AI फैक्ट्री का ₹15,000 करोड़ का ठेका, इलेक्ट्रॉनिक्स में ₹5,000 करोड़ निवेश; L&T आखिर क्या करने वाली है?
L&T अपने पुराने इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार की ताकत के सहारे नए क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रही है. कंपनी को Together AI से 15,000 करोड़ रुपये तक का AI फैक्ट्री ठेका मिला है. साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार में 5,000 करोड़ रुपये निवेश, सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी, डिफेंस और रेयर-अर्थ मैग्नेट जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार कर रही है.
L&T New Business Strategy: Larsen & Toubro यानी L&T को आमतौर पर बड़े-बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बनाने वाली कंपनी के तौर पर जाना जाता है. लेकिन अब कंपनी धीरे-धीरे अपने कारोबार को नई दिशा दे रही है. पिछले हफ्ते L&T को अमेरिका की Together AI से चेन्नई में AI फैक्ट्री बनाने का 15,000 करोड़ रुपये तक का ठेका मिला. इस फैक्ट्री में करीब 10,000 Nvidia B300 GPU लगाए जाएंगे. यह सिर्फ एक बड़ा ऑर्डर नहीं है, बल्कि L&T के कारोबार में हो रहे बड़े बदलाव का संकेत भी है.
कंपनी अब अपने पुराने इंजीनियरिंग और निर्माण कारोबार की ताकत का इस्तेमाल नए दौर के कारोबार में उतरने के लिए कर रही है. सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर, ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी स्टोरेज, डिफेंस टेक्नोलॉजी और रेयर-अर्थ मैग्नेट जैसे क्षेत्रों में L&T की दिलचस्पी इसी रणनीति का हिस्सा है.
डेयरी मशीनों से शुरू हुई थी L&T की कहानी
L&T की कहानी आज से करीब 88 साल पहले शुरू हुई थी. 1938 में डेनमार्क के दो इंजीनियर Henning Holck-Larsen और Søren Kristian Toubro ने बॉम्बे में डेयरी उपकरणों के आयात का छोटा कारोबार शुरू किया था. बाद में कंपनी ने खुद मशीनें बनानी शुरू कीं और धीरे-धीरे इंजीनियरिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ती गई. 1946 में Larsen & Toubro को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के रूप में शामिल किया गया.
करीब आठ दशक के सफर में कंपनी ने कई कारोबार शुरू किए और कई से बाहर भी निकली. अब एक बार फिर L&T अपने कारोबार को नए सिरे से बदल रही है.
AI फैक्ट्री से शुरू हुआ नया अध्याय
L&T का हालिया AI फैक्ट्री वाला सौदा इसलिए खास है क्योंकि इसमें कंपनी सिर्फ सामान्य निर्माण का काम नहीं कर रही. Together AI के लिए बनने वाले इस AI डेटा सेंटर में करीब 10,000 Nvidia B300 GPU इस्तेमाल होंगे. इस ठेके की संभावित कीमत करीब 15,000 करोड़ रुपये है. Reuters के मुताबिक इसकी संभावित कीमत करीब 1.57 अरब डॉलर है.
AI फैक्ट्री में सिर्फ इमारत खड़ी करना ही काम नहीं है. इसके लिए बड़ी मात्रा में बिजली, कूलिंग, नेटवर्किंग और जटिल तकनीकी ढांचे की जरूरत होती है. L&T का फायदा यह है कि इन क्षेत्रों में उसके पास पहले से इंजीनियरिंग और बड़े प्रोजेक्ट संभालने का अनुभव है. यानी L&T अचानक AI कंपनी नहीं बन रही है. वह AI कारोबार के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने वाले कारोबार में उतर रही है.
इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार में ₹5,000 करोड़ लगाएगी
AI फैक्ट्री के ठेके से करीब दो हफ्ते पहले L&T ने नए Electronic Products & Systems कारोबार के लिए अगले पांच साल में करीब 5000 करोड़ रुपये निवेश करने की योजना बताई थी. इस कारोबार में पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, औद्योगिक रोबोट और ऑटोमेशन तथा रणनीतिक इलेक्ट्रॉनिक्स शामिल हैं. कंपनी का अनुमान है कि इस कारोबार के लिए बाजार आज के करीब 2 अरब डॉलर से बढ़कर 2031 तक 4.85 अरब डॉलर हो सकता है.
इसके लिए कोयंबटूर में 40 एकड़ के परिसर में निर्माण और अनुसंधान का ढांचा तैयार किया जा रहा है.
सिर्फ ठेके लेने से आगे बढ़ना चाहती है कंपनी
L&T के पुराने कारोबार में कंपनी की ताकत बड़े प्रोजेक्ट को तैयार करके देने में रही है. लेकिन नए कारोबार में कंपनी ऐसे उत्पाद और तकनीक तैयार करना चाहती है, जिन्हें बार-बार बेचा जा सके. इससे कंपनी के लिए तकनीक पर मालिकाना हक, बेहतर मार्जिन और लंबे समय तक ग्राहक जुड़े रहने की संभावना बन सकती है.
