विदेश भेजे जा रहे पैसों में गड़बड़ी का शक, Income Tax Department ने शुरू की जांच; रडार पर 394 संस्थाएं
Income Tax Department ने पिछले 3 वर्षों में विदेश भेजी गई बड़ी रकम में कथित अनियमितताओं को लेकर 394 संस्थाओं और 36 प्रोफेशनल्स की जांच शुरू की है. CBDT के मुताबिक, कुछ संस्थाओं ने कम बिजनेस एक्टिविटी के बावजूद विदेशों में बड़ी रकम भेजी और कुछ ने Income Tax Return भी दाखिल नहीं किया. जांच में 117 संस्थाएं बॉर्डरिंग स्टेट्स में स्थित हैं.
Highlights
- विदेश भेजी गई बड़ी रकम में गड़बड़ी के शक पर 394 संस्थाओं की जांच शुरू.
- 36 प्रोफेशनल्स और बड़ी संख्या में Form 15CB जारी करने वालों की भूमिका भी जांच के घेरे में.
- कम बिजनेस एक्टिविटी के बावजूद विदेशी भुगतान और घोषित पते पर संस्थाओं के नहीं मिलने से बढ़ा शक.
Income Tax Department ने पिछले 3 वर्षों के दौरान विदेश भेजी गई बड़ी रकम में कथित अनियमितताओं को लेकर 394 संस्थाओं और 36 प्रोफेशनल्स के खिलाफ वेरिफिकेशन एक्सरसाइज शुरू की है. Central Board of Direct Taxes (CBDT) ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी. विभाग ऐसे मामलों की जांच कर रहा है, जहां संस्थाओं ने विदेशों में बड़ी रकम भेजी, लेकिन उनकी रिपोर्टेड बिजनेस एक्टिविटी बेहद कम थी या उन्होंने Income Tax Return तक दाखिल नहीं किया था.
394 संस्थाओं में 117 बॉर्डरिंग स्टेट्स में
CBDT के मुताबिक, जांच के दायरे में शामिल 394 संस्थाओं में से 117 बॉर्डरिंग स्टेट्स में स्थित हैं. विभाग के डेटा एनालिसिस में कुछ ऐसी संस्थाएं सामने आईं, जिन्होंने फ्रेट, सॉफ्टवेयर इंपोर्ट और कंसल्टेंसी सर्विसेज जैसे उद्देश्यों के लिए विदेशों में बड़ी रकम भेजी.
जांच में पाया गया कि कुछ मामलों में विदेश भेजी गई रकम संबंधित संस्थाओं की रिपोर्टेड बिजनेस एक्टिविटी के मुकाबले काफी ज्यादा थी. कुछ संस्थाएं उन पतों पर भी काम करती हुई नहीं मिलीं, जो उन्होंने आधिकारिक रिकॉर्ड में घोषित किए थे. इन परिस्थितियों ने विभाग के सामने इन विदेशी भुगतानों की वास्तविकता को लेकर सवाल खड़े किए हैं.
36 प्रोफेशनल्स की भूमिका भी जांच के दायरे में
Income Tax Department केवल संस्थाओं तक सीमित नहीं है. विभाग उन प्रोफेशनल्स की भूमिका की भी जांच कर रहा है, जिन्होंने इन विदेशी भुगतानों से जुड़े सर्टिफिकेट जारी किए थे. खास तौर पर उन प्रोफेशनल्स की जांच की जा रही है, जिन्होंने बड़ी संख्या में Form 15CB सर्टिफिकेट जारी किए.
Form 15CB एक अकाउंटेंट द्वारा जारी किया जाने वाला सर्टिफिकेट है, जिसमें विदेश भेजे जा रहे किसी भुगतान पर टैक्स देनदारी बनती है या नहीं, इसकी जानकारी दी जाती है. CBDT के मुताबिक, कुछ विदेशी भुगतानों का एक ही क्लस्टर की संस्थाओं के बीच होना भी जांच का विषय है. इससे यह सवाल उठा है कि क्या ये ट्रांजैक्शन वास्तविक थे और भुगतान को सर्टिफाई करने से पहले जरूरी जांच-पड़ताल की गई थी.
‘अकॉमोडेशन एंट्री’ नेटवर्क से भी जुड़ रही जांच
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब Income Tax Department की एक पिछली सर्च में कथित तौर पर ऐसे नेटवर्क का पता चला था, जो फर्जी डोनेशन और काल्पनिक चैरिटेबल ट्रस्ट के जरिए ‘अकॉमोडेशन एंट्री’ उपलब्ध कराने में शामिल था. अकॉमोडेशन एंट्री का मतलब ऐसी कागजी ट्रांजैक्शन से है, जिसके जरिए बिना हिसाब वाले पैसे को किसी वैध ट्रांजैक्शन से आया हुआ दिखाने की कोशिश की जाती है.
इसमें डोनेशन, लोन या इन्वेस्टमेंट जैसी ट्रांजैक्शन को वास्तविक दिखाया जा सकता है, जबकि उसके पीछे की वास्तविक गतिविधि मौजूद नहीं होती. विभाग अब विदेशी भुगतान से जुड़ी संस्थाओं, उनके पीछे मौजूद लोगों और इन ट्रांजैक्शन को सर्टिफाई करने वाले प्रोफेशनल्स की भूमिका की जांच कर रहा है. CBDT ने कहा है कि जांच आगे भी जारी है.
Form 15CB जारी करने वालों की जिम्मेदारी
विभाग के मुताबिक, Form 15CB और अन्य सर्टिफिकेट जारी करने वाले अकाउंटेंट्स से उम्मीद की जाती है कि वे ट्रांजैक्शन और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच करने के बाद ही उन्हें सर्टिफाई करें. हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि संदिग्ध विदेशी भुगतान की जांच जरूरी है, लेकिन वास्तविक कारोबारी ट्रांजैक्शन, प्रोफेशनल लापरवाही और जानबूझकर की गई टैक्स चोरी के बीच अंतर करना भी जरूरी है.
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