अब बिजली भी होगी महंगी! बढ़ सकता है फिक्स्ड चार्ज, CEA ने दिया नया प्रस्ताव
सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी ने देशभर में बिजली टैरिफ व्यवस्था में बदलाव का प्रस्ताव दिया है. इसके तहत कंज्यूमर के मासिक फिक्स्ड चार्ज को धीरे- धीरे बढ़ाने की सिफारिश की गई है. CEA का कहना है कि रूफटॉप सोलर और कैप्टिव पावर की ओर बढ़ते रुझान से डिस्कॉम की इनकम प्रभावित हो रही है.

Electricity Tariff: देश में बिजली टैरिफ व्यवस्था में बडे़ बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है. सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी ने बिजली कंज्यूमर पर लगने वाले फिक्स्ड चार्ज को बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है. इसका मकसद बिजली डिस्ट्रब्यूशन कंपनियों यानी डिस्कॉम की वित्तीय स्थिति को मजबूत करना है. CEA के अनुसार रूफटॉप सोलर और कैप्टिव पावर की ओर बढ़ते रुझान से डिस्कॉम की इनकम प्रभावित हो रही है. कई इंडस्ट्री और समृद्ध कंज्यूमर अब खुद बिजली प्रोडक्शन कर रहे हैं, जिससे बिजली खरीद कम हो रही है. हालांकि वे अब भी बैकअप के लिए ग्रिड पर निर्भर हैं. ऐसे में CEA ने चरणबद्ध तरीके से फिक्स्ड चार्ज बढ़ाने की सिफारिश की है.
फिक्स्ड चार्ज बढ़ाने की तैयारी
CEA ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बिजली कंपनियों की लागत का बड़ा हिस्सा ट्रांसमिशन, कर्मचारियों के सैलरी, नेटवर्क रखरखाव और बिजली प्रोडक्शन कंपनियों को पेमेंट में खर्च होता है. इसके बावजूद डिस्कॉम की कमाई का बहुत छोटा हिस्सा फिक्स्ड चार्ज से आता है. अभी अधिकतर कमाई प्रति यूनिट बिजली चार्ज से होती है. ऐसे में जब बिजली की खपत घटती है तो कंपनियों की इनकम पर असर पड़ता है. इसी समस्या को दूर करने के लिए फिक्स्ड चार्ज बढ़ाने का सुझाव दिया गया है.
रूफटॉप सोलर से बढ़ रही चुनौती
रिपोर्ट में कहा गया है कि तेजी से बढ़ते रूफटॉप सोलर सिस्टम डिस्कॉम के लिए चुनौती बन रहे हैं. कई घर और इंडस्ट्री अब अपनी बिजली खुद तैयार कर रहे हैं. इससे उनकी ग्रिड से बिजली खरीद कम हो गई है. हालांकि जरूरत पड़ने पर वे ग्रिड का इस्तेमाल करते हैं. इससे डिस्कॉम को नेटवर्क और रखरखाव की लागत उठानी पड़ती है लेकिन इनकम कम हो जाती है. इसी कारण अलग टैरिफ व्यवस्था की जरूरत महसूस की जा रही है.
2030 तक लागू हो सकता है नया मॉडल
CEA ने सुझाव दिया है कि वर्ष 2030 तक घरेलू और एग्रीकल्चर कंज्यूमर से 25 फीसदी फिक्स्ड कॉस्ट रिकवरी की जाए. वहीं इंडस्ट्रीयल, कमर्सियल और संस्थागत कंज्यूमर से 100 फीसदी तक फिक्स्ड कॉस्ट वसूली का टारगेट रखा गया है. इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की सिफारिश की गई है. इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में बिजली बिल में मासिक तय शुल्क का हिस्सा बढ सकता है. इससे बिजली खपत कम होने पर भी कंज्यूमर को फिक्स्ड पेमेंट करना होगा.
नेट मीटरिंग कंज्यूमर के लिए अलग टैरिफ
CEA ने रूफटॉप सोलर और नेट मीटरिंग कंज्यूमर के लिए अलग टैरिफ स्ट्रक्चर बनाने का भी सुझाव दिया है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ग्रिड का इस्तेमाल करने वाले कंज्यूमर उसके रखरखाव की लागत में भी योगदान दें. जानकारों का मानना है कि इससे बिजली कंपनियों की वित्तीय स्थिति मजबूत हो सकती है. हालांकि कंज्यूमर पर अतिरिक्त बोझ बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है.
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डिस्कॉम की वित्तीय स्थिति पर फोकस
CEA का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में बिजली डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों की वित्तीय हालत दबाव में है. बिजली मांग में कमी आने पर उनकी कमाई प्रभावित होती है जबकि खर्च लगातार बना रहता है. ऐसे में स्थिर इनकम सुनिश्चित करने के लिए फिक्स्ड चार्ज बढ़ाना जरूरी माना जा रहा है. यह प्रस्ताव जल्द ही फोरम ऑफ रेगुलेटर्स के सामने रखा जाएगा. इसके बाद राज्यों में इसे लागू करने पर फैसला लिया जा सकता है.