2000 के बाद भी बदली थी कंपनी की तस्वीर
यह पहली बार नहीं है जब L&T ने अपने कारोबार का रास्ता बदला है. 1990 के दशक के आखिर में कंपनी के पास इंजीनियरिंग और निर्माण के साथ सीमेंट, कांच और ट्रैक्टर जैसे अलग-अलग कारोबार भी थे. 2000 से 2005 के बीच कंपनी ने सीमेंट कारोबार Aditya Birla Group को दे दिया. इसके बाद कांच और John Deere के साथ ट्रैक्टर कारोबार से भी बाहर निकल गई.
कंपनी का मकसद अपने पैसे और संसाधनों को उन कारोबारों में लगाना था, जहां उसकी इंजीनियरिंग क्षमता ज्यादा काम आ सके. इसके बाद L&T ने बिजली, जहाज निर्माण, रेलवे, इंफ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में विस्तार किया.
विदेशों में भी कारोबार बढ़ाया
2010 के दशक में L&T ने भारत के बाहर, खासकर पश्चिम एशिया में अपना कारोबार तेजी से बढ़ाया. कंपनी ने हाइड्रोकार्बन, बिजली और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में बड़े प्रोजेक्ट हासिल किए. इसके साथ ही L&T Technology Services और LTI Mindtree जैसी कंपनियों के जरिए इंजीनियरिंग सॉफ्टवेयर, डिजिटल तकनीक और IT सेवाओं में भी उसकी मौजूदगी बढ़ी.
वित्त वर्ष 2026 में L&T की अंतरराष्ट्रीय इनकम 1.54 लाख करोड़ रुपये रही, जो उसकी कुल आय का 54% थी. मार्च 2026 तक कंपनी की कुल ऑर्डर बुक 7.40 लाख करोड़ रुपये थी, जो एक साल पहले के मुकाबले 27.8% ज्यादा थी. तीन महीने बाद यह बढ़कर 7.79 लाख करोड़ रुपये हो गई.
सेमीकंडक्टर और AI पर भी बड़ा दांव
अब कंपनी तकनीक के क्षेत्र में और आगे बढ़ रही है. L&T ने सेमीकंडक्टर तकनीक, डेटा सेंटर, ग्रीन हाइड्रोजन और डिजिटल प्लेटफॉर्म को नए कारोबार के रूप में पहचाना है. L&T Semiconductor Technologies ने बेंगलुरु की SiliConch Systems को खरीदा है. इस कंपनी के पास 30 से ज्यादा पेटेंट हैं. इसके अलावा L&T ने क्लाउड और AI कंपनी E2E Networks में 15% हिस्सेदारी भी ली है.
इन कारोबारों को कंपनी अलग-अलग दांव के तौर पर नहीं देख रही. सेमीकंडक्टर, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, डेटा सेंटर, ग्रीन हाइड्रोजन और औद्योगिक ऑटोमेशन एक-दूसरे से जुड़े हुए क्षेत्र हैं.
अगले पांच साल में ₹1.5 लाख करोड़ के निवेश की योजना
L&T के चेयरमैन और MD S.N. Subrahmanyan ने पिछले साल बताया था कि कंपनी ने करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये के रणनीतिक कैपिटल एक्सपेंडिचर की योजना बनाई है. इस निवेश में सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन, डेटा सेंटर और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्र शामिल हैं. उस समय कंपनी के पास करीब 50,000 करोड़ रुपये नकद था और समूह स्तर पर लगभग कोई कर्ज नहीं था.
कंपनी की सोच को Subrahmanyan के इस बयान से समझा जा सकता है- “Grow to sell, sell to grow.” यानी कंपनी कारोबार खड़ा करना, उसे बड़ा करना और जरूरत पड़ने पर उससे पैसा बनाना चाहती है.
ग्रीन हाइड्रोजन और बैटरी में भी तैयारी
L&T सिर्फ सोलर या पवन ऊर्जा परियोजनाएं बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहती. कंपनी ग्रीन हाइड्रोजन के लिए जरूरी उपकरण बनाने पर भी काम कर रही है. कंपनी ने एक इलेक्ट्रोलाइजर निर्माण कारोबार तैयार किया है और इसे भारत की पहली अल्कलाइन इलेक्ट्रोलाइजर गीगा-फैक्ट्री बताया है. इसके अलावा कांचीपुरम में बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली की फैक्ट्री भी है.
डिफेंस कारोबार भी बदल रहा है
डिफेंस कारोबार में भी L&T अब सिर्फ ठेकेदार की भूमिका तक सीमित नहीं रहना चाहती. कंपनी की Precision Engineering & Systems इकाई ने 250 से ज्यादा सिस्टम और उत्पाद विकसित किए हैं, जिनमें से 50 से ज्यादा का उत्पादन और इस्तेमाल शुरू हो चुका है. इस कारोबार में रणनीतिक इलेक्ट्रॉनिक्स, रडार, ड्रोन, जमीन पर इस्तेमाल होने वाले प्लेटफॉर्म और पानी के भीतर इस्तेमाल होने वाली तकनीक शामिल हैं.
