौन सी मिलेगी सर्विस

बैंक को IBU शुरू करने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (IFSCA) से रेगुलेटरी मंजूरी मिल गई है. बैंक अपने ग्राहकों को कई तरह की सेवाएं देगा. IBU का खुलना बैंक की ग्रोथ स्टोरी में एक अहम पड़ाव होगा.

GIFT City से विदेशी निवेश होगा आसान. Image Credit: Getty image

अपने इंटरनेशनल बैंकिंग बिजनेस को बढ़ाने के मकसद से सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया अगले महीने के पहले हफ्ते में गांधीनगर की GIFT City में अपनी IFSC बैंकिंग यूनिट (IBU) शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है. सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के MD और CEO कल्याण कुमार ने PTI को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि बैंक को IBU शुरू करने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (IFSCA) से रेगुलेटरी मंजूरी मिल गई है.

फॉरेक्स बिजनेस जुटाएगा बैंक

कुमार के अनुसार, इस सरकारी बैंक ने पहले ही एक ब्रांच हेड तैनात कर दिया है और वहां जमीनी स्तर पर काम चल रहा है. उन्होंने कहा, ‘हम अगले महीने के पहले हफ्ते तक अपनी IBU ब्रांच खोलने की स्थिति में होंगे. बैंक निश्चित रूप से अच्छी मात्रा में फॉरेक्स बिजनेस जुटाएगा.’

इस बात पर जोर देते हुए कि IBU का खुलना बैंक की ग्रोथ स्टोरी में एक अहम पड़ाव होगा, कुमार ने कहा कि इससे इंटरनेशनल बैंकिंग बिजनेस को बढ़ाने में मदद मिलेगी और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ग्राहकों को खास बैंकिंग सेवाएं भी दे पाएगा.

इंटरनेशनल मार्केट तक एक्सेस

कुमार ने कहा कि IBU बैंक को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों तक एक्सेस देगा और उसे अपने उन कॉरपोरेट ग्राहकों को उत्पादों की पूरी रेंज उपलब्ध कराने में सक्षम बनाएगा, जिनकी विदेशी मुद्रा फंडिंग की जरूरतें हैं. उन्होंने आगे कहा कि बैंक अपने ग्राहकों को कई तरह की सेवाएं देगा, जिनमें विदेशी मुद्रा ऋण, ट्रेड फाइनेंशियल सॉल्यूशन, ट्रेजरी और जोखिम प्रबंधन उत्पाद, और अधिक सुविधाजनक बैंकिंग सॉल्यूशन शामिल हैं.

जब उनसे पूछा गया कि क्या Expected Credit Loss (ECL) के दिशानिर्देश, जो 1 अप्रैल, 2027 से लागू होंगे, बैंक के मुनाफे पर असर डालेंगे, तो कुमार ने कहा कि बैंक पिछले कई तिमाहियों से ECL फ्रेमर्क पर जाने की तैयारी कर रहा है.

ECL फ्रेमवर्क

उन्होंने कहा, ‘हम कई तिमाहियों से इस पर काम कर रहे हैं और हमने स्टेज 1 और स्टेज 2 एसेट्स के लिए 1,575 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रोविजन किया है. हम स्टेज 3 एसेट्स के लिए 100 प्रतिशत प्रोविजन कर रहे हैं. इसलिए, ECL फ्रेमवर्क में जाने में कोई चुनौती नहीं है.’

ECL फ्रेमवर्क के अनुसार, बैंकों को ‘डिफॉल्ट की संभावना’, ‘डिफॉल्ट होने पर नुकसान’ और ‘डिफॉल्ट के समय जोखिम’ का इस्तेमाल करके नुकसान का अनुमान लगाना जरूरी होता है. इससे क्रेडिट की स्थिति बिगड़ने का पता पहले चल जाता है और जोखिम का प्रबंधन ज्यादा सक्रियता से किया जा सकता है.

क्रेडिट मॉनिटरिंग की क्वालिटी में सुधार

ECL फ्रेमवर्क मौजूदा नियमों की तुलना में थोड़ी अधिक न्यूनतम प्रोविजनिंग जरूरतें तय करता है, जिसके चलते ज्यादातर प्रोडक्ट सेगमेंट में प्रोविजन बढ़ गए हैं. कुमार ने आगे कहा कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने क्रेडिट अंडरराइटिंग की क्वालिटी और लोन देने के बाद क्रेडिट मॉनिटरिंग की क्वालिटी में काफी सुधार किए हैं.

मौजूदा मैक्रोइकोनॉमिक और घरेलू हालात को देखते हुए उन्होंने कहा, ‘हम अलग-अलग मॉडल तैयार कर रहे हैं, जिनके जरिए हम असल में स्ट्रेस टेस्टिंग कर सकें और देख सकें कि हमारा पोर्टफोलियो कैसा प्रदर्शन करता है और इस गतिशील प्रक्रिया में हम ECL में जाने के लिए तैयार हैं.’

यह भी पढ़ें: BSE के शेयर में बंपर उछाल, Nifty50 में शामिल होने की खबर से रॉकेट बना स्टॉक; एक साल में 70% का रिटर्न