कंपनी को उम्मीद है कि डिफेंस की यह इकाई अगले पांच साल में अपनी आय को तीन गुना कर सकती है. अभी इसका योगदान L&T की सालाना आय में करीब 3% है.
रेयर-अर्थ मैग्नेट में भी दिलचस्पी
L&T रेयर-अर्थ परमानेंट मैग्नेट बनाने के कारोबार में उतरने की संभावना भी तलाश रही है. कंपनी ने सरकार की ₹7,280 करोड़ की योजना के तहत घरेलू रेयर-अर्थ मैग्नेट निर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए बोली लगाने वाली 20 कंपनियों में हिस्सा लिया है.
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह L&T का बड़ा कारोबार बनेगा. लेकिन कंपनी के इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबिलिटी, बैटरी, नवीकरणीय ऊर्जा और डिफेंस कारोबार को देखते हुए यह क्षेत्र उसकी मौजूदा रणनीति से जुड़ा हुआ दिखाई देता है.
पुराना L&T कारोबार अभी भी मजबूत
नई तकनीक पर इतना जोर देने के बावजूद L&T का मुख्य कारोबार अभी भी इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा ही है. मार्च 2026 में कंपनी की 7.40 लाख करोड़ रुपये की ऑर्डर बुक में इंफ्रास्ट्रक्चर की हिस्सेदारी 57% और ऊर्जा की 35% थी. हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी सिर्फ 5% थी.
वित्त वर्ष 2026 में कंपनी को रिकॉर्ड 4.36 लाख करोड़ रुपये के नए ऑर्डर मिले. इनमें अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर की हिस्सेदारी ₹2.51 लाख करोड़ यानी 58% रही. कंपनी का राजस्व ₹2.86 लाख करोड़ रहा, जो 11.8% बढ़ा.
वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कंपनी को 1.08 लाख करोड़ रुपये के नए ऑर्डर मिले. इस दौरान राजस्व 67,942 करोड़ रुपये रहा और ऑर्डर बुक बढ़कर 7.79 लाख करोड़ रुपये हो गई.
पश्चिम एशिया पर निर्भरता बनी चुनौती
L&T की अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी बढ़ी है, लेकिन इसका एक बड़ा हिस्सा अभी भी पश्चिम एशिया पर निर्भर है. मार्च 2026 में कंपनी की कुल ऑर्डर बुक में अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर की हिस्सेदारी 52% थी, जबकि अकेले मध्य पूर्व की हिस्सेदारी करीब 40% थी. 2026 में पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण प्रोजेक्ट के काम पर असर पड़ा. हालांकि, कंपनी ने यूरोप में ऑफशोर विंड और भारत में नए प्रोजेक्ट हासिल करके कुछ हद तक इसका असर कम किया.
वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में मध्य पूर्व से मिले ऑर्डर कुल नए ऑर्डर का सिर्फ 11% रहे, जबकि पिछली तिमाही में यह 47% थे.
असली बदलाव दिखने में लगेगा समय
AI फैक्ट्री का ₹15,000 करोड़ का ठेका, ₹5,000 करोड़ का इलेक्ट्रॉनिक्स निवेश या रेयर-अर्थ मैग्नेट में दिलचस्पी अपने आप में L&T को तकनीकी कंपनी नहीं बना देती. कंपनी का ज्यादातर कारोबार अभी भी पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग कारोबार से आता है. नए कारोबार को बड़ा बनने में कई साल लग सकते हैं और इनमें से हर कारोबार सफल हो, यह जरूरी नहीं है.
लेकिन कंपनी ने इन क्षेत्रों में अलग कारोबार बनाए हैं, बड़ा निवेश तय किया है, तकनीक खरीद रही है और निर्माण क्षमता तैयार कर रही है. इसलिए इसे सिर्फ अलग-अलग प्रयोगों की सूची कहना भी सही नहीं होगा.
L&T की अगली पारी कैसी होगी?
L&T ने करीब 2000 के आसपास पहली बड़ी कारोबारी बदलाव की शुरुआत की थी. तब कंपनी ने सीमेंट, कांच और ट्रैक्टर जैसे कारोबारों से निकलकर इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान बढ़ाया था.
अब कंपनी उसी इंजीनियरिंग ताकत को तकनीक और अपने खुद के उत्पादों में बदलने की कोशिश कर रही है. ₹5,000 करोड़ का इलेक्ट्रॉनिक्स निवेश, सेमीकंडक्टर डिजाइन, AI फैक्ट्री, ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी स्टोरेज, डिफेंस सिस्टम और रेयर-अर्थ मैग्नेट इसी बड़ी रणनीति के हिस्से हैं.
यानी L&T का मकसद सिर्फ बड़े प्रोजेक्ट बनाना नहीं, बल्कि ऐसे कारोबार खड़े करना भी है जहां वह तकनीक और उत्पाद खुद तैयार करे और उन्हें बार-बार बेच सके. Nvidia के लिए बनने वाली AI फैक्ट्री इसी बदलाव की एक झलक है.